
Project Alankar: यूपी के राजकीय स्कूलों में बदला नियम, अब भारांक नहीं स्कूल की जरूरत से होंगे विकास कार्य
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विकास कार्यों को लेकर शासन ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब स्कूलों में कौन सा निर्माण या विकास कार्य कराया जाना है, यह किसी निर्धारित भारांक के आधार पर तय नहीं होगा। विद्यालय की वास्तविक जरूरत को प्राथमिकता देते हुए विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। शासन ने प्रोजेक्ट अलंकार में लागू भारांक आधारित प्राथमिकता व्यवस्था को समाप्त कर नई प्रक्रिया लागू की है।नई व्यवस्था के तहत विद्यालय के प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक को सबसे पहले स्कूल की वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा। इसके बाद जर्जर भवन के पुनर्निर्माण, मरम्मत, पेयजल, शौचालय, कक्षाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं से संबंधित प्रस्ताव सीधे जिला विद्यालय निरीक्षक यानी डीआईओएस को भेजे जाएंगे। इससे विद्यालयों को अपनी वास्तविक जरूरत के अनुसार विकास कार्य प्रस्तावित करने का अवसर मिलेगा।
प्रधानाचार्य तैयार करेंगे विद्यालय की जरूरत का प्रस्ताव
नई व्यवस्था में विद्यालय स्तर से ही विकास कार्यों की जरूरत चिन्हित की जाएगी। प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक यह देखेंगे कि स्कूल में किन सुविधाओं की कमी है और किन भवनों या संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है।इसके बाद प्रस्ताव जिला विद्यालय निरीक्षक के पास भेजा जाएगा। डीआईओएस संबंधित कार्य के लिए कार्यदायी संस्था से अनुमानित लागत यानी इस्टीमेट तैयार कराएंगे। इसके बाद प्रस्ताव और इस्टीमेट को जिला स्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा।इस प्रक्रिया में विद्यालय की वास्तविक जरूरत को प्राथमिक आधार बनाया गया है। पुरानी व्यवस्था में निर्धारित भारांक के आधार पर प्राथमिकता तय होने के कारण कुछ जरूरी कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने में समय लगने की समस्या सामने आती थी। नई व्यवस्था से इस प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया गया है।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होगी प्रस्ताव की जांच
विद्यालय से भेजे गए प्रस्ताव पर सीधे धन आवंटन नहीं होगा। डीआईओएस की ओर से कार्यदायी संस्था से इस्टीमेट तैयार कराने के बाद प्रस्ताव जिला स्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा।इस समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे। मुख्य विकास अधिकारी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता तकनीकी सदस्य होंगे, जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।समिति प्रस्ताव और अनुमानित लागत की जांच के बाद अपनी स्वीकृति देगी। इसके बाद स्वीकृत प्रस्ताव और इस्टीमेट शिक्षा निदेशक माध्यमिक को भेजे जाएंगे। वहां परीक्षण के बाद धन आवंटन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
प्रोजेक्ट अलंकार में 19 तरह के काम
प्रोजेक्ट अलंकार के तहत राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कई तरह की आधारभूत और शैक्षिक सुविधाओं का विकास किया जा सकेगा। इनमें स्वच्छ पाइप पेयजल, बालक और बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, दिव्यांग शौचालय और अतिरिक्त कक्ष जैसी सुविधाएं शामिल हैं।इसके अलावा विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय, स्मार्ट कक्षा, खेल मैदान, बैडमिंटन कोर्ट, वालीबाल कोर्ट और ओपन जिम जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं।विद्यालयों में बाउंड्रीवाल और गेट, बहुउद्देशीय हॉल, साइकिल स्टैंड, सौर ऊर्जा संयंत्र और वर्षा जल संचयन जैसी सुविधाओं के लिए भी प्रस्ताव भेजे जा सकेंगे। सामूहिक हाथ धोने की इकाई, कक्षाओं में टाइल्स, प्रधानाचार्य कक्ष, स्टाफ रूम और पानी की सुविधा वाली रसोई को भी विकास कार्यों में शामिल किया गया है।
स्कूल की जरूरत के हिसाब से प्रस्ताव को मिलेगी प्राथमिकता
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब विद्यालय को अपनी जरूरत साबित करने के लिए केवल किसी निर्धारित भारांक पर निर्भर नहीं रहना होगा। स्कूल की वास्तविक स्थिति के आधार पर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।उदाहरण के लिए यदि किसी विद्यालय का भवन जर्जर है तो पुनर्निर्माण या मरम्मत का प्रस्ताव भेजा जा सकता है। इसी तरह जहां विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त शौचालय नहीं हैं, वहां शौचालय निर्माण को प्राथमिकता दी जा सकती है। किसी स्कूल में प्रयोगशाला, पुस्तकालय या अतिरिक्त कक्ष की कमी है तो उसके लिए भी प्रस्ताव भेजा जा सकेगा।इससे विद्यालयों की स्थानीय जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ेगी।
पहले से 2,383 विद्यालयों में चल रहा काम
प्रोजेक्ट अलंकार के तहत उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पहले से आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने का काम चल रहा है। मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के निर्माण और अनुरक्षण कार्यों के लिए अब तक 1,427.91 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके थे और 2,383 विद्यालयों को इसका लाभ मिल रहा था।इसी रिपोर्ट के अनुसार 489 विद्यालयों में पुस्तकालय कक्ष, 301 विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाएं, 1,150 विद्यालयों में बहुउद्देशीय हॉल और 1,048 विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा 482 अतिरिक्त कक्ष और 1,167 विद्यालयों में चहारदीवारी का काम भी योजना के तहत किया गया था।
अलग-अलग जिलों में भी तेजी से हो रहे काम
प्रोजेक्ट अलंकार के तहत अलग-अलग जिलों में भी विद्यालयों के विकास के लिए काम चल रहा है। सितंबर 2026 में फतेहपुर के 43 राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में 15 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्यों की जानकारी सामने आई थी। वहां स्वीकृत 102 कार्यों में से 66 कार्य पूरे होने और 36 कार्य शेष होने की जानकारी दी गई थी।मऊ में भी 50 वर्ष से अधिक पुराने तीन सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के कायाकल्प के लिए 2.73 करोड़ रुपये से अधिक का बजट स्वीकृत किया गया है। इससे जर्जर भवनों की मरम्मत और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा
प्रोजेक्ट अलंकार में भारांक आधारित प्राथमिकता खत्म होने के बाद अब विद्यालय की वास्तविक आवश्यकता प्रस्ताव का मुख्य आधार होगी। प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक अपने स्कूल की स्थिति का आकलन कर प्रस्ताव भेजेंगे। इसके बाद डीआईओएस, कार्यदायी संस्था और जिला स्तरीय समिति के स्तर पर जांच होगी।हालांकि प्रस्ताव भेजने के बाद धनराशि स्वतः जारी नहीं होगी। जिला स्तरीय समिति की स्वीकृति, शिक्षा निदेशक माध्यमिक के स्तर पर परीक्षण और शासन से धन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कार्य के लिए बजट उपलब्ध कराया जाएगा।इस बदलाव से सरकार का उद्देश्य स्कूलों में जरूरी सुविधाओं के विकास की प्रक्रिया को अधिक जरूरत आधारित और सरल बनाना है। इससे जर्जर भवनों, पेयजल, शौचालय, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और डिजिटल शिक्षा जैसी सुविधाओं की कमी वाले विद्यालयों को अपनी आवश्यकता के अनुसार प्रस्ताव रखने का अवसर मिलेगा।
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