IAS vs IFS Salary 2026: IAS और IFS में किसकी सैलरी ज्यादा? पोस्ट, प्रमोशन और विदेश भत्ते का पूरा हिसाब
IAS vs IFS Salary 2026: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने के बाद अभ्यर्थियों के सामने कई सेवाओं का विकल्प होता है। इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS और भारतीय विदेश सेवा यानी IFS सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली सेवाओं में शामिल हैं। ज्यादातर अभ्यर्थी IAS को पहली पसंद मानते हैं, लेकिन कई उम्मीदवार अच्छी रैंक आने के बावजूद IFS को चुनते हैं।हाल में सामने आई एक रिपोर्ट में भी IAS और IFS की कमाई की तुलना को लेकर चर्चा हुई है। इसमें बताया गया कि दोनों सेवाओं की शुरुआत समान मूल वेतन से होती है, लेकिन विदेश में तैनाती के दौरान IFS अधिकारी को मिलने वाला विदेशी भत्ता उसकी कुल आर्थिक प्राप्तियों को काफी अलग कर सकता है।लेकिन IAS और IFS की तुलना सिर्फ इस आधार पर करना कि किसे ज्यादा पैसा मिलता है, पूरी तस्वीर नहीं बताता। दोनों सेवाओं के पद, पदोन्नति, काम की प्रकृति, तैनाती और भत्तों की व्यवस्था अलग है। आधिकारिक नियमों को देखें तो दोनों सेवाओं के कई वेतन स्तर समान हैं, लेकिन पदनाम और करियर का रास्ता अलग-अलग है।
IAS और IFS की शुरुआत 56,100 रुपये से
IAS और IFS दोनों में सीधी भर्ती के बाद शुरुआती स्तर लेवल-10 है। इस स्तर पर मूल वेतन 56,100 रुपये से शुरू होता है।IAS के वेतन मैट्रिक्स में लेवल-10 की शुरुआत 56,100 रुपये से होकर लेवल-18 में 2,50,000 रुपये तक जाती है। लेवल-17 का मूल वेतन 2,25,000 रुपये है।IFS में भी जूनियर स्केल यानी लेवल-10 की शुरुआत 56,100 रुपये से होती है। इसके बाद वरिष्ठ स्तरों पर लेवल-11, 12, 13, 14, 15 और 17 आते हैं। IFS में सर्वोच्च ग्रेड लेवल-17 है, जिसका मूल वेतन 2,25,000 रुपये है।यहीं एक बड़ा अंतर समझना जरूरी है। IAS में कैबिनेट सचिव के लिए लेवल-18 और 2,50,000 रुपये का मूल वेतन है, जबकि IFS की निर्धारित ग्रेड संरचना लेवल-17 तक जाती है।
IAS का प्रमोशन और पद कैसे बढ़ते हैं?
IAS अधिकारी के करियर में पद राज्य और केंद्र की पोस्टिंग के हिसाब से बदल सकते हैं। इसलिए यह मानना सही नहीं है कि हर IAS अधिकारी बिल्कुल इसी क्रम और इसी साल में वही पद हासिल करेगा।
वेतन स्तर के हिसाब से IAS की प्रमुख संरचना इस प्रकार है:
| सेवा स्तर | प्रमुख पदों के उदाहरण | वेतन स्तर | शुरुआती मूल वेतन |
|---|---|---|---|
| शुरुआती सेवा | SDM, सहायक सचिव, अंडर सेक्रेटरी | लेवल-10 | ₹56,100 |
| वरिष्ठ समयमान | ADM, डिप्टी सेक्रेटरी | लेवल-11 | ₹67,700 |
| कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड | DM, डायरेक्टर, डिप्टी सेक्रेटरी | लेवल-12 | ₹78,800 |
| चयन ग्रेड | DM, डायरेक्टर | लेवल-13 | ₹1,18,500 |
| सुपर टाइम स्केल | मंडलायुक्त, संयुक्त सचिव | लेवल-14 | ₹1,44,200 |
| उच्च प्रशासनिक ग्रेड | प्रमुख सचिव, अपर सचिव | लेवल-15 | ₹1,82,200 |
| एपेक्स स्तर | मुख्य सचिव, भारत सरकार के सचिव | लेवल-17 | ₹2,25,000 |
| सर्वोच्च वेतन स्तर | कैबिनेट सचिव | लेवल-18 | ₹2,50,000 |
ये वेतन स्तर आधिकारिक वेतन मैट्रिक्स पर आधारित हैं। किसी अधिकारी का वास्तविक पद और पदोन्नति कैडर, रिक्ति, पात्रता और सेवा रिकॉर्ड पर निर्भर करती है।
IFS में प्रमोशन का रास्ता बिल्कुल अलग है
IFS अधिकारी की सेवा का करियर विदेश मंत्रालय और विदेश स्थित भारतीय मिशनों दोनों से जुड़ा होता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार अधिकारी विदेश में थर्ड सेक्रेटरी से शुरुआत कर सकता है और आगे सेकंड सेक्रेटरी, फर्स्ट सेक्रेटरी, काउंसलर, मंत्री और राजदूत/उच्चायुक्त/स्थायी प्रतिनिधि के स्तर तक पहुंच सकता है। मंत्रालय के मुख्यालय में अंडर सेक्रेटरी से लेकर सचिव तक के पद होते हैं।
IFS के आधिकारिक नियमों में वेतन और ग्रेड इस तरह दिए गए हैं:
| IFS ग्रेड | विदेश में प्रमुख पदों के उदाहरण | वेतन स्तर | शुरुआती मूल वेतन |
|---|---|---|---|
| जूनियर स्केल | थर्ड सेक्रेटरी | लेवल-10 | ₹56,100 |
| सीनियर स्केल | सेकंड/फर्स्ट सेक्रेटरी | लेवल-11 | ₹67,700 |
| जूनियर प्रशासनिक ग्रेड | फर्स्ट सेक्रेटरी | लेवल-12 | ₹78,800 |
| ग्रेड IV | काउंसलर | लेवल-13 | ₹1,23,100 |
| ग्रेड III | मंत्री, वरिष्ठ मिशन पद | लेवल-14 | ₹1,44,200 |
| ग्रेड II | मिशन प्रमुख/अपर सचिव स्तर | लेवल-15 | ₹1,82,200 |
| ग्रेड I | राजदूत, उच्चायुक्त, विदेश सचिव स्तर | लेवल-17 | ₹2,25,000 |
IFS के आधिकारिक नियमों में लेवल-13 की शुरुआती सैलरी 1,23,100 रुपये है। यह IAS के लेवल-13 की शुरुआती 1,18,500 रुपये की राशि से अलग है।
कितने साल बाद IFS में प्रमोशन मिलता है?
IFS के मामले में नियमों में कुछ महत्वपूर्ण न्यूनतम पात्रता अवधि निर्धारित हैं। सीधी भर्ती वाले अधिकारी चार साल की अर्हक सेवा पूरी करने के बाद सीनियर स्केल के लिए पात्र हो सकते हैं।नौ साल की अर्हक सेवा पूरी करने पर जूनियर प्रशासनिक ग्रेड के लिए पात्रता आती है। 13 साल की सेवा के बाद ग्रेड IV, 17 साल के बाद ग्रेड III, 25 साल के बाद ग्रेड II और 30 साल की अर्हक सेवा के बाद ग्रेड I के लिए पात्रता का प्रावधान है। इन पदोन्नतियों में संबंधित नियम, चयन प्रक्रिया, रिक्तियां, प्रदर्शन मूल्यांकन और अन्य शर्तें लागू होती हैं।इसलिए 4, 9, 13, 17, 25 और 30 साल को निश्चित प्रमोशन की गारंटी नहीं समझना चाहिए। ये नियमों में दी गई पात्रता अवधि हैं।
IFS में विदेश जाने के बाद असली अंतर कहां आता है?
यही वह हिस्सा है जिसके कारण IFS की कमाई को लेकर इतनी चर्चा होती है।IAS अधिकारी की पोस्टिंग मुख्य रूप से भारत में होती है। उसे पद के अनुसार सरकारी आवास, वाहन, कार्यालयी सहायता और दूसरे अनुमन्य लाभ मिल सकते हैं।IFS अधिकारी का एक बड़ा हिस्सा विदेश स्थित भारतीय दूतावासों, उच्चायोगों और वाणिज्य दूतावासों में तैनाती में गुजर सकता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार IFS अधिकारी भारत के राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक और बहुपक्षीय हितों से जुड़े काम करते हैं।विदेश में तैनाती के दौरान मूल भारतीय वेतन के अलावा लागू नियमों के अनुसार विदेशी भत्ता मिलता है। इसकी राशि हर देश के लिए समान नहीं होती।यही वजह है कि विदेश में तैनात IFS अधिकारी की कुल आर्थिक प्राप्ति को केवल 56,100 रुपये या किसी एक वेतन स्तर की मूल सैलरी से नहीं समझा जा सकता।
क्या IFS का विदेशी भत्ता टैक्स फ्री होता है?
इस मामले में सरकारी आयकर नियम महत्वपूर्ण हैं। आयकर विभाग के अनुसार भारत सरकार द्वारा विदेश में सेवा देने वाले भारतीय नागरिक सरकारी कर्मचारियों को दिए गए कुछ विदेशी भत्ते या सुविधाएं आयकर अधिनियम की धारा 10(7) के तहत पूरी तरह कर-मुक्त होती हैं।इसका अर्थ यह नहीं है कि IFS अधिकारी की पूरी आय हमेशा कर-मुक्त होती है। नियम विशेष रूप से विदेश में सेवा के लिए सरकार द्वारा दिए गए भत्तों और सुविधाओं पर लागू होते हैं।यही अंतर उस लोकप्रिय धारणा को जन्म देता है कि विदेश में तैनाती के दौरान IFS अधिकारी की बचत और कुल आर्थिक लाभ भारत में समान वेतन स्तर पर तैनात अधिकारी से काफी अलग हो सकते हैं।
अमेरिका, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया में पोस्टिंग पर कितना मिलता है?
यहां एक निश्चित रकम बताना सही नहीं होगा। विदेशी भत्ते की राशि पोस्टिंग स्टेशन, अधिकारी के ग्रेड और उस समय लागू विदेश सेवा नियमों के अनुसार बदलती है।इसलिए इंटरनेट पर चलने वाले 3 लाख, 4 लाख या उससे अधिक रुपये महीने के आंकड़ों को सभी IFS अधिकारियों की निश्चित सैलरी नहीं माना जा सकता।एक अधिकारी दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में तैनात है तो उसका वेतन ढांचा अलग होगा। वही अधिकारी अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया या किसी अन्य देश में मिशन पर जाता है तो विदेशी भत्ता और मिशन से संबंधित सुविधाएं उसकी कुल आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं।
IFS अधिकारी को विदेश में आवास और दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं
विदेश में तैनाती का लाभ केवल विदेशी भत्ते तक सीमित नहीं है। मिशन में पद और स्थान के अनुसार आवास, चिकित्सा, यात्रा और अन्य सुविधाओं के प्रावधान होते हैं।सरकारी आयकर नियम भी विदेश में सेवा देने वाले सरकारी कर्मचारियों को सरकार की ओर से दिए गए कुछ विदेशी भत्तों और सुविधाओं के लिए विशेष कर व्यवस्था का उल्लेख करते हैं।इसी वजह से IFS की आर्थिक तुलना करते समय केवल हाथ में आने वाली भारतीय सैलरी देखना पर्याप्त नहीं है।
15 साल की सेवा के बाद IAS बनाम IFS
करीब 15 साल की सेवा के आसपास IAS अधिकारी राज्य में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों और केंद्र में निदेशक स्तर की जिम्मेदारियों में हो सकता है। वहीं IFS अधिकारी विदेश में काउंसलर या मुख्यालय में निदेशक स्तर की जिम्मेदारी संभाल सकता है।IFS के नियमों में 13 साल की अर्हक सेवा के बाद ग्रेड IV यानी लेवल-13 के लिए पात्रता और 17 साल के बाद ग्रेड III यानी लेवल-14 के लिए पात्रता दी गई है।IAS के वेतन नियमों में भी लेवल-13 की शुरुआत 1,18,500 रुपये और लेवल-14 की शुरुआत 1,44,200 रुपये है।यानी इस चरण तक दोनों सेवाएं उच्च वेतन स्तरों पर पहुंचती हैं, लेकिन IFS अधिकारी विदेश में है या भारत में, इससे उसकी कुल आर्थिक सुविधाओं में बड़ा अंतर आ सकता है।
25 से 30 साल बाद दोनों सेवाओं की तस्वीर
IFS में 25 साल की अर्हक सेवा के बाद ग्रेड II यानी लेवल-15 के लिए पात्रता और 30 साल की अर्हक सेवा के बाद ग्रेड I यानी लेवल-17 के लिए पात्रता का प्रावधान है। लेवल-15 का शुरुआती मूल वेतन 1,82,200 रुपये और लेवल-17 का मूल वेतन 2,25,000 रुपये है।इस स्तर पर IFS अधिकारी विदेश में राजदूत, उच्चायुक्त या किसी महत्वपूर्ण मिशन के प्रमुख के रूप में काम कर सकता है। विदेश मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार राजदूत, उच्चायुक्त और स्थायी प्रतिनिधि IFS के वरिष्ठ करियर पदों में शामिल हैं।IAS में इसी तरह वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख सचिव, अपर मुख्य सचिव, भारत सरकार के सचिव और कुछ मामलों में कैबिनेट सचिव जैसे शीर्ष पदों तक पहुंच सकते हैं। लेवल-17 पर मूल वेतन 2,25,000 रुपये और कैबिनेट सचिव के लिए लेवल-18 पर 2,50,000 रुपये निर्धारित है।
IAS और IFS में सैलरी का सबसे बड़ा अंतर क्या है?
अगर केवल मूल वेतन देखें तो दोनों सेवाओं में शुरुआती स्तर पर अंतर नहीं है। दोनों की शुरुआत 56,100 रुपये से होती है।मध्य स्तरों पर भी दोनों सेवाओं में कई समान वेतन स्तर हैं। लेकिन IFS के लेवल-13 की शुरुआती राशि 1,23,100 रुपये है, जबकि IAS के लेवल-13 की शुरुआत 1,18,500 रुपये से होती है।सबसे बड़ा अंतर विदेश में तैनाती के दौरान आता है। IFS अधिकारी को लागू नियमों के अनुसार विदेशी भत्ता मिलता है और कुछ विदेशी सुविधाएं भी मिलती हैं। दूसरी ओर IAS अधिकारी को भारत में पद के अनुसार सरकारी आवास, वाहन और दूसरी सुविधाएं मिल सकती हैं।
तो IAS या IFS में कौन ज्यादा कमाता है?
इसका जवाब एक ही आंकड़े से नहीं दिया जा सकता।मूल वेतन के मामले में दोनों सेवाएं सरकारी वेतन मैट्रिक्स से जुड़ी हैं। IFS अधिकारी की विदेश पोस्टिंग होने पर विदेशी भत्ता और संबंधित सुविधाएं कुल आर्थिक प्राप्ति को बढ़ा सकती हैं। लेकिन यह राशि पोस्टिंग वाले देश और अधिकारी के ग्रेड पर निर्भर करती है।IAS अधिकारी को भी अपने पद और तैनाती के अनुसार कई गैर-नकद सरकारी सुविधाएं मिलती हैं। इसलिए केवल बैंक खाते में आने वाली रकम के आधार पर दोनों सेवाओं की पूरी आर्थिक तुलना करना सही नहीं होगा।
नौकरी की प्रकृति में है सबसे बड़ा अंतर
IAS अधिकारी का मुख्य काम देश के भीतर प्रशासन चलाना, सरकारी नीतियों और योजनाओं को लागू करना, जिला प्रशासन संभालना तथा राज्य और केंद्र सरकार में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाना है।IFS अधिकारी भारत के विदेश संबंधों से जुड़े काम करता है। विदेश स्थित मिशनों में भारत का प्रतिनिधित्व करने से लेकर राजनीतिक और आर्थिक संबंधों, व्यापार, संस्कृति तथा बहुपक्षीय मामलों पर काम करना उसकी जिम्मेदारियों का हिस्सा है।यानी UPSC में सेवा चुनते समय केवल सैलरी देखना पर्याप्त नहीं है। IAS का करियर मुख्य रूप से घरेलू प्रशासन पर केंद्रित है, जबकि IFS का करियर कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़ा है।
IAS और IFS दोनों में प्रवेश स्तर की मूल सैलरी 56,100 रुपये से शुरू होती है। IAS की वेतन संरचना लेवल-18 तक जाती है, जहां कैबिनेट सचिव के लिए 2,50,000 रुपये का मूल वेतन है। IFS की ग्रेड संरचना लेवल-17 तक जाती है, जहां मूल वेतन 2,25,000 रुपये है।IFS में खास अंतर विदेश पोस्टिंग के दौरान आता है। विदेशी भत्ता और लागू सुविधाएं अधिकारी की कुल आर्थिक प्राप्तियों को भारत में समान वेतन स्तर पर काम कर रहे अधिकारी से अलग बना सकती हैं। कुछ सरकारी विदेशी भत्ते आयकर नियमों के तहत कर-मुक्त भी होते हैं।इसलिए 3 से 4 लाख रुपये को IFS की तय मासिक सैलरी बताना सही नहीं है। वास्तविक आर्थिक लाभ पोस्टिंग, ग्रेड, विदेशी भत्ते और उपलब्ध सुविधाओं पर निर्भर करता है।
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