अब एक साथ मिल सकेगी दो तरह की स्कॉलरशिप, पोर्टल के नए नियम क्या; सरकारी छात्रवृत्ति के नियमों में क्या-क्या बदला
देशभर के करोड़ों छात्रों के लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (एनएसपी) से एक राहत भरी और बेहद अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्कॉलरशिप के नियमों में कायाकल्प करते हुए एक नया ढांचा तैयार किया है। अगर आप भी पढ़ाई के लिए सरकारी मदद की आस में रहते हैं, तो अब आपको एक स्कॉलरशिप चुनने के चक्कर में दूसरी से हाथ नहीं धोना पड़ेगा। सरकार ने सालों से चले आ रहे 'वन स्टूडेंट-वन स्कॉलरशिप' के ढर्रे को खत्म करते हुए 'वन स्टूडेंट-मल्टीपल स्कॉलरशिप' का रास्ता साफ कर दिया है।इस नए फैसले का सीधा मतलब यह है कि अगर कोई छात्र अपनी काबिलियत और सामाजिक वर्ग की शर्तों पर खरा उतरता है, तो उसे मेरिट और वेलफेयर दोनों तरह की छात्रवृत्तियों का फायदा एक साथ मिल सकेगा। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने भी अपने तमाम संबद्ध स्कूलों को इस नए फ्रेमवर्क की जानकारी छात्रों और अभिभावकों तक तुरंत पहुंचाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
क्या है नया वन स्टूडेंट-मल्टीपल स्कॉलरशिप मॉडल?
पुराने नियमों के तहत अगर किसी छात्र को कोई एक सरकारी स्कॉलरशिप मिल जाती थी, तो पोर्टल पर उसका दूसरा आवेदन रद्द या अमान्य मान लिया जाता था। लेकिन 2026-27 के नए ढांचे में स्कॉलरशिप को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा गया है- मेरिट यानी योग्यता आधारित और वेलफेयर आधारित।नए नियम के मुताबिक, किसी वेलफेयर स्कॉलरशिप का लाभ लेने की वजह से छात्र को मेरिट स्कॉलरशिप से वंचित नहीं किया जाएगा। ठीक यही बात उल्टे क्रम में भी लागू होगी। यानी, एक छात्र को उसकी पढ़ाई के प्रदर्शन पर मिलने वाली एक मेरिट स्कॉलरशिप के साथ-साथ उसकी श्रेणी या आर्थिक स्थिति के आधार पर मिलने वाली वेलफेयर स्कॉलरशिप्स का फायदा भी मिल सकता है।
मेरिट और वेलफेयर स्कॉलरशिप में क्या अंतर है?
मेरिट-बेस्ड स्कॉलरशिप: ये वो योजनाएं हैं जहां चयन का मुख्य आधार छात्र का शैक्षणिक प्रदर्शन, परीक्षा में रैंक या अंक होते हैं। इसके प्रमुख उदाहरण हैं नेशनल मींस-कम-मेरिट स्कॉलरशिप, इंस्पायर योजना और कॉलेज व यूनिवर्सिटी छात्रों के लिए सेंट्रल सेक्टर स्कीम।
वेलफेयर-बेस्ड स्कॉलरशिप: ये योजनाएं एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक मदद देने के इरादे से बनाई गई हैं। इनमें प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक जैसी योजनाएं शामिल हैं, जहां पारिवारिक आय और सामाजिक श्रेणी मुख्य पैमाना होती हैं।
आखिर क्यों बदलना पड़ा बरसों पुराना नियम?
दरअसल, सत्र 2024-25 के दौरान जब नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर डुप्लीकेट आवेदनों को छांटने का काम चल रहा था, तब कई विभागों के बीच तालमेल की कमी दिखी। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की समीक्षा में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां असली और जरूरतमंद छात्रों के फॉर्म भी डुप्लीकेट मानकर ब्लॉक कर दिए गए थे। इसी उलझन को हमेशा के लिए दूर करने के लिए सरकार ने स्कॉलरशिप की दो अलग श्रेणियां बनाईं और पोर्टल के पूरे सिस्टम को रिडिजाइन किया।
आवेदन प्रक्रिया और वेरिफिकेशन में आए ये बड़े बदलाव
पोर्टल के नए टेक्निकल वर्कफ्लो से छात्रों का समय और मेहनत दोनों बचेगी -
बार-बार फॉर्म भरने का झंझट खत्म: जब छात्र पहली बार आवेदन भरेगा, तो उसकी बुनियादी जानकारी पोर्टल में सेव हो जाएगी। दूसरी स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करते समय छात्र को केवल उस योजना से जुड़ी खास जानकारी और दस्तावेज ही जमा करने होंगे।
डिफेक्टिव फॉर्म सुधारने का नियम: अगर कोई फॉर्म डिफेक्टिव मार्क होता है, तो छात्र योजना से जुड़ी जानकारी एडिट कर सकेगा। हालांकि, अगर नाम, पता, कॉलेज या कोर्स जैसी बुनियादी जानकारी बदलनी है, तो पहले से जमा आवेदनों को वापस लेना होगा।
L1 और L2 वेरिफिकेशन का पारदर्शी तरीका: अब कॉलेज के इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर (INO) और जिला या राज्य स्तर के L2 अधिकारियों को छात्र के सभी आवेदनों का स्टेटस एक साथ दिखेगा। इसके अलावा पहले आवेदन में भरी गई ट्यूशन फीस जैसी जानकारी खुद-ब-खुद अगले फॉर्म में दर्ज हो जाएगी।
काम आएगा यह रेड फ्लैग नियम
नया सिस्टम सहूलियत तो देता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। नए वर्कफ्लो में रेड फ्लैग की व्यवस्था की गई है। अगर किसी छात्र की बुनियादी या एकेडमिक जानकारी में कोई गड़बड़ी या विरोधाभास पाया जाता है, तो उसके बाकी सभी स्कॉलरशिप आवेदनों पर एक साथ रेड फ्लैग' लग जाएगा। इसलिए सभी फॉर्म्स में अपनी जानकारी बिल्कुल एक समान और सटीक रखें।
क्या हर छात्र को अपने आप मिलेंगी कई स्कॉलरशिप?
छात्रों को यह बात बहुत ध्यान से समझनी होगी कि 'मल्टीपल स्कॉलरशिप' का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर छात्र को अपने आप 2 या 3 स्कॉलरशिप मिलने लगेंगी। सरकार ने बंद रास्ते खोले हैं, लेकिन हर योजना की अपनी पात्रता, आय सीमा और शैक्षणिक शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी। छात्र को प्रत्येक योजना की शर्त को अलग-अलग पूरा करना ही होगा, तभी वह इसका लाभ उठा सकेगा।
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