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शनिवार, 26 सितंबर 2026

Election Commission SIR: कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर आयोग की सफाई, मतदाताओं को बड़ी राहत; घर पर होगी दस्तावेजों की जांच

 


Election Commission SIR: कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर आयोग की सफाई, मतदाताओं को बड़ी राहत; घर पर होगी दस्तावेजों की जांच

नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच चुनाव आयोग ने शनिवार 26 सितंबर 2026 को कई महत्वपूर्ण फैसलों और विवादित मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई पूर्ण बैठक में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद रहे। आयोग ने कहा कि एसआईआर से जुड़े प्रमुख फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं। साथ ही आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र, ईसीआईनेट, गोवा के 97 मतदाताओं और नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति साफ की।

कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किस मामले में था?

चुनाव आयोग के अनुसार कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी चुनाव नीति या आयोग के आईटी विभाग से संबंधित नीतिगत फैसले के बारे में नहीं था। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह पत्र चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था।आयोग के मुताबिक संबंधित अधिकारी की ओर से काम के पुनर्वितरण को लेकर जो आदेश जारी किए गए थे, उन्हें दो चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किया गया। आयोग ने यह भी कहा कि डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की आईटी डिविजन पर निगरानी कभी वापस नहीं ली गई थी। यानी आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार आईटी डिविजन से निगरानी हटाए जाने की बात सही नहीं है।यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में आयोग के भीतर एसआईआर और तकनीकी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर मतभेदों की खबरें सामने आई थीं। आयोग ने अपनी बैठक में यह भी कहा कि संस्थागत स्तर पर अलग-अलग राय और टिप्पणियां विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन एसआईआर से जुड़े आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किए गए।

एसआईआर नोटिस पाने वालों को अब कार्यालय नहीं जाना होगा

चुनाव आयोग ने एसआईआर के दौरान नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान करने का फैसला किया है। जिन मतदाताओं को उनका रिकॉर्ड पुराने रिकॉर्ड से मैप नहीं होने या तार्किक विसंगति यानी लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के कारण नोटिस मिला है, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में अब निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी।इसके बजाय बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ संबंधित मतदाता के घर जाएंगे। वहां जरूरी दस्तावेज एकत्र किए जाएंगे और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी दस्तावेजों के आधार पर मामले पर निर्णय लेंगे।इस बदलाव से खासतौर पर उन मतदाताओं को सुविधा मिलेगी जिनके लिए निर्वाचन कार्यालय तक पहुंचना मुश्किल है। आयोग ने कहा कि सुनवाई केवल विशेष परिस्थितियों में ही कराई जाएगी और ऐसी स्थिति में भी इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा।

जरूरत पड़ने पर परिवार का वयस्क सदस्य दे सकेगा पक्ष

यदि किसी मामले में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी सुनवाई जरूरी मानते हैं तो मतदाता अपनी ओर से परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अधिकृत कर सकता है। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था को मजबूत करने का भी निर्णय लिया है।जिला निर्वाचन अधिकारियों को जरूरत के अनुसार हेल्प डेस्क बनाने और विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों, बेघर लोगों और अन्य जरूरतमंद मतदाताओं को एसआईआर प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराना है।

ईसीआईनेट की होगी दोबारा समीक्षा

चुनाव आयोग ने ईसीआईनेट की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए भी समिति गठित करने का फैसला किया है। यह समिति वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में काम करेगी और इसमें आईआईटी या आईआईआईटी के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।समिति यह जांच करेगी कि ईसीआईनेट की व्यवस्था संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रही है या नहीं। आयोग के अनुसार राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर पिछले कुछ महीनों में पोर्टल में कई बदलाव किए जा चुके हैं। जरूरत पड़ने पर आगे भी बदलाव किए जाएंगे।आयोग ने यह भी तय किया है कि भविष्य में आईटी मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहल पहले अधिकारियों की समिति के सामने चर्चा के लिए रखी जाएगी। इसके बाद उसे आयोग की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

एसआईआर के लिए फॉर्म-6 की घोषणा पर भी स्थिति साफ

फॉर्म-6 के साथ एसआईआर के दौरान लगाई गई घोषणा को लेकर भी आयोग ने स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि इस घोषणा को सुप्रीम कोर्ट बरकरार रख चुका है। वहीं एसआईआर अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन नियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रपत्रों का इस्तेमाल किया जाएगा।आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर अब तक 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है। इनमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। जिन लोगों का नाम एसआईआर के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची में छूट गया है, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित ईआरओ के पास नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकते हैं।

गोवा के 97 मतदाताओं का मामला

गोवा में एसआईआर के दौरान छूटे 97 मतदाताओं का मामला भी आयोग की बैठक में सामने आया। चुनाव आयोग के अनुसार गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बीएलओ को इन मतदाताओं के घर जाकर फॉर्म लेने का निर्देश दिया है।आयोग ने बताया कि 97 में से 81 मतदाताओं ने पहले ही फॉर्म-6 भर दिया है, ताकि उनके नाम मतदाता सूची में शामिल किए जा सकें। यानी 97 में से 81 मामलों में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया के लिए आवेदन हो चुका है।इससे पहले गोवा के इन 97 मतदाताओं को लेकर रिपोर्टें सामने आई थीं कि वे अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने 25 सितंबर को कहा था कि कई मामलों में नाम बाद में जोड़े जा चुके हैं और बाकी मामलों पर प्रक्रिया चल रही है।



दिल्ली में 30 अक्टूबर तक दावे-आपत्तियां

दिल्ली के मतदाताओं के लिए भी आयोग ने समयसीमा बढ़ाई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिल्ली के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं नोटिस, दावे और आपत्तियों के निस्तारण की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।

महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक मौका

महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। इनके निस्तारण के लिए 10 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है। इस तरह दोनों राज्यों में मतदाताओं को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए पहले से अधिक समय मिलेगा।

आयोग की बैठकों को लेकर भी नया फैसला

चुनाव आयोग ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़े कुछ फैसले भी लिए हैं। अब आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले ही प्रसारित किया जाएगा और बैठकों की कार्यवाही के मिनट्स जारी किए जाएंगे। अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट यानी एपीएआर प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक पूरी करने की बात कही गई है।इसके अलावा अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी अनिवार्य होगी। आयोग ने यह भी कहा कि आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

एसआईआर को लेकर आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने दोहराया कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू करने का आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था। आयोग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने भी 27 मई 2026 को इस आदेश को बरकरार रखा। अलग-अलग राज्यों के लिए बाद में जारी किए गए एसआईआर कार्यक्रमों को भी आयोग ने सर्वसम्मति से मंजूर किए जाने की बात कही है।इस तरह 26 सितंबर की बैठक में चुनाव आयोग ने एक तरफ एसआईआर से जुड़े प्रशासनिक और तकनीकी मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया, वहीं दूसरी तरफ नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को घर तक पहुंचाने का फैसला किया है। दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाने तथा गोवा के 97 मामलों में फॉर्म-6 की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से भी मतदाताओं को अतिरिक्त अवसर मिला है।

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