UP Samagra Shiksha: संविदा कर्मचारियों के मानदेय में 25% बढ़ोतरी, 11,902.85 करोड़ रुपये का बजट मंजूर; स्कूलों में भी होंगे कई बड़े बदलाव
उत्तर प्रदेश में समग्र शिक्षा के तहत काम करने वाले संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना कार्यालय और जिला परियोजना कार्यालयों में सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन कर्मचारियों के मानदेय में वर्ष 2020 के बाद से कोई वृद्धि नहीं हुई थी। ऐसे में करीब छह साल बाद मानदेय बढ़ाने का फैसला कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026-27 के लिए समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना और बजट को भी मंजूरी मिल गई है। केंद्र के परियोजना अनुमोदन बोर्ड ने प्रदेश के लिए 11,902.85 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस पूरी राशि का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
छह साल बाद संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत
समग्र शिक्षा के तहत राज्य परियोजना कार्यालय तथा प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा के जिला परियोजना कार्यालयों में सेवा प्रदाता के माध्यम से कर्मचारी काम करते हैं। इन कर्मचारियों के मानदेय में 2020 के बाद कोई वृद्धि नहीं हुई थी। अब कार्यकारी समिति की बैठक में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।इस फैसले का सीधा असर उन कर्मचारियों के मासिक मानदेय पर पड़ेगा जो समग्र शिक्षा से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों को जिला और राज्य स्तर पर लागू करने में भूमिका निभाते हैं। हालांकि अभी अलग-अलग पदों पर बढ़ोतरी के बाद मिलने वाली अंतिम राशि स्पष्ट नहीं की गई है। पदवार नई मानदेय राशि और लागू होने की तारीख विभागीय आदेश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।इसलिए कर्मचारियों के लिए अभी सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम विभागीय आदेश होगा। मंजूरी मिलना पहला चरण है, जबकि संशोधित मानदेय के आधार पर वास्तविक भुगतान कब से शुरू होगा, यह आदेश में स्पष्ट किया जाएगा।
2026-27 के लिए 11,902.85 करोड़ रुपये मंजूर
समग्र शिक्षा के तहत उत्तर प्रदेश को वर्ष 2026-27 के लिए 11,902.85 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। इस राशि का इस्तेमाल सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने, डिजिटल संसाधनों, प्रयोगशालाओं, शिक्षक संबंधी गतिविधियों और अन्य शैक्षणिक योजनाओं पर किया जाना है।मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्वीकृत वार्षिक कार्ययोजना और बजट का पूरा उपयोग किया जाए। सरकार का जोर केवल बजट मंजूर कराने पर नहीं बल्कि उसे निर्धारित योजनाओं पर समय से खर्च करने पर है।इसका कारण पिछले वर्षों में बजट खर्च का अलग-अलग स्तर रहना भी है। वर्ष 2025-26 में समग्र शिक्षा के तहत 9,425.21 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो उपलब्ध कुल राशि का 92.46 प्रतिशत था। इससे एक वर्ष पहले 2024-25 में यह खर्च केवल 69.60 प्रतिशत रहा था। यानी एक साल में बजट उपयोग में 22.86 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ।
इस बार पूरा बजट खर्च करने की तैयारी
वर्ष 2025-26 में 92.46 प्रतिशत बजट खर्च होने के बाद अब विभाग के सामने इसे 100 प्रतिशत तक पहुंचाने की चुनौती है। 11,902.85 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि पिछले साल इस्तेमाल की गई 9,425.21 करोड़ रुपये की राशि से लगभग 2,477.64 करोड़ रुपये अधिक है।इसका मतलब है कि इस वित्तीय वर्ष में विभाग को पिछले साल की तुलना में काफी बड़ी राशि का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए अधिकारियों को योजनाओं की नियमित समीक्षा और समयबद्ध क्रियान्वयन पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।अगर पूरी राशि का निर्धारित योजनाओं पर इस्तेमाल होता है तो इसका असर स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं, डिजिटल शिक्षा, प्रयोगशालाओं, विद्यार्थियों की गतिविधियों और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों पर पड़ सकता है।
स्मार्ट कक्षाओं और आईसीटी प्रयोगशालाओं का होगा निरीक्षण
सरकारी विद्यालयों में स्थापित स्मार्ट कक्षाओं और आईसीटी प्रयोगशालाओं को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि इनका नियमित निरीक्षण किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल हो।सरकार का जोर अब केवल उपकरण उपलब्ध कराने पर नहीं बल्कि उनके वास्तविक शैक्षणिक इस्तेमाल पर है। स्कूलों में कंप्यूटर, डिजिटल सामग्री और अन्य उपकरण मौजूद होने के बावजूद यदि उनका इस्तेमाल नियमित रूप से नहीं होता है तो योजना का पूरा लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाता।इसलिए आने वाले समय में स्मार्ट कक्षाओं और आईसीटी प्रयोगशालाओं के इस्तेमाल की निगरानी बढ़ाई जा सकती है।
विज्ञान प्रयोगशालाओं में पर्याप्त उपकरण रखना होगा
बैठक में सरकारी विद्यालयों की भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान की प्रयोगशालाओं को लेकर भी निर्देश दिए गए। विद्यालयों में आवश्यक उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने और विद्यार्थियों से उनका प्रभावी उपयोग कराने पर जोर दिया गया है।इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबों के माध्यम से विज्ञान पढ़ाने के बजाय प्रयोग आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। अगर प्रयोगशालाओं में पर्याप्त उपकरण उपलब्ध रहते हैं और उनका नियमित इस्तेमाल होता है तो विद्यार्थियों को विषय को व्यावहारिक तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।खासकर माध्यमिक स्तर पर विज्ञान विषयों की पढ़ाई में प्रयोगशाला की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए बजट के साथ विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल पर भी सरकार का ध्यान है।
निपुण भारत मिशन का कक्षा 5 तक विस्तार
समग्र शिक्षा की बैठक में निपुण भारत मिशन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अभी बाल वाटिका से कक्षा 2 तक विद्यार्थियों में आधारभूत भाषायी और गणितीय दक्षताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।अब परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 3 से 5 तक भी इसका विस्तार किया जा रहा है। इन कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन में लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।इसका उद्देश्य यह है कि बच्चों की बुनियादी पढ़ने, लिखने, समझने और गणितीय क्षमता शुरुआती कक्षाओं के बाद भी मजबूत बनी रहे। इससे प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पढ़ाई के साथ खेलकूद पर भी जोर
बैठक में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया कि विद्यालयों में पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जाए।इसका मतलब है कि सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धि के साथ उनकी अन्य प्रतिभाओं को विकसित करने पर भी जोर रहेगा। खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियां और अन्य कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यूनिफॉर्म की राशि का सही इस्तेमाल कराने के निर्देश
परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से यूनिफॉर्म के लिए भेजी गई राशि का इस्तेमाल निर्धारित यूनिफॉर्म खरीदने में ही किया जाए।साथ ही विद्यालयों में विद्यार्थियों को निर्धारित यूनिफॉर्म में भेजना सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है।इससे सरकार का उद्देश्य यह है कि यूनिफॉर्म के लिए उपलब्ध कराई जा रही आर्थिक सहायता वास्तव में उसी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल हो और विद्यालयों में निर्धारित पोशाक व्यवस्था लागू रहे।
ड्रीम लैब के जरिए तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा
बैठक में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के लिए ड्रीम लैब की स्थापना को लेकर भी जानकारी दी गई। इसके लिए टाटा टेक्नोलॉजी, जापानी कंपनी यास्कावा और अन्य औद्योगिक समूहों के साथ समझौता ज्ञापन किए जाने की जानकारी सामने आई है।ड्रीम लैब का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक कौशल से परिचित कराना है। इससे पारंपरिक पढ़ाई के साथ तकनीकी और रोजगार से जुड़े कौशल को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।यह पहल खास तौर पर माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि स्कूली शिक्षा के दौरान ही तकनीकी क्षेत्र की बुनियादी समझ विकसित होने से आगे की पढ़ाई और रोजगार में मदद मिल सकती है।
सरकारी माध्यमिक विद्यालयों का होगा सुरक्षा ऑडिट
सरकारी माध्यमिक विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। स्कूल सुरक्षा ऑडिट के लिए कार्यदायी संस्था का चयन किया जा चुका है।सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से विद्यालय भवन, बिजली व्यवस्था, प्रयोगशालाओं और परिसर से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान की जा सकती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर यह कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी सरकार और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है।
मानदेय बढ़ोतरी का वास्तविक फायदा कब मिलेगा?
25 प्रतिशत मानदेय बढ़ोतरी की मंजूरी के बाद कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि बढ़ा हुआ पैसा कब से मिलना शुरू होगा। अभी उपलब्ध जानकारी में बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने की बात स्पष्ट है, लेकिन पदवार संशोधित मानदेय और भुगतान की प्रभावी तारीख अलग विभागीय आदेश में सामने आएगी।इसलिए कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी राशि को अंतिम मानने के बजाय विभागीय आदेश का इंतजार करना चाहिए। मंजूरी के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने पर संशोधित भुगतान शुरू किया जाएगा।
सरकार के सामने अब दो बड़ी चुनौतियां
समग्र शिक्षा के मामले में सरकार के सामने अब दो प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली चुनौती 11,902.85 करोड़ रुपये के बजट का शत-प्रतिशत और समयबद्ध इस्तेमाल करना है। दूसरी चुनौती 25 प्रतिशत बढ़े हुए मानदेय को पात्र कर्मचारियों तक समय पर पहुंचाना है।पिछले वर्ष 92.46 प्रतिशत बजट खर्च हुआ था। इस बार 100 प्रतिशत इस्तेमाल का लक्ष्य रखा गया है। इसलिए वित्तीय वर्ष खत्म होने तक यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वीकृत राशि में से कितनी राशि वास्तव में योजनाओं पर खर्च हुई।उत्तर प्रदेश में समग्र शिक्षा के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए 25 प्रतिशत मानदेय बढ़ोतरी की मंजूरी एक महत्वपूर्ण फैसला है। वर्ष 2020 के बाद मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई थी, ऐसे में छह साल बाद हुआ यह संशोधन कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आ सकता है।इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के लिए 11,902.85 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में 9,425.21 करोड़ रुपये यानी उपलब्ध राशि का 92.46 प्रतिशत खर्च हुआ था, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 69.60 प्रतिशत था। अब सरकार ने इस बार शत-प्रतिशत बजट उपयोग का लक्ष्य रखा है।स्मार्ट कक्षाओं, आईसीटी प्रयोगशालाओं, विज्ञान प्रयोगशालाओं, निपुण भारत मिशन, खेलकूद, ड्रीम लैब और विद्यालय सुरक्षा से जुड़े फैसलों के कारण इस बजट का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि योजनाओं को समय पर लागू किया जाता है तो इसका सीधा लाभ सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों तक पहुंच सकता है।
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