UP Voter List 2026: मेरठ में BLO ट्रांसफर पर सपा का सवाल, 5000 कथित फर्जी शिक्षक वोटरों की जांच की मांग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी ने मेरठ और अमेठी की मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। पार्टी ने मेरठ विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ के स्थानांतरण पर सवाल उठाया है। इसके साथ ही मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में 5,000 से अधिक कथित फर्जी और अयोग्य शिक्षक मतदाताओं के नामों की जांच कराने की मांग की गई है। अमेठी के तिलोई विधानसभा क्षेत्र में भी 2,000 से अधिक कथित डुप्लीकेट मतदाताओं के नामों की जांच और सत्यापन की मांग की गई है।
मेरठ में बीएलओ के तबादले पर उठाए सवाल
सपा की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि मेरठ के 48-मेरठ विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर की प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 से 10 अप्रैल 2026 तक चली। पार्टी का दावा है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में बीएलओ का स्थानांतरण कर दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में सपा की ओर से 38 से अधिक बीएलओ के स्थानांतरण का दावा किया गया है।पार्टी ने इन तबादलों को लेकर निर्वाचन आयोग से जांच की मांग की है। सपा का आरोप है कि कुछ बीएलओ से उनके आवेदन से संबंधित मोबाइल ऐप और ओटीपी की जानकारी मांगी गई थी और ऐसा उपलब्ध नहीं कराने वाले कुछ अधिकारियों के स्थानांतरण किए गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तबादलों के पीछे वास्तविक प्रशासनिक कारण क्या थे।
5000 से अधिक कथित फर्जी शिक्षक मतदाताओं का दावा
समाजवादी पार्टी ने मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि सूची में 5,000 से अधिक ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल हैं जो शिक्षक मतदाता के रूप में निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते।सपा ने आरोप लगाया है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम भी शिक्षक मतदाता के रूप में दर्ज हैं जो शिक्षण संस्थानों में कार्यरत नहीं हैं। पार्टी के अनुसार कुछ लोगों के बारे में ऐसी जानकारी सामने आई है कि वे निजी कारोबार या दुकानों से जुड़े हैं। पार्टी ने इन सभी नामों के दस्तावेजों और पात्रता का सत्यापन कराने की मांग की है।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 5,000 से अधिक कथित फर्जी या अयोग्य मतदाताओं का आंकड़ा सपा के ज्ञापन में किए गए दावे से जुड़ा है। इसे निर्वाचन आयोग द्वारा सत्यापित संख्या नहीं माना जा सकता। किसी व्यक्ति का नाम वास्तव में अपात्र, फर्जी या डुप्लीकेट है या नहीं, यह संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जांच के बाद ही तय होगा।
तिलोई में 2000 से अधिक डुप्लीकेट मतदाताओं का आरोप
सपा ने अमेठी जिले की 178-तिलोई विधानसभा सीट की मतदाता सूची पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के मुताबिक यहां 2,000 से अधिक कथित डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। पार्टी ने निर्वाचन अधिकारियों से इन नामों का सत्यापन कराने और जांच में डुप्लीकेट पाए जाने वाले नामों को नियमानुसार हटाने की मांग की है।ज्ञापन में पार्टी ने कुछ ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया है जिनमें कथित तौर पर एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग मतदेय स्थलों और अलग-अलग क्रम संख्या पर दर्ज होने का दावा किया गया है। कुछ मामलों में अलग-अलग ईपीआईसी नंबर होने की बात भी कही गई है।सपा की ओर से दिए गए उदाहरणों में मतदेय स्थल संख्या 302 पर एक मतदाता का नाम कथित रूप से चार स्थानों पर दर्ज होने का दावा किया गया है। इसी तरह मतदेय स्थल संख्या 264 और अन्य स्थानों पर भी एक अन्य मतदाता का नाम कथित रूप से चार बार दर्ज होने की बात कही गई है। इन दावों का सत्यापन निर्वाचन अधिकारियों द्वारा किया जाना बाकी है।
चुनाव आयोग से जांच और नाम हटाने की मांग
समाजवादी पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मेरठ, अमेठी और अन्य संबंधित क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि जांच में किसी मतदाता का नाम डुप्लीकेट या पात्रता के विपरीत पाया जाता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से हटाया जाना चाहिए।पार्टी ने बीएलओ के स्थानांतरण की शिकायत पर भी कार्रवाई की मांग की है। उसका कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने की प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले बीएलओ की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए एसआईआर पूरी होने के तुरंत बाद हुए तबादलों को लेकर उठे सवालों की भी जांच होनी चाहिए।
एसआईआर के बाद मतदाता सूची पर नजर
विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद गलत, दोहरे या अपात्र नामों की पहचान करना है। मेरठ जिला निर्वाचन कार्यालय की वेबसाइट पर एसआईआर-2026 से संबंधित मतदाता सूची, बीएलओ और बीएलए बैठक से जुड़े रिकॉर्ड तथा अन्य चुनावी सामग्री उपलब्ध है। इससे यह स्पष्ट है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया के लिए आधिकारिक अभिलेख भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।ऐसे में सपा की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए संबंधित नामों, ईपीआईसी नंबर, मतदेय स्थल और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है। किसी नाम को फर्जी या डुप्लीकेट घोषित करने से पहले निर्वाचन नियमों के तहत सत्यापन आवश्यक होगा।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है मामला
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े विवाद राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। चुनाव में मतदान करने के लिए सही और अद्यतन मतदाता सूची जरूरी होती है। किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूटना और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल होना दोनों ही चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर प्रशासनिक विषय हैं।हालांकि मेरठ, तिलोई और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर सामने आए मौजूदा आंकड़े अभी राजनीतिक दल द्वारा लगाए गए दावों पर आधारित हैं। इसलिए इन आंकड़ों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। निर्वाचन अधिकारियों की जांच के बाद ही यह पता चलेगा कि बताए गए 5,000 से अधिक और 2,000 से अधिक नामों में वास्तव में कितने नाम नियमों के विपरीत हैं।
मेरठ और तिलोई के मतदाताओं के लिए आगे क्या होगा
अब पूरे मामले में निर्वाचन अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी मतदाता का नाम डुप्लीकेट पाया जाता है तो संबंधित प्रक्रिया के तहत उसे हटाया जा सकता है। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए निर्धारित पात्रता की जांच दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी।मेरठ में बीएलओ के स्थानांतरण को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि तबादले किस प्रशासनिक आधार पर किए गए और क्या सभी स्थानांतरण निर्धारित नियमों के अनुसार हुए हैं। सपा ने ज्ञापन के जरिए इसी पूरे मामले की जांच की मांग की है।फिलहाल इस मामले में सबसे अहम तथ्य यही है कि 5,000 से अधिक शिक्षक मतदाताओं और 2,000 से अधिक तिलोई मतदाताओं को लेकर किए गए दावे अभी जांच का विषय हैं। निर्वाचन आयोग और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों की ओर से सत्यापन के बाद ही इन दावों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। मतदाता सूची में किसी भी बदलाव का अंतिम आधार आधिकारिक जांच और निर्वाचन नियम ही होंगे।
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