Anganwadi Worker Fraud: फर्जी हाईस्कूल अंकपत्र से 26 साल नौकरी, पूर्व प्रधान की पत्नी पर FIR
हरदोई। बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के साकाहा गांव में फर्जी शैक्षिक अभिलेख के आधार पर करीब 26 साल तक आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री के पद पर नौकरी करने के आरोप में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में आरोपी कमला सिंह की सेवाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं। अब जिला प्रशासन के निर्देश पर बाल विकास परियोजना अधिकारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।आरोप है कि कमला सिंह ने वर्ष 2000 में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री के पद पर चयन के दौरान हाईस्कूल के समकक्ष शैक्षिक प्रमाणपत्र लगाया था। बाद में प्रमाणपत्र के सत्यापन में उसमें दर्ज अनुक्रमांक और नाम को लेकर गंभीर गड़बड़ी सामने आई। खास बात यह है कि पूरे मामले की शिकायत कमला सिंह की देवरानी राजरानी ने जिलाधिकारी से की थी।
वर्ष 2000 में हुई थी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री के पद पर नियुक्ति
साकाहा निवासी कमला सिंह की नियुक्ति वर्ष 2000 में साकाहा प्रथम आंगनबाड़ी केंद्र पर कार्यकर्त्री के पद पर हुई थी। शिकायत के अनुसार नियुक्ति के समय उनके पति अनिल कुमार सिंह ग्राम प्रधान थे।काफी समय बाद अक्टूबर 2025 में कमला सिंह की देवरानी राजरानी ने जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर उनकी शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाए। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फर्जी अंकपत्र के आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री के पद पर चयन कराया गया था।शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कराई।
1988 के अंकपत्र के सत्यापन में सामने आया बड़ा अंतर
मामले की जांच के दौरान 28 अक्टूबर 2025 को संबंधित शैक्षिक संस्था को पत्र भेजकर कमला सिंह के हाईस्कूल के समकक्ष अंकपत्र का सत्यापन कराया गया।15 नवंबर 2025 को भेजी गई सत्यापन आख्या में बताया गया कि वर्ष 1988 के अनुक्रमांक 31045 पर कमला सिंह का नाम दर्ज नहीं है। इस अनुक्रमांक पर साकाहा निवासी मालती पुत्री रामपाल सिंह का नाम दर्ज होने की बात सत्यापन रिपोर्ट में सामने आई।यानी जिस अनुक्रमांक को कमला सिंह के शैक्षिक अभिलेख में दर्शाया गया था, सत्यापन के दौरान उसी क्रमांक पर किसी दूसरी छात्रा का नाम दर्ज पाया गया।
सत्यापन के बाद समाप्त की गई सेवाएं
शैक्षिक अभिलेख के सत्यापन के बाद मामला जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय तक पहुंचा। जांच और पत्रावली की कार्रवाई के बाद जिलाधिकारी के आदेश संख्या सी-904, दिनांक 23 जून 2026 के क्रम में कमला सिंह की मानदेय आधारित संविदा सेवाएं समाप्त कर दी गईं।इस कार्रवाई के बाद मामले में आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हुई।
बाल विकास परियोजना अधिकारी ने दर्ज कराई FIR
सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद बावन की बाल विकास परियोजना अधिकारी सारिका सिंह की ओर से बेहटा गोकुल थाने में शिकायत दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कमला सिंह के खिलाफ फर्जी अभिलेख के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।प्रभारी निरीक्षक मार्कंडेय सिंह ने बताया कि बाल विकास परियोजना अधिकारी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है।
देवरानी की शिकायत से खुला मामला
इस पूरे प्रकरण में सबसे खास बात यह है कि शिकायत आरोपी की देवरानी राजरानी ने ही जिलाधिकारी से की थी। अक्टूबर 2025 में दी गई शिकायत के बाद शैक्षिक प्रमाणपत्र की जांच कराई गई और करीब आठ महीने बाद प्रशासनिक स्तर पर सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई हुई।इसके बाद अब पुलिस की ओर से आपराधिक मामले की जांच की जा रही है।
26 साल की नौकरी पर उठे सवाल
कमला सिंह की नियुक्ति वर्ष 2000 में हुई थी और अब वर्ष 2026 में उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं। इस तरह करीब 26 वर्षों तक वह आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री के पद पर कार्यरत रहीं।जांच में सामने आए शैक्षिक अभिलेख के अंतर के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था। हालांकि इस संबंध में जिम्मेदारी तय करने का विषय अलग प्रशासनिक जांच का हिस्सा हो सकता है।फिलहाल पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने, इस्तेमाल करने और नियुक्ति प्रक्रिया में किसी अन्य की भूमिका जैसे पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होगी।
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