
ATWA Maha Rally: बारिश में भी लखनऊ पहुंचे शिक्षक-कर्मचारी, पुरानी पेंशन और टीईटी को लेकर बड़ा प्रदर्शन
लखनऊ। लगातार बारिश के बावजूद शुक्रवार को राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में अटेवा की महारैली में बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी पहुंचे। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, शिक्षक भर्ती में टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग उठाई।रैली में शामिल कर्मचारियों का कहना था कि बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना उनकी मांगों को लेकर जारी आंदोलन की स्थिति को दर्शाता है। प्रदर्शन के दौरान पुरानी पेंशन योजना की बहाली को प्रमुख मुद्दा बनाया गया।
पुरानी पेंशन और टीईटी को लेकर उठी मांग
एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि टीईटी की अनिवार्यता, एनपीएस और निजीकरण को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।रैली में वक्ताओं ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को लेकर भी अपनी मांग दोहराई। कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था महत्वपूर्ण है। इसी मांग को लेकर कर्मचारी संगठन लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर अपनी बात सरकार के सामने रखते रहे हैं।
तीन महीने बाद 'डेरा डालो-घेरा डालो' आंदोलन की चेतावनी
एनएमओपीएस अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार की ओर से मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो तीन महीने बाद लखनऊ में 'डेरा डालो-घेरा डालो' आंदोलन किया जाएगा। इसके तहत क्रमिक अनशन किए जाने की बात कही गई।उन्होंने कर्मचारियों से आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया। संगठन की ओर से कहा गया कि पुरानी पेंशन सहित अन्य मांगों को लेकर सरकार के स्तर पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन के अलग-अलग चरण जारी रहेंगे।
कई कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी रहे मौजूद
महारैली में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदेश उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार राय, चंद्रहास सिंह, डॉ. आशाराम, स्वास्थ्य महासंघ के महामंत्री अशोक कुमार और रंजना सिंह समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।अलग-अलग विभागों से जुड़े कर्मचारियों ने भी रैली में हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान पुरानी पेंशन, टीईटी और निजीकरण से जुड़े मुद्दों पर संगठन के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी।
बारिश में भी जारी रहा प्रदर्शन
लखनऊ में शुक्रवार को बारिश के बीच ईको गार्डन में प्रदर्शन हुआ। खराब मौसम के बावजूद कर्मचारी रैली स्थल पर जुटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से मांगों पर जल्द वार्ता की मांग की।रैली में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। सांस्कृतिक प्रकोष्ठ से जुड़े धर्मेंद्र गोयन और सुमन कुरील ने पेंशन गीत प्रस्तुत किए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों के बीच आंदोलन से जुड़े मुद्दों को सामने रखा गया।
डीसीपी ने प्रतिनिधिमंडल की वार्ता का दिया आश्वासन
महारैली के समापन के दौरान प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच आगे की बातचीत को लेकर भी आश्वासन दिया गया। डीसीपी की ओर से प्रतिनिधिमंडल की मुख्य सचिव के साथ वार्ता कराने का आश्वासन दिया गया।इसके साथ ही एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री के साथ वार्ता कराने की बात भी कही गई। अब कर्मचारी संगठनों की नजर इस प्रस्तावित वार्ता पर रहेगी। संगठन की ओर से जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है, उनमें पुरानी पेंशन की बहाली, टीईटी की अनिवार्यता और निजीकरण का विरोध शामिल है।
आगे की रणनीति पर रहेगी नजर
महारैली के बाद अब संगठन की अगली रणनीति सरकार के साथ होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी। यदि प्रस्तावित वार्ता में कर्मचारियों की मांगों पर कोई निर्णय नहीं होता है तो संगठन ने तीन महीने बाद लखनऊ में क्रमिक अनशन और 'डेरा डालो-घेरा डालो' आंदोलन की बात कही है।फिलहाल प्रशासन की ओर से प्रतिनिधिमंडल की वार्ता का आश्वासन दिया गया है। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर होने वाली बातचीत के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों की मांगों पर सरकार की ओर से क्या रुख सामने आता है।
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