Ram Govind Chaudhary Death: नहीं रहे राम गोविंद चौधरी, शिक्षक भर्ती के दौर को भी किया याद; 72,825 और 29,334 भर्तियों से जुड़ा रहा कार्यकाल
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 की रात लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह करीब 74 वर्ष के थे। उनके निधन की पुष्टि अस्पताल प्रशासन और पार्टी से जुड़े नेताओं की ओर से की गई है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे राम गोविंद चौधरी का पीजीआई में इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही समाजवादी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई।राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वह आठ बार विधानसभा के लिए चुने गए। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए गए और 2022 तक इस जिम्मेदारी में रहे। इससे पहले वह मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकारों में मंत्री भी रहे थे।
बेसिक शिक्षा मंत्री रहते शिक्षक भर्ती का बड़ा दौर
राम गोविंद चौधरी के राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग से भी जुड़ा रहा। अखिलेश यादव सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री रहते उनके कार्यकाल में कई बड़ी शिक्षक भर्ती प्रक्रियाएं आगे बढ़ीं।पुराने समाचार अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2012 में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों के पदों पर भर्ती की घोषणा और प्रक्रिया को लेकर राम गोविंद चौधरी ने विधानसभा में जानकारी दी थी। बाद के वर्षों में इसी भर्ती प्रक्रिया को लेकर न्यायालयों में मामला भी चला और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी। वर्ष 2014 में तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में 72,825 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने की समयसीमा की जानकारी भी दी थी।यह वही भर्ती थी जिसे बाद में उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित प्राथमिक शिक्षक भर्तियों में गिना गया। वर्ष 2014 में विधानसभा में सरकार की ओर से बताया गया था कि 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों के चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुपालन में चल रही है।
29,334 उच्च प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती भी चर्चा में रही
राम गोविंद चौधरी के बेसिक शिक्षा मंत्री रहते उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित और विज्ञान शिक्षकों की 29,334 पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। अप्रैल 2015 की रिपोर्ट में इस भर्ती को लेकर सरकार के स्तर पर निर्णय और अभ्यर्थियों की मांगों का उल्लेख मिलता है।एक अन्य पुराने समाचार अभिलेख में उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान और गणित के 29,334 शिक्षकों की सीधी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया था। उस समय राम गोविंद चौधरी प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री थे।
15 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती का भी रहा उल्लेख
शिक्षक भर्ती से जुड़े पुराने रिकॉर्ड में 15,000 सहायक अध्यापक पदों की भर्ती का भी उल्लेख मिलता है। वर्ष 2014 की रिपोर्ट के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 15,000 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रस्तावित थी और तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने जिलों में आवेदन से संबंधित व्यवस्था पर सहमति दी थी। यह भर्ती बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी और बीटीसी-उर्दू के साथ टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए बताई गई थी।वहीं फरवरी 2015 की एक पुरानी रिपोर्ट में मंत्री के हवाले से 15,000 बीटीसी अभ्यर्थियों के चयन के लिए विज्ञापन जारी होने और 72,825 प्राथमिक तथा 29,334 उच्च प्राथमिक शिक्षक पदों की भर्ती प्रक्रिया चलने की जानकारी दी गई थी।
शिक्षक समुदाय में क्यों याद किया जा रहा कार्यकाल?
राम गोविंद चौधरी के निधन के बाद बेसिक शिक्षा और शिक्षक भर्ती से जुड़े लोगों के बीच उनके मंत्री रहते हुए हुई भर्ती प्रक्रियाओं की चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर भी शिक्षक समुदाय से जुड़े लोगों की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके कार्यकाल की इन भर्तियों का उल्लेख किया जा रहा है।हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 72,825, 29,334 और 15,000 पदों की भर्ती प्रक्रियाओं को उनके मंत्री कार्यकाल से जोड़ने के पर्याप्त पुराने समाचार अभिलेख मिलते हैं, लेकिन प्रत्येक भर्ती के अंतिम चयन, नियुक्ति और पूरी प्रक्रिया का श्रेय किसी एक व्यक्ति को देना उचित नहीं होगा। इन प्रक्रियाओं में शासन, विभागीय अधिकारियों, न्यायालयों और भर्ती से जुड़े अन्य संस्थानों की भी भूमिका रही थी।
आठ बार विधायक से नेता प्रतिपक्ष तक
राम गोविंद चौधरी ने छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। बलिया के गोसाईंपुर से आने वाले चौधरी ने 1977 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद वह कई बार विधायक चुने गए और कुल आठ बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया।विधानसभा में वह अपनी प्रभावी भाषण शैली और आंकड़ों के साथ मुद्दे उठाने के लिए भी जाने जाते थे। उनके लंबे राजनीतिक सफर में मंत्री पद से लेकर नेता प्रतिपक्ष तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रहीं।
अखिलेश यादव ने जताया शोक
राम गोविंद चौधरी के निधन पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें पार्टी का वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष बताते हुए निधन को अत्यंत दुखद बताया तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में शक्ति मिलने की कामना की। अन्य सपा नेताओं ने भी उनके निधन पर श्रद्धांजलि दी।राम गोविंद चौधरी के निधन से समाजवादी पार्टी ने लंबे राजनीतिक अनुभव वाले अपने एक वरिष्ठ नेता को खो दिया है। बलिया की राजनीति से लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा तक उनका कई दशक लंबा राजनीतिक सफर रहा। बेसिक शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल से जुड़ी 72,825 और 29,334 जैसी बड़ी शिक्षक भर्ती प्रक्रियाएं भी उनके सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल रहेंगी।
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