UP School News: उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों की डिजिटल लाइब्रेरी का होगा भौतिक सत्यापन, एक सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में स्थापित डिजिटल लाइब्रेरी को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग में नई प्रक्रिया शुरू की गई है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 22 सितंबर 2026 को जारी पत्र में संबंधित अधिकारियों को विद्यालयों में स्थापित डिजिटल लाइब्रेरी का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र के अनुसार पीएमश्री की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट वर्ष 2023-24 तथा 2024-25 में प्राप्त स्वीकृति के क्रम में चयनित विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई है। अब इन डिजिटल लाइब्रेरियों के वास्तविक संचालन और उपलब्धता की स्थिति का मौके पर सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद संबंधित अधिकारियों को प्रमाण-पत्र और शपथ पत्र राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के बाद अब होगा भौतिक सत्यापन
जारी पत्र में बताया गया है कि पीएमश्री के माध्यम से चयनित आदर्श विद्यालयों में उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। इन विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना से संबंधित जानकारी पहले ही निर्धारित पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है। अब केवल ऑनलाइन विवरण के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने के बजाय विद्यालय स्तर पर इसकी वास्तविक स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। यानी संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर यह देखेंगे कि जिन विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित किए जाने की जानकारी दर्ज की गई है, वहां वास्तव में सुविधा उपलब्ध है या नहीं और उसका संचालन निर्धारित व्यवस्था के अनुसार हो रहा है या नहीं।
स्कूलों में जाकर जांच करेंगे अधिकारी
राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय के पत्र में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि चयनित विद्यालयों में स्थापित डिजिटल लाइब्रेरी का भौतिक सत्यापन कराया जाए। सत्यापन के दौरान विद्यालय में डिजिटल लाइब्रेरी की उपलब्धता और उसके संचालन से संबंधित स्थिति की जांच की जाएगी। इसके बाद निर्धारित प्रारूप के अनुसार प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विभाग की ओर से यह कदम डिजिटल लाइब्रेरी की वास्तविक स्थिति और पोर्टल पर दर्ज विवरण के बीच मिलान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एक सप्ताह के अंदर देना होगा प्रमाण-पत्र
इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद संबंधित अधिकारियों को शपथ पत्र और प्रमाण-पत्र एक सप्ताह के अंदर राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यानी जिलों को सत्यापन के बाद रिपोर्ट भेजने में देरी नहीं करनी होगी। इसके लिए संबंधित जिला स्तर के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। आदेश की प्रतिलिपि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, संबंधित निदेशालय और जिला स्तर के अधिकारियों को भी भेजी गई है।
किन अधिकारियों को भेजा गया पत्र?
राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से जारी पत्र की प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, निदेशक बेसिक शिक्षा, निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, महानिदेशक स्कूल शिक्षा और जिला समन्वयकों समेत संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है। इससे स्पष्ट है कि डिजिटल लाइब्रेरी की सत्यापन प्रक्रिया को जिला स्तर पर लागू कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
डिजिटल लाइब्रेरी से छात्रों को क्या फायदा?
विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक पुस्तकों के साथ डिजिटल शैक्षिक सामग्री तक पहुंच उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को विषय से जुड़ी डिजिटल सामग्री, अध्ययन संसाधन और अन्य शैक्षिक सामग्री का उपयोग करने का अवसर मिल सकता है। खास तौर पर उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है। हालांकि किसी विद्यालय में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित होने के साथ-साथ उसका नियमित और प्रभावी संचालन भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से अब विभाग की ओर से भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है।
अब आगे क्या होगा?
अब संबंधित अधिकारी चयनित विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थिति का सत्यापन करेंगे। मौके पर उपलब्ध व्यवस्था की जांच के बाद निर्धारित प्रमाण-पत्र और शपथ पत्र तैयार कर राज्य परियोजना कार्यालय को भेजना होगा। इस प्रक्रिया से पोर्टल पर दर्ज जानकारी और विद्यालय में मौजूद वास्तविक व्यवस्था का मिलान किया जा सकेगा। शिक्षकों और विद्यालयों के लिए भी यह अपडेट महत्वपूर्ण है, क्योंकि आने वाले समय में डिजिटल संसाधनों के उपयोग और उनके संचालन की स्थिति को लेकर विभाग की ओर से आगे के निर्देश जारी किए जा सकते हैं।




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