8वां वेतन आयोग: ₹45,000 पेंशन की मांग से मचा हड़कंप, OPS पर भी बड़ा अपडेट; अक्टूबर में होंगी अहम बैठकें
8th Pay Commission Latest Update: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों से उनकी मांगें सुन रहा है। इस बीच पेंशन को लेकर कई बड़े प्रस्ताव आयोग के सामने रखे गए हैं। इनमें न्यूनतम पेंशन 45,000 रुपये करने, अंतिम वेतन के 67 प्रतिशत के बराबर पेंशन देने और पारिवारिक पेंशन को अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत तक करने जैसी मांगें शामिल हैं। हालांकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को यहां एक बात समझना जरूरी है। 45,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन या 3.83 फिटमेंट फैक्टर अभी सरकार की ओर से मंजूर नहीं किया गया है। ये कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों की ओर से 8वें वेतन आयोग के सामने रखी गई मांगें हैं।
8वें वेतन आयोग की बैठकें लगातार जारी
केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया था। आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस दौरान आयोग कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, संगठनों और दूसरे हितधारकों से सुझाव ले रहा है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अगस्त और सितंबर 2026 में बेंगलुरु, जयपुर, चंडीगढ़ और दूसरे स्थानों की बैठकों से संबंधित सूचनाएं जारी की गई हैं। अब आयोग की नजर अक्टूबर की बैठकों पर है। आधिकारिक सूचना के मुताबिक 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में आयोग की बैठक होगी। इसके बाद 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में हितधारकों से बातचीत की जाएगी। मुंबई की बैठक के लिए मुलाकात का अनुरोध भेजने की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर रखी गई है। इन बैठकों में वेतन, भत्ते, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर संगठनों की ओर से अपनी मांगें रखने की संभावना है।
₹45,000 न्यूनतम पेंशन की मांग क्यों चर्चा में है?
8वें वेतन आयोग के सामने पेंशनभोगी संगठनों ने इस बार न्यूनतम पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। भारत पेंशनर्स समाज ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 45,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है।संगठन की ओर से केवल न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की बात नहीं कही गई है। प्रस्ताव में अंतिम मूल वेतन के 67 प्रतिशत के बराबर पेंशन और पारिवारिक पेंशन को अंतिम मूल वेतन के 50 प्रतिशत तक करने की मांग भी शामिल है। अगर इन मांगों को स्वीकार किया जाता है तो मौजूदा पेंशन ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट में इन प्रस्तावों को किस रूप में शामिल करेगा।
3.83 फिटमेंट फैक्टर पर भी नजर
8वें वेतन आयोग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर की है। भारत पेंशनर्स समाज ने न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 3.83 करने का प्रस्ताव रखा है। कर्मचारी संगठनों की गणना के मुताबिक वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने के लिए करीब 3.83 का गुणांक बनता है। कर्मचारी पक्ष से जुड़े एक विस्तृत प्रस्ताव में 18,000 रुपये से 69,000 रुपये तक की गणना के आधार पर 3.833 फिटमेंट फैक्टर का उल्लेख किया गया है। यही वजह है कि 3.83 का आंकड़ा कर्मचारियों के बीच तेजी से चर्चा में है। लेकिन आयोग ने अभी तक यह नहीं कहा है कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर 3.83 ही होगा।
OPS की बहाली की मांग पर क्या है सरकार का रुख?
पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली 8वें वेतन आयोग के सामने रखी जा रही सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक है। कई कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि अंशदायी पेंशन व्यवस्था में शामिल कर्मचारियों को फिर से पुरानी परिभाषित पेंशन व्यवस्था में लाया जाए।सर्वे ऑफ इंडिया के मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में सभी कर्मचारियों के लिए OPS और सामान्य भविष्य निधि की बहाली का प्रस्ताव रखा है। संगठन ने सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर सुनिश्चित पेंशन की मांग भी रखी है। अन्य कर्मचारी संगठनों की ओर से भी 8वें वेतन आयोग को दिए गए ज्ञापनों में OPS बहाली की मांग उठाई गई है।लेकिन यहां सरकार का मौजूदा रुख बेहद महत्वपूर्ण है। 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS बहाल करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। यह जवाब वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की जानकारी के आधार पर दिया गया था। इसलिए अभी OPS की बहाली को तय मानना सही नहीं होगा। कर्मचारी संगठन इसकी मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का ताजा संसदीय जवाब अलग स्थिति बताता है।
पेंशन के साथ महंगाई राहत और समानता की मांग
पेंशनभोगी संगठनों की मांग सिर्फ न्यूनतम पेंशन तक सीमित नहीं है। पुराने और नए पेंशनभोगियों के बीच पेंशन में समानता, महंगाई राहत, पारिवारिक पेंशन और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी सुझाव दिए गए हैं।भारत पेंशनर्स समाज ने अपने प्रस्ताव में पेंशनभोगियों की पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए वेतन और पेंशन निर्धारण के लिए परिवार की इकाइयों की संख्या बढ़ाने का सुझाव भी दिया है। उसके प्रस्ताव में पांच से अधिक भारित इकाइयों वाली पारिवारिक गणना का मॉडल रखा गया है। दूसरी ओर, कर्मचारी पक्ष से जुड़े प्रस्तावों में पुराने पेंशनभोगियों के लिए पेंशन समानता और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वर्तमान वेतनमान के अनुरूप लाभ देने जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं।
क्या 2026 में ही बढ़ जाएगी पेंशन?
अभी ऐसा कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया अभी चल रही है और आयोग विभिन्न वर्गों से सुझाव जुटा रहा है। आयोग ने 2026 में प्रश्नावली के माध्यम से भी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, संगठनों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों से राय मांगी थी। इसमें कुल 18 सवाल शामिल थे और जवाब देने की प्रक्रिया 31 मार्च 2026 को बंद हो चुकी है। इसके बाद आयोग को प्राप्त सुझावों, विभागों से मिले आंकड़ों और विभिन्न संगठनों की मांगों का अध्ययन करना होगा। फिर रिपोर्ट तैयार होगी।
मई 2027 के आसपास आ सकती है आयोग की रिपोर्ट
8वें केंद्रीय वेतन आयोग को रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने की अवधि दी गई है। इसका मतलब है कि आयोग की प्रक्रिया 2027 के मध्य तक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच सकती है। इसके बाद केंद्र सरकार आयोग की सिफारिशों पर विचार करेगी और स्वीकार किए गए प्रस्तावों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी।इसलिए फिलहाल कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीन आंकड़े 45,000 रुपये न्यूनतम पेंशन, 69,000 रुपये न्यूनतम मूल वेतन और 3.83 फिटमेंट फैक्टर हैं। लेकिन तीनों ही अभी कर्मचारी या पेंशनभोगी संगठनों की मांग अथवा प्रस्ताव हैं, सरकार की स्वीकृत व्यवस्था नहीं।आने वाले दिनों में बेंगलुरु और मुंबई की बैठकों के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। खासकर फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन, पेंशन संशोधन और OPS से जुड़े प्रस्तावों पर आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों की ओर से रखे जाने वाले तर्क महत्वपूर्ण होंगे। अंतिम फैसला आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के आधार पर ही होगा।
8वें वेतन आयोग में फिलहाल क्या-क्या चर्चा में?
न्यूनतम पेंशन: 45,000 रुपये की मांग
न्यूनतम मूल वेतन: 69,000 रुपये का प्रस्ताव
फिटमेंट फैक्टर: 3.83 की मांग
पेंशन: अंतिम मूल वेतन का 67 प्रतिशत करने का प्रस्ताव
पारिवारिक पेंशन: अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत करने की मांग
OPS: कर्मचारी संगठनों की ओर से बहाली की मांग
आयोग की रिपोर्ट: 18 महीने की समयसीमा
अगली प्रमुख बैठकें: 7-8 अक्टूबर बेंगलुरु और 22-23 अक्टूबर मुंबई
ध्यान रहे कि उपरोक्त पेंशन और वेतन के आंकड़े मांगों एवं प्रस्तावों को दर्शाते हैं। इन्हें अभी केंद्र सरकार द्वारा मंजूर नई पेंशन या वेतन व्यवस्था नहीं माना जा सकता।
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