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गुरुवार, 24 सितंबर 2026

UP Mid Day Meal: महंगी दालों से बढ़ी चिंता, क्या बढ़ेगा मिड-डे मील का बजट? जानिए एक थाली के लिए सरकार कितनी देती है रकम

 


UP Mid Day Meal: महंगी दालों से बढ़ी चिंता, क्या बढ़ेगा मिड-डे मील का बजट? जानिए एक थाली के लिए सरकार कितनी देती है रकम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील यानी पीएम पोषण योजना के भोजन की लागत को लेकर महंगाई के बीच सवाल उठने लगे हैं। बाजार में दालों और दूसरी खाद्य सामग्री की कीमत बढ़ने से विद्यालय स्तर पर भोजन तैयार करने की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन के सामने निर्धारित मात्रा और गुणवत्ता के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है। खास बात यह है कि केंद्र सरकार ने मई 2025 से पीएम पोषण योजना के तहत सामग्री लागत में 9.50 प्रतिशत की वृद्धि की थी, लेकिन योजना की सामग्री लागत में दाल, सब्जी, तेल, मसाले और ईंधन जैसी कई चीजें शामिल होती हैं। ऐसे में किसी एक खाद्य सामग्री की कीमत बढ़ने का असर पूरे खर्च पर पड़ सकता है।

लखनऊ में दालों के बढ़े दाम, स्कूलों की रसोई पर असर

लखनऊ के फुटकर बाजार में हाल के भावों के अनुसार अरहर दाल करीब 135 से 145 रुपये किलो, उड़द 150 से 160 रुपये, मूंग करीब 130 रुपये, चना दाल 90 से 95 रुपये और मसूर करीब 95 से 100 रुपये किलो बताई जा रही है। दाल पीएम पोषण के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसकी कीमत में बढ़ोतरी का असर विद्यालयों की भोजन व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि स्थानीय बाजार में कीमतें दुकान, गुणवत्ता और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए इन दरों को पूरे प्रदेश की आधिकारिक औसत बाजार दर नहीं माना जाना चाहिए।

एक बच्चे के भोजन के लिए कितनी सामग्री लागत मिलती है

केंद्र सरकार ने एक मई 2025 से पीएम पोषण योजना के तहत सामग्री लागत बढ़ाकर प्राथमिक कक्षाओं और बालवाटिका के लिए 6.78 रुपये तथा उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए 10.17 रुपये प्रति विद्यार्थी प्रतिदिन कर दी थी। इससे पहले यह राशि क्रमश: 6.19 रुपये और 9.29 रुपये थी। यानी प्राथमिक स्तर पर 59 पैसे और उच्च प्राथमिक स्तर पर 88 पैसे की वृद्धि की गई। केंद्र सरकार के अनुसार यह बढ़ोतरी महंगाई सूचकांक के आधार पर की गई थी और इसके कारण वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र पर करीब 954 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आया।यहां यह समझना जरूरी है कि 6.78 रुपये या 10.17 रुपये केवल दाल के लिए नहीं हैं। इस सामग्री लागत से दाल, सब्जियां, तेल, मसाले और ईंधन जैसी भोजन तैयार करने की आवश्यक वस्तुओं का खर्च पूरा किया जाता है। केंद्र सरकार के अनुसार प्राथमिक स्तर पर प्रति विद्यार्थी 20 ग्राम और उच्च प्राथमिक स्तर पर 30 ग्राम दाल निर्धारित मात्रा का हिस्सा है। इसी तरह सब्जियों की मात्रा क्रमश: 50 ग्राम और 75 ग्राम रखी गई है।

बढ़ती कीमतों के बीच बजट की समीक्षा की मांग

दाल की कीमत बढ़ने के साथ यदि उसी बजट से सब्जी, तेल, मसाले और ईंधन की लागत भी पूरी करनी हो तो विद्यालय स्तर पर खर्च का संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को निर्धारित मात्रा और पोषण मानकों के अनुसार भोजन उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में बाजार में खाद्य सामग्री की कीमतों में लगातार बदलाव होने पर सामग्री लागत की समय-समय पर समीक्षा जरूरी है।हालांकि सरकारी व्यवस्था में सामग्री लागत को महंगाई सूचकांक से जोड़कर संशोधित किया जाता है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार पीएम पोषण के लिए महंगाई संबंधी आंकड़े श्रम मंत्रालय का श्रम ब्यूरो उपलब्ध कराता है। इसके लिए 20 राज्यों के 600 गांवों से लगातार कीमतों का आंकड़ा एकत्र किया जाता है। इसी आधार पर पीएम पोषण की सामग्री लागत में संशोधन किया जाता है।

पीएम पोषण में सिर्फ दाल का ही खर्च नहीं

पीएम पोषण योजना में भोजन की लागत को केवल दाल के भाव से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। योजना के तहत खाद्यान्न की आपूर्ति भी केंद्र सरकार करती है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार प्राथमिक स्तर के लिए प्रति बच्चे प्रतिदिन 100 ग्राम और उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 150 ग्राम खाद्यान्न का प्रावधान है। खाद्यान्न के अलावा सामग्री लागत से अन्य आवश्यक वस्तुओं का खर्च पूरा किया जाता है। केंद्र सरकार ने बताया है कि खाद्यान्न समेत सभी घटकों को जोड़ने पर प्रति भोजन लागत बालवाटिका और प्राथमिक स्तर के लिए करीब 12.13 रुपये तथा उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 17.62 रुपये बैठती है।

बच्चों की थाली और शिक्षकों की जिम्मेदारी

सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भूमिका केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं रहती। विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की उपस्थिति, विभिन्न अभिलेख, विभागीय सूचनाएं और कई प्रशासनिक काम भी शिक्षकों को करने पड़ते हैं। भोजन व्यवस्था से जुड़े कार्यों के कारण विद्यालयों में अतिरिक्त जिम्मेदारी भी आती है। ऐसे में खाद्य सामग्री की कीमत बढ़ने पर विद्यालय स्तर पर खर्च का प्रबंधन एक अलग चुनौती बन सकता है।यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पीएम पोषण योजना का उद्देश्य केवल बच्चों को भोजन देना नहीं बल्कि उन्हें पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराना भी है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत प्राथमिक स्तर के बच्चों के भोजन में 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन के पोषण मानक निर्धारित हैं।

राज्यों को अतिरिक्त राशि देने की भी छूट

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम पोषण के तहत निर्धारित सामग्री लागत न्यूनतम अनिवार्य दर है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने संसाधनों से निर्धारित हिस्से से अधिक राशि दे सकते हैं। यानी यदि किसी राज्य को स्थानीय बाजार की कीमतों और पोषण संबंधी जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता महसूस होती है तो वह अपनी ओर से अधिक योगदान कर सकता है।ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी दाल, सब्जी, तेल और ईंधन की स्थानीय कीमतों की समीक्षा कर विद्यालयों को उपलब्ध संसाधनों और वास्तविक खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। महंगाई का असर अगर भोजन की गुणवत्ता या निर्धारित मात्रा पर पड़ता है तो इसका सीधा प्रभाव बच्चों के पोषण पर पड़ेगा।

सरकार के सामने क्या है चुनौती

पीएम पोषण योजना के लिए सामग्री लागत में मई 2025 में बढ़ोतरी की जा चुकी है, लेकिन बाजार भाव लगातार बदलते रहते हैं। दाल जैसी आवश्यक सामग्री की कीमत में तेज बढ़ोतरी होने पर विद्यालय स्तर पर उपलब्ध बजट में दूसरे खर्चों के लिए कम राशि बच सकती है। इसलिए शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन की ओर से उठाई जा रही मांग को बाजार की वास्तविक कीमतों और योजना के पोषण मानकों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।आखिर पीएम पोषण की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि स्कूल में भोजन बना या नहीं, बल्कि यह भी देखना होगा कि बच्चों को निर्धारित मात्रा, गुणवत्ता और पोषण मानकों के अनुरूप भोजन मिला या नहीं। ऐसे में महंगाई बढ़ने के साथ सामग्री लागत की नियमित समीक्षा और जरूरत पड़ने पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना सरकारी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बना रहेगा।

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