Prayagraj News: 18 दिन से अयोग्य हो रहे न्यायिक अधिकारियों को हाईकोर्ट से राहत, 27 सितंबर की पदोन्नति परीक्षा में बैठ सकेंगे
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा में पदोन्नति की परीक्षा देने से महज 18 दिन की कमी के कारण वंचित हो रहे न्यायिक अधिकारियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि चार जुलाई 2025 तक पांच वर्ष की अर्हता सेवा पूरी कर चुके याचियों को 27 सितंबर 2026 को होने वाली पदोन्नति परीक्षा में अस्थायी रूप से शामिल होने दिया जाए। हालांकि परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिलने से अभ्यर्थियों के पक्ष में पदोन्नति का कोई अधिकार स्वत: नहीं बनेगा।यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने आशुतोष तिवारी समेत 40 न्यायिक अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। मामला उच्चतर न्यायिक सेवा में पदोन्नति परीक्षा के लिए निर्धारित पांच वर्ष की अर्हता सेवा और कटऑफ तिथि से जुड़ा है।
31 दिसंबर 2024 की कटऑफ से बना विवाद
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे ने अदालत के सामने दलील रखी कि उच्चतर न्यायिक सेवा से जुड़े नियमों में संशोधन 4 जुलाई 2025 को अधिसूचित किया गया था। याचियों का कहना था कि इस तारीख को आधार मानकर उनकी सेवा अवधि की गणना की जाए तो वे पांच वर्ष की आवश्यक अर्हता पूरी कर चुके हैं।विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि पदोन्नति परीक्षा के लिए 31 दिसंबर 2024 को कटऑफ तिथि माना गया। इसके चलते याचिकाकर्ता निर्धारित पांच वर्ष की सेवा अवधि से केवल 18 दिन पीछे रह गए और उन्हें परीक्षा के लिए अयोग्य माना गया। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए न्यायिक अधिकारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
नियम में 4 जुलाई 2025 को हुआ था संशोधन
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह था कि जब सेवा संबंधी नियम में संशोधन 4 जुलाई 2025 को अधिसूचित हुआ, तब उस तारीख तक पांच वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अधिकारियों को पदोन्नति परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए।याचियों की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि 31 दिसंबर 2024 की कटऑफ लागू होने के कारण उन्हें बहुत मामूली अंतर के चलते परीक्षा से बाहर किया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार यही 18 दिन का अंतर इस विवाद का मुख्य आधार बना है।
हाईकोर्ट प्रशासन ने कटऑफ का किया बचाव
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशिनंदन ने याचिका का विरोध किया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि 31 दिसंबर 2024 की कटऑफ तिथि निर्धारित करने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने फिलहाल परीक्षा में शामिल होने की अंतरिम अनुमति देने का फैसला किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अनुमति अंतिम अधिकार के रूप में नहीं मानी जाएगी और परीक्षा में बैठने मात्र से किसी अभ्यर्थी को पदोन्नति का दावा प्राप्त नहीं होगा।
27 सितंबर को होगी पदोन्नति परीक्षा
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का सीधा असर आगामी 27 सितंबर 2026 को होने वाली पदोन्नति परीक्षा पर पड़ेगा। जिन याचिकाकर्ताओं ने 4 जुलाई 2025 तक पांच वर्ष की अर्हता सेवा पूरी कर ली है, उन्हें फिलहाल परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।हालांकि इस अंतरिम राहत का अंतिम परिणाम मामले की आगे होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है।
परीक्षा में बैठना और पदोन्नति अलग-अलग विषय
अदालत के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि परीक्षा में शामिल होने की अनुमति को पदोन्नति का अधिकार नहीं माना जाएगा। यानी संबंधित अधिकारी परीक्षा में शामिल होकर अपनी योग्यता साबित कर सकेंगे, लेकिन केवल परीक्षा में बैठने के आधार पर पदोन्नति का दावा नहीं किया जा सकेगा।इस अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य फिलहाल उन अधिकारियों को परीक्षा से बाहर होने से रोकना है जिनकी पांच वर्ष की सेवा पूरी होने और कटऑफ की गणना को लेकर विवाद अदालत के सामने लंबित है। अंतिम स्थिति मामले की सुनवाई और आगे आने वाले आदेशों से स्पष्ट होगी।
40 न्यायिक अधिकारियों की याचिका
यह मामला आशुतोष तिवारी और 39 अन्य न्यायिक अधिकारियों की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। यानी कुल 40 अधिकारियों ने कटऑफ और अर्हता को लेकर हाईकोर्ट में राहत की मांग की थी।याचिका में यह मुद्दा उठाया गया कि नियमों में संशोधन की तारीख और परीक्षा के लिए निर्धारित कटऑफ के बीच सेवा अवधि की गणना किस आधार पर की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं के हित में अंतरिम व्यवस्था करते हुए उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी है।
अब 9 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
फिलहाल 27 सितंबर की परीक्षा में अर्हता को लेकर विवादित अधिकारियों को बैठने की अनुमति मिल गई है। लेकिन यह मामला अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। अदालत ने अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को रखी है, जहां मामले के आगे की दिशा पर सुनवाई होगी।इसलिए वर्तमान आदेश को अंतरिम राहत के रूप में ही देखा जाएगा। परीक्षा में शामिल होने वाले अधिकारियों के पदोन्नति संबंधी अधिकार और कटऑफ से जुड़े अंतिम सवाल पर अदालत का अंतिम निर्णय बाद में आएगा।
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