UP Drug Free Zone: स्कूल-कॉलेज के 500 मीटर दायरे में नहीं बिकेंगे नशीले पदार्थ, 10 जिले हॉटस्पॉट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्कूल-कॉलेजों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री और अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए सरकार ने निगरानी का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। अब प्रदेश में सभी शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग फ्री जोन के रूप में सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने शुक्रवार को नारकोटिक्स कंट्रोल एवं समन्वय तंत्र की राज्य स्तरीय समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को यह निर्देश दिया।बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध कारोबार, नशा मुक्ति अभियान, जब्त पदार्थों के निस्तारण और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की गई। अधिकारियों को स्कूल-कॉलेजों में नियमित नशा मुक्ति और जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही नशे से प्रभावित युवाओं की काउंसलिंग और पुनर्वास पर भी ध्यान देने को कहा गया।
स्कूल-कॉलेज के 500 मीटर दायरे पर रहेगी नजर
मुख्य सचिव ने शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के क्षेत्र को ड्रग फ्री जोन के रूप में प्रभावी तरीके से लागू करने को कहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को नशीले पदार्थों की उपलब्धता से दूर रखना है।इसके लिए जिलों में स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने और चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल और कॉलेजों में नशे के दुष्प्रभावों को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाने की भी बात कही गई है।
10 जिलों को प्रमुख हॉटस्पॉट माना गया
बैठक में पिछले 10 वर्षों के मादक पदार्थों की बरामदगी से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर 10 प्रमुख हॉटस्पॉट चिह्नित किए जाने की जानकारी दी गई। इनमें लखनऊ, कानपुर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, आगरा, बरेली, शामली, बाराबंकी, सहारनपुर और सोनभद्र शामिल हैं।इन सभी क्षेत्रों में 20-20 हाई वैल्यू टारगेट चिन्हित किए गए हैं। इस तरह 10 प्रमुख क्षेत्रों में कुल 200 हाई वैल्यू टारगेट पर कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों को इन क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने और मादक पदार्थों की आपूर्ति से जुड़े स्रोत, नेटवर्क तथा वितरण तंत्र पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
2026 में 3737 मुकदमे, 5390 गिरफ्तार
बैठक में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2026 में अब तक उत्तर प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,737 अभियोग दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 5,390 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 32,768 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ बरामद किए गए।इसी अवधि में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 153 अभियोग दर्ज किए। इन मामलों में 340 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और 8,135.52 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किए गए।
2022 से अब तक 4.37 लाख किलो मादक पदार्थों का निस्तारण
मादक पदार्थों की जब्ती के साथ उनके निस्तारण को लेकर भी बैठक में आंकड़े सामने रखे गए। वर्ष 2022 से अगस्त 2026 तक प्रदेश में कुल 4,37,902 किलोग्राम मादक पदार्थों का निस्तारण कराया गया है।इन निस्तारित मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 1,925 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा अवैध मादक पदार्थों से अर्जित संपत्तियों पर कार्रवाई करते हुए करीब 78 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त किए जाने की जानकारी दी गई।
जनवरी से जून तक 2642 जागरूकता कार्यक्रम
सरकार की रणनीति केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है। बैठक में बताया गया कि जनवरी से जून 2026 के बीच प्रदेश में 2,642 नशा मुक्ति एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के दौरान 1,50,711 लोगों को मादक पदार्थों का सेवन नहीं करने की शपथ दिलाई गई।अब स्कूल और कॉलेजों में भी ऐसे अभियान को और व्यवस्थित तरीके से चलाने के निर्देश दिए गए हैं। नशे की चपेट में आए युवाओं की पहचान कर उनकी काउंसलिंग और पुनर्वास पर भी जोर दिया गया है।
नशे के स्रोत और सप्लाई नेटवर्क पर होगी कार्रवाई
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को केवल छोटे स्तर पर मादक पदार्थ बेचने वालों तक कार्रवाई सीमित न रखने के निर्देश दिए। जिलों में नशीले पदार्थों के स्रोत, तस्करी के नेटवर्क और वितरण तंत्र की पहचान कर कार्रवाई करने को कहा गया है।इसके साथ ही प्री-कर्सर रसायनों, एसीटिक एनहाइड्राइड, नियंत्रित पदार्थों और नशीली दवाओं के दुरुपयोग तथा अवैध तरीके से दूसरी जगह भेजे जाने की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। एनडीपीएस एक्ट के तहत निरोधात्मक कार्रवाई को प्रभावी बनाने और अवैध मादक पदार्थों से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया तेज करने पर भी जोर दिया गया।
25 जिलों में विशेष न्यायालयों की तैयारी
बैठक में एनडीपीएस मामलों की सुनवाई को लेकर भी जानकारी दी गई। सबसे अधिक एनडीपीएस मामलों वाले 25 जिलों में विशेष न्यायालयों के लिए पद सृजित किए जा चुके हैं। इन न्यायालयों के गठन का प्रस्ताव अभी प्रक्रिया में है।इसका उद्देश्य मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इससे संबंधित मामलों में अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को अलग से मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।
अवैध अफीम की खेती की सूचना देने के लिए व्हाट्सऐप नंबर
अवैध अफीम की खेती पर निगरानी के लिए भी व्यवस्था की गई है। बैठक में बताया गया कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो की ओर से अवैध अफीम की खेती की सूचना देने के लिए 986855002 नंबर जारी किया गया है। इस नंबर पर अवैध खेती से संबंधित फोटो भी भेजी जा सकती है।बैठक में पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, राजस्व खुफिया निदेशालय, जीएसटी और आबकारी विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर कार्रवाई तेज करने की रणनीति पर चर्चा हुई।शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर दायरे को ड्रग फ्री जोन बनाने का निर्देश इसी व्यापक अभियान का हिस्सा है। अब स्कूल-कॉलेजों के आसपास निगरानी, जागरूकता अभियान और अवैध बिक्री के खिलाफ कार्रवाई को एक साथ आगे बढ़ाने की तैयारी है।
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