UP School News: यूपी के सभी स्कूलों में बनेगी परिवहन सुरक्षा समिति, हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। प्रदेश के सभी स्कूलों में अब विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन कराना होगा। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें कराने और स्कूलों में गठित समितियों के कामकाज की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने गोमती नगर रिवर बैंक रेजिडेंट्स एसोसिएशन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन नियमों में स्कूली वाहनों की सुरक्षा को लेकर पहले से स्पष्ट प्रावधान हैं, लेकिन इनका प्रभावी तरीके से पालन कराया जाना जरूरी है।
मुख्य सचिव को जारी करने होंगे जरूरी निर्देश
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों की नियमित बैठक सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इसके साथ ही प्रत्येक स्कूल में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति के गठन और उसके कामकाज की निगरानी भी सुनिश्चित की जाए।जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में समितियों के गठन और उनके काम की निगरानी करनी होगी। अदालत के निर्देश के बाद अब केवल समिति का गठन करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी देखना होगा कि समिति निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन कर रही है या नहीं।
स्कूल परिवहन सुरक्षा समिति में कौन-कौन होंगे सदस्य?
विद्यालय स्तर पर बनने वाली परिवहन सुरक्षा समिति की अध्यक्षता स्कूल के प्रधानाचार्य करेंगे। समिति में प्रशासन, शिक्षा, पुलिस, परिवहन और स्थानीय निकाय से जुड़े प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।समिति में नायब तहसीलदार, संबंधित थाने के प्रतिनिधि, बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग के नामित अधिकारी, वाहन संचालकों के दो प्रतिनिधि तथा स्थानीय निकाय के नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे।इस व्यवस्था का उद्देश्य स्कूल बस, वैन और बच्चों को लाने-ले जाने वाले अन्य वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर स्कूल स्तर से निगरानी रखना है।
साल में कम से कम एक बार होगी वाहन की जांच
विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। समिति को प्रत्येक स्कूली वाहन की फिटनेस और बीमा की जांच कम से कम साल में एक बार करनी होगी।यदि जांच के दौरान वाहन में कोई कमी मिलती है तो इसकी सूचना संबंधित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को देनी होगी। इसके अलावा वाहन से जुड़े जरूरी दस्तावेजों की भी निगरानी करनी होगी।स्कूल प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों।
चालक का पुलिस सत्यापन और नेत्र परीक्षण भी जरूरी
स्कूल परिवहन सुरक्षा व्यवस्था में चालक की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। समिति को चालक के पुलिस सत्यापन, निर्धारित वर्दी और नेत्र परीक्षण की स्थिति की निगरानी करनी होगी।इसका मतलब है कि अब केवल वाहन की फिटनेस देखना पर्याप्त नहीं होगा। बच्चों को स्कूल लाने और घर पहुंचाने वाले चालक के संबंध में भी निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
लखनऊ में 253 स्कूली वाहन मिले अनफिट
स्कूली वाहनों की सुरक्षा को लेकर लखनऊ में हुई जांच ने भी चिंता बढ़ाई है। परिवहन विभाग की कार्रवाई में 253 स्कूली वाहन अनफिट पाए गए हैं। इसके बाद स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन को लेकर भी कार्रवाई तेज हुई है।प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से पहले भी स्कूलों को समिति गठित करने और इसकी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद कई स्कूलों की ओर से समिति गठन की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।इसी बीच 19 सितंबर को इटौंजा स्थित शार्प ग्लोबल स्कूल की बस में आग लगने की घटना सामने आने के बाद स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल उठे। घटना के बाद वाहनों की जांच की गई और कई स्तरों पर कमियां सामने आईं।
स्कूल वैन के लिए अभिभावकों से समझौते का प्रावधान
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में यह भी आया कि स्कूल वैन के संचालन के लिए नियमों के तहत अभिभावक या अभिभावकों के समूह के साथ समझौता होना आवश्यक है।स्कूल परिवहन व्यवस्था में नियमों के अनुसार वाहन के संचालन, चालक और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का पालन किया जाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है।
2019 में बनाए गए थे नियम
स्कूल परिवहन सुरक्षा समिति के गठन से संबंधित नियम पहले से मौजूद हैं। परिवहन विभाग की ओर से 27 मई 2019 को इस संबंध में व्यवस्था तय की गई थी। इसके बावजूद कई जगह समिति का गठन और नियमित निगरानी प्रभावी रूप से नहीं हो सकी।अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन पर इन नियमों को लागू कराने की जिम्मेदारी और स्पष्ट हो गई है।
सीबीएसई और सीआईएससीई स्कूल भी होंगे दायरे में
विद्यालय परिवहन सुरक्षा से जुड़े निर्देश केवल सरकारी या बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों तक सीमित नहीं हैं। मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों और अन्य बोर्ड से जुड़े स्कूलों में भी बच्चों के परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना होगा।हाईकोर्ट ने मामले में सीबीएसई और सीआईएससीई से जुड़े पक्षों को भी शामिल करने का निर्देश दिया है। इससे अलग-अलग बोर्डों से संबद्ध स्कूलों में परिवहन सुरक्षा नियमों के पालन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है।
अब स्कूलों को इन नियमों का रखना होगा ध्यान
हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्कूलों को परिवहन व्यवस्था की नियमित निगरानी करनी होगी। वाहन की फिटनेस और बीमा से लेकर चालक के पुलिस सत्यापन, वर्दी और नेत्र परीक्षण तक की जानकारी पर नजर रखनी होगी।वहीं जिला स्तर पर समितियों की नियमित बैठक और स्कूल स्तर की समितियों के कामकाज की निगरानी की जाएगी। किसी वाहन में कमी मिलने पर संबंधित विभाग को सूचना देना भी समिति की जिम्मेदारी होगी।स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इन निर्देशों का उद्देश्य विद्यालय आने-जाने के दौरान बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
जरूरी जानकारी
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अदालत | इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ |
| न्यायमूर्ति | आलोक माथुर और बृजराज सिंह |
| स्कूल स्तर पर समिति | विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति |
| जिला स्तर पर समिति | जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति |
| वाहन जांच | फिटनेस और बीमा |
| चालक जांच | पुलिस सत्यापन, वर्दी और नेत्र परीक्षण |
| समिति अध्यक्ष | स्कूल के प्रधानाचार्य |
| नियम | 27 मई 2019 की परिवहन सुरक्षा व्यवस्था |
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