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शुक्रवार, 17 दिसंबर 2021

भारतीय उच्चायोग और एनआईओएस ने त्रिनिदाद टोबैगो के छात्रों के लिए किया ऑनलाइन हिंदी वर्कशॉप का आयोजन



भारतीय उच्चायोग और एनआईओएस ने त्रिनिदाद टोबैगो के छात्रों के लिए किया ऑनलाइन हिंदी वर्कशॉप का आयोजन

भारतीय उच्‍चायोग (पोर्ट ऑफ स्‍पेन, त्रिनिदाद और टोबैगो) ने राष्‍ट्रीय मुक्‍त विद्यालयी शिक्षा संस्‍थान (एनआईओएस) के साथ मिलकर ऑनलाइन हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया। ये कार्यशाला त्रिनिदाद और टोबैगो के हिंदी एवं संस्‍कृत शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए वर्चुअल मोड से आयोजित की गई। कार्यशाला के दौरान इंटरनेट पर उपलब्‍ध फ्री हिंदी शिक्षण सामग्री, प्रौद्योगिकी टूल्‍स और मॉडयूल्स की रोचक और द्विभाषी तरीके से जानकारी दी गई।  

त्रिनिदाद और टोबैगो में भारत के उच्चायुक्त अरुण कुमार साहू इस कार्यशाला में मुख्‍य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस), नोएडा की चेयरपर्सन प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा विशिष्‍ट अतिथि थीं। दोनों अतिथियों ने अपने संबोधन में इस प्रकार की नई पहल का स्‍वागत किया और एक-दूसरे से आग्रह किया कि इस प्रकार की वर्चुअल कार्यशालाएं नियमित रूप से आयोजित की जाएं। विशेष रूप से आमंत्रित अतिथियों और विद्वान वक्ताओं के रूप में प्रो. (डॉ) विनोद कुमार मिश्र (पूर्व महासचिव, विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस और विभाग प्रमुख (हिंदी), त्रिपुरा विश्वविद्यालय) और बालेंदु शर्मा ‘दधीच’ (निदेशक (स्थानीयकरण और सुगम्‍यता), माइक्रोसॉफ्ट, गुरुग्राम) मौजूद रहे। 

कार्यशाला में बालेंदु शर्मा ने बेहद व्‍यावहारिक और रोचक तरीके से बताया कि विंड़ोज़ और एम एस वर्ड के अलग-अलग संस्‍करण में हिंदी सीखने और काम करने के लिए कौन कौन सी सुविधाएं उपलब्‍ध हैं और उन्‍हें इनेबल कर कैसे उनका उपयोग किया जा सकता है। सभी प्रति‍भागियों से आग्रह किया गया था कि उनके जो भी प्रश्‍न हों, चैट बॉक्‍स में लिख दें। अतिथि वक्‍ताओं अथवा आयोजकों द्वारा यथासंभव उनका जवाब दिया जाएगा। बालेंदु शर्मा दधीच ने अपना व्‍यक्तिगत ई-मेल पता भी सभी प्रतिभागियों को उपलब्‍ध कराया और आग्रह किया कि यदि किसी का कोई प्रश्‍न है तो उन्‍हें ई-मेल करें, वे उनका जवाब देंगे।

कार्यशाला का संचालन कर रहे चंचल कुमार सिंह (पीआरओ, एनआईओएस) ने वेबिनार के प्रतिभागियों को शिक्षा मंत्रालय के  MOOC प्लेटफॉर्म  ‘स्‍वयं’ एवं ‘दीक्षा’  पोर्टल जैसे विभिन्‍न ऑनलाइन पोर्टलों के बारे में द्विभाषी रूप में जानकारी दी और बताया कि इन पोर्टल के माध्यम से हिन्दी एवं संस्कृत अध्ययन एवं अध्यापन को और रुचिकर बनाया जा सकता है। कार्यशाला में त्रिनिदाद और टोबैगो के शिक्षक और छात्रों के साथ साथ भारतीय उच्चायोग, पोर्ट ऑफ स्‍पेन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग, नोएडा और इसके क्षेत्रीय केंद्रों के अधिकारियों सहित अन्‍य देशों जैसे मॉरीशस, लंदन, सूरीनाम, लंदन, कनाडा  से भी बड़ी संख्‍या में प्रतिभागियों, शिक्षकों और छात्रों ने भाग लिया। छात्रों और शिक्षकों की मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया कि नए वर्ष की पहली तिमाही में ऐसी ही एक और कार्यशाला आयोजित करने के लिए दोनों संस्‍थान मिलकर प्रयास करेंगे। 


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