जाति आरक्षण के खिलाफ जंतर-मंतर पर नया धरना, जुटी लोगों की भारी भीड़; RAF के साथ पहुंची पुलिस ने लिया ऐक्शन
देश में जारी जाति-आधारित आरक्षण के विरोध में शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा धरना दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग अपना विरोध जताने पहुंचे। हालांकि रात को वहां भारी भीड़ पहुंचने के साथ ही दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स भी पहुंच गई और लोगों को वापस भेजने लगी। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने RAF के साथ मिलकर जंतर-मंतर पर जमा हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और उन्हें बसों में भरकर ले गई। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि, 'हम UGC और SC-ST को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे फिर भी पुलिस ने हमें पकड़ लिया।'सुबह से जारी इस प्रदर्शन में पहुंचे लोगों में ज्यादातर पुरुष ही नजर आए, जिनमें से कुछ ने अपने हाथ में तिरंगा ले रखा था। वहीं कुछ अन्य अपने हाथ में बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लेकर पहुंचे थे। ये प्रदर्शनकारी जातिगत आरक्षण और यूजीसी नियमों के खिलाफ नारेबाजी करते भी नजर आए। दरअसल इस प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस ने शाम 4 बज तक की ही अनुमति दी थी। इसलिए वक्त खत्म होने के कई घंटों बाद वहां पुलिस पहुंची और लोगों को हटाना शुरू कर दिया।
इंस्टाग्राम पेज पर की गई थी अपील
इस प्रदर्शन का आयोजन 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' नाम के एक इंस्टाग्राम पेज पर की गई अपील के बाद किया गया। बाद में इस पेज ने लोगों से शुक्रवार को जंतर-मंतर पर प्रत्यक्ष प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कहा था।
#WATCH | Delhi: Delhi Police, along with the Rapid Action Force, detain protesters gathered at Jantar Mantar.
— ANI (@ANI) August 21, 2026
A large number of people have gathered here to protest against caste-based reservation.
Protestors say, "We were holding a peaceful protest over UGC and SC-ST..." pic.twitter.com/AQHDpNANEr
प्रदर्शन को देखते हुए की गई कड़ी सुरक्षा
इससे पहले पुलिस ने बताया था कि लोगों के भारी जमावड़े को देखते हुए इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रमुख स्थानों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं तथा प्रदर्शन स्थल के आसपास अवरोधक लगाए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने बताई अपनी मांगें
प्रदर्शन में आए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमारी मांग है कि यह तय करते समय कि किसे सरकारी सहायता की जरूरत है, आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। साथ ही जाति की परवाह किए बिना गरीब व्यक्ति को शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए सहायता दी जानी चाहिए।'
मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा चाहते हैं। उनका तर्क था कि आरक्षण का लाभ हमेशा समाज के सबसे वंचित वर्गों तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने कहा, 'हम कई वर्षों से यह मुद्दा उठाते रहे हैं। हमारा कहना है कि सरकार को यह समीक्षा करनी चाहिए कि मौजूदा व्यवस्था अपने निर्धारित उद्देश्य को पूरा कर रही है या नहीं और क्या इसका लाभ जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच रहा है।'
आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग
कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में 'क्रीमी लेयर' का प्रावधान लागू करने की भी मांग की। उन्होंने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित नीतियों में बदलाव की मांग भी की।एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बिना सहायता के छोड़ दिया जाना चाहिए। हमारा कहना है कि सहायता उन लोगों तक पहुंचनी चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। इसमें छात्रवृत्ति, फीस में सहायता और कोचिंग जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।”इस विरोध प्रदर्शन में आए एक युवक ने अपनी मांगे बताते हुए कहा, 'हमारी सबसे बड़ी मांग है कि सरकार एक श्वेत पत्र लाए जिसमें यह बताया जाए कि 80 साल से दिए जा रहे इस आरक्षण से किस जाति को अबतक कितना फायदा हुआ है। क्योंकि इस आरक्षण का फायदा केवल कुछ ही जातियों को मिल रहा है, और SC-ST में भी ऐसे कई जाति समूह हैं, जिन्हें अबतक कोई लाभ नहीं मिला है। रिसर्च करके देखिए कि उनकी हालत कितनी खराब है। उनके बच्चों को आरक्षण नहीं मिल रहा है। क्योंकि उन जाति समूहों के पास नेता ही नहीं हैं। वहीं दूसरी मांग बताते हुए युवक ने कहा हमारी दूसरी मांग 'कोटे के अंदर कोटा' की है, जिस पर सरकार ने यह भी कहा है कि हम इसमें 'क्रीमी लेयर' लागू नहीं करेंगे।
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