अब चाहिए स्थाई समाधान; CBSE OSM पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) व्यवस्था को लेकर एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिली, जहां चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने साफ लहजे में कहा कि सरकार को अब एक स्थाई हल निकालना होगा। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में अदालत ने केंद्र सरकार और सीबीएसई को सोमवार तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया, वहीं सुनवाई की अगली तारीख मंगलवार तय कर दी गई।दरअसल जून महीने में सरकार ने ओएसएम की खामियों की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति गठित की थी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रभावित छात्रों को पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने का एक हफ्ते का मौका दिया गया था, जिसका फायदा उठाकर 1,68,000 छात्रों ने आवेदन किया। लेकिन चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा, "पहले आपने कहा था कि शुरुआती दिक्कतें हैं और एक सदस्यीय आयोग इन पहलुओं को देख रहा है।" यानी अदालत का साफ इशारा था कि अब सिर्फ अस्थायी जुगाड़ से काम नहीं चलेगा, बल्कि एक ऐसा ढांचा चाहिए जो भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां दोबारा न होने दे।
केंद्र की ओर से क्या दिया गया जवाब
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे पर एक नोट पहले ही तैयार किया जा चुका है, मगर उन्होंने खुद अदालत से गुजारिश की कि इसे हलफनामे के तौर पर पेश किया जाना ज्यादा उचित होगा। मेहता ने यह भी कहा कि उनके जेहन में कुछ ऐसा है जिस पर सरकार से चर्चा करनी जरूरी है, इसलिए मामले को सोमवार तक के लिए टाला जाए।याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील राकेश बिंजोला ने अदालत के सामने दलील दी कि 1,68,000 का आंकड़ा हकीकत से कोसों दूर है। उन्होंने कहा कि करीब तीन लाख छात्र कंपार्टमेंट परीक्षाओं में शामिल हुए थे और इनमें से हजारों की जिंदगी और करियर अभी भी दांव पर लगे हैं। बिंजोला ने अदालत से आग्रह किया कि सरकार को पुनर्मूल्यांकन की खिड़की फिर से खोलने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि बहुत से छात्रों को इस मौके की भनक तक नहीं लगी थी।
अदालत में हुई तीखी बहस
इस पर बेंच ने सीधे तुषार मेहता से सवाल दागा, "क्या यह खिड़की एक हफ्ते के लिए फिर से खोली जा सकती है? आपको इस मामले को देखना चाहिए।" जवाब में मेहता ने असमर्थता जताते हुए कहा कि अब कुछ नहीं किया जा सकता, क्योंकि छात्र तय समय सीमा चूक चुके हैं। उन्होंने बताया कि एक हफ्ते की समय सीमा इसलिए तय की गई थी क्योंकि यह दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की शुरुआत से जुड़ी हुई थी, जिन पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।आखिर में बेंच ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह सरकार के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करे और उन तमाम छात्रों की अलग-अलग श्रेणियां बताए जो अब भी योजना से बाहर रह गए हैं। अदालत ने कहा, "आप उन छात्रों की जानकारी दे सकते हैं जो दस्तावेज जमा नहीं कर पाए और जो तकनीकी खाई की वजह से खिड़की के दौरान आवेदन नहीं कर सके।"गौरतलब है कि बिंजोला ने सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में ओएसएम के लिए एक नियामक ढांचा और इसके क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाने की भी मांग की है।
उन्होंने उन छात्रों के लिए न्यूनतम अर्हता अंकों में छूट देने की भी अपील की, जिन्हें प्रोविजनल एडमिशन मिल चुका है या जो प्रवेश परीक्षाएं पास कर चुके हैं, लेकिन मूल्यांकन में गड़बड़ी की वजह से उनके बोर्ड स्कोर पर असर पड़ा। उनका कहना है कि कई छात्रों को अभी तक अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी तक नहीं मिली है।यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब सरकार ने डिजिटल मूल्यांकन में गड़बड़ियों के चलते सीबीएसई चेयरपर्सन राहुल सिंह का तबादला कर दिया और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया। जांच में यह भी सामने आया कि ओएसएम सिस्टम का ठेका कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं से महज 74 दिन पहले Coempt Edu Teck नाम की कंपनी को दिया गया था, वह भी टेंडर प्रक्रिया में कई बार बदलाव करने के बाद।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें