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शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

UGC : क्या बदलेंगे शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव वाले नियम, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- फिर से कर रहे विचार



UGC : क्या बदलेंगे शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव वाले नियम, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- फिर से कर रहे विचार

केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को लेकर बनाए गए यूजीसी के इक्विटी नियमों, 2026 पर दोबारा विचार किया जा रहा है। केंद्र सरकार और यूजीसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इन नियमों पर फिर से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर और समय चाहिए। नए नियमों पर पुनर्विचार किया जा रहा है। आपको बता दें कि ये नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए थे लेकिन इसके कुछ प्रावधानों पर विवाद होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में इस पर अंतरिम रोक लगा दी थी। उस समय कोर्ट ने पहली नजर में माना था कि नियमों में कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनका दुरुपयोग किया जा सकता है।


यूजीसी से चार हफ्ते में हलफनामा मांगा

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने यूजीसी से चार हफ्ते में इस बारे में हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने कहा कि यूजीसी इस हलफनामे को पक्षकारों को भी दे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी। शीर्ष अदालत उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी की ओर से बनाए गए नए नियमों को दी गई चुनौती पर सुनवाई कर रहा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है।


नियम से कुछ वर्गों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा

याचिका में आरोप लगाया है कि इस नियम का 3(C) मनमाना और भेदभावपूर्ण है तथा इससे कुछ वर्गों को उच्च शिक्षा से बाहर किया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि यह प्रावधान संविधान में दिए गए समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह नियम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के खिलाफ है और उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है।रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह (एडवोकेट दिशा वाडेकर की मदद से), जिन्होंने जातिगत भेदभाव का सामना करने के बाद आत्महत्या कर ली थी, ने कहा कि केंद्र के फैसले के लिए एक टाइमलाइन तय की जा सकती है। बेंच ने कहा कि वह आज किसी भी दलील पर विचार नहीं कर रही है, और सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाल दी।

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