UP 69000 Teacher Recruitment: 67,867 शिक्षकों की नौकरी रहेगी सुरक्षित, 6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति कैसे होगी? जानें पूरा मामला
UP 69000 Teacher Recruitment: उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस भर्ती से जुड़े 6800 अभ्यर्थी 29 अगस्त से लखनऊ में आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं, जबकि पहले से नियुक्त 67,867 शिक्षकों की नौकरी को लेकर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अब राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि 2020 में नियुक्त 67,867 शिक्षकों की नौकरी प्रभावित नहीं की जाएगी। साथ ही संशोधित मेरिट सूची में पात्र पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्त करने का रास्ता सुझाया गया है।यह पूरा मामला आरक्षण और मेरिट से जुड़ा हुआ है। 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने के बाद चयन सूची और आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। मामला पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। इसी विवाद के कारण कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला वर्षों से अटका हुआ है।
69 हजार शिक्षक भर्ती में विवाद कहां से शुरू हुआ?
उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए दिसंबर 2018 में विज्ञापन जारी हुआ था और जनवरी 2019 में भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ी और वर्ष 2020 में 67,867 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई।बाद में आरक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के एक समूह ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ। इसी को लेकर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए और मामला अदालत तक पहुंचा।विवाद बढ़ने के बाद 5 जनवरी 2022 को 6800 अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई। हालांकि सूची में नाम आने के बावजूद इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं हो सकी। अब यही अभ्यर्थी एक बार फिर नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं।
67,867 शिक्षकों की नौकरी पर क्या असर पड़ेगा?
मौजूदा शिक्षकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहा है कि अगर भर्ती की मेरिट सूची दोबारा तैयार की गई तो उनकी नौकरी का क्या होगा। इस पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना रुख स्पष्ट किया है।सरकार के अनुसार 2020 में नियुक्त किए गए 67,867 शिक्षकों की सेवाओं को समाप्त नहीं किया जाएगा। अगर संशोधित मेरिट में ऐसे उम्मीदवार सामने आते हैं जो नियुक्ति के योग्य हैं और फिलहाल सेवा में नहीं हैं, तो उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर उन्हें समायोजित करने का रास्ता अपनाया जा सकता है।इस प्रस्ताव का सीधा मतलब यह है कि नए अभ्यर्थियों को जगह देने के लिए पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों को हटाने के बजाय खाली पदों का इस्तेमाल किया जाए। हालांकि यह सरकार की ओर से अदालत के सामने रखा गया प्रस्ताव है। अंतिम व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही तय होगी।
6800 अभ्यर्थी क्यों कर रहे हैं आंदोलन?
5 जनवरी 2022 को जारी 6800 अभ्यर्थियों की सूची इस विवाद का अहम हिस्सा है। सूची में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि पात्र होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी। इसी मांग को लेकर अब 29 अगस्त 2026 से लखनऊ में आंदोलन शुरू करने की तैयारी है।अभ्यर्थियों की मुख्य मांग नियुक्ति के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय से चल रहे विवाद का कोई स्पष्ट समाधान निकलना चाहिए। अभ्यर्थियों के मुताबिक वे सरकार के सामने अपना पक्ष रखकर नियुक्ति का रास्ता साफ कराने की मांग करेंगे।हालांकि आंदोलन की घोषणा का मतलब यह नहीं है कि सभी 6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति तय हो गई है। नियुक्ति का अंतिम निर्णय अदालत की कार्यवाही, संशोधित मेरिट और उपलब्ध पदों के आधार पर ही होगा।
संशोधित मेरिट में क्या बदलेगा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगस्त 2024 में 69 हजार शिक्षक भर्ती की मेरिट सूची को दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया था। फैसले में आरक्षण से जुड़े नियमों के आधार पर नई मेरिट तैयार करने की बात कही गई थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और नई मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर रोक लग गई।अब सुप्रीम कोर्ट में इसी पूरे विवाद पर अंतिम तस्वीर साफ होनी है। यदि अदालत नई मेरिट के आधार पर आगे बढ़ने का रास्ता खोलती है तो विभाग को भर्ती के आंकड़ों और आरक्षण नियमों के आधार पर नई सूची तैयार करनी पड़ सकती है।यही वजह है कि 67,867 पहले से नियुक्त शिक्षकों और संशोधित मेरिट में आने वाले नए अभ्यर्थियों दोनों की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है।
8,270 अभ्यर्थियों का आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण है?
इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 8,270 अभ्यर्थियों से जुड़ा आंकड़ा भी अदालत के सामने रखा गया था। इन अभ्यर्थियों को संभावित संशोधित मेरिट से जोड़कर देखा जा रहा है।विभाग की ओर से अलग-अलग वर्गों के कटऑफ से जुड़े आंकड़े भी पेश किए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अनारक्षित वर्ग का कटऑफ 69.46, अन्य पिछड़ा वर्ग का 65.92, अनुसूचित जाति का 60.14 और अनुसूचित जनजाति का 56.09 बताया गया था।हालांकि 8,270 का आंकड़ा सामने आने का मतलब यह नहीं है कि इन सभी उम्मीदवारों की नियुक्ति पक्की हो गई है। अंतिम रूप से कौन पात्र होगा और कितने लोगों को नियुक्ति मिलेगी, यह अदालत के आदेश और आगे तैयार होने वाली सूची पर निर्भर करेगा।
67,867 शिक्षकों को क्यों मिली राहत?
अगर सरकार का प्रस्ताव अदालत में स्वीकार होता है तो पहले से नियुक्त 67,867 शिक्षकों के लिए यह बड़ी राहत होगी। उन्हें हटाकर नई नियुक्ति करने के बजाय खाली पदों के जरिए संशोधित मेरिट में आने वाले अभ्यर्थियों को समायोजित करने का रास्ता निकाला जा सकता है।यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्षों से सेवा कर रहे शिक्षकों की नौकरी और दूसरी तरफ नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों दोनों के हित इस मामले में जुड़े हैं। सरकार का प्रस्ताव दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।लेकिन यहां यह साफ समझना जरूरी है कि सरकार का प्रस्ताव अंतिम न्यायिक फैसला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले के सभी पक्षों को सुनने के बाद ही अंतिम व्यवस्था तय करेगा।
अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही सबसे महत्वपूर्ण है। अदालत के सामने आरक्षण, मेरिट, पहले से नियुक्त शिक्षकों की सेवा और नए पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति जैसे मुद्दे हैं।अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि नई मेरिट सूची तैयार करने को लेकर क्या व्यवस्था रहेगी और यदि नई सूची बनती है तो पहले से नियुक्त शिक्षकों और नए अभ्यर्थियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।इसी बीच 6800 अभ्यर्थियों का 29 अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन मामले को फिर से चर्चा में ला रहा है। उम्मीदवार चाहते हैं कि सरकार उनके पक्ष को गंभीरता से ले और नियुक्ति के लिए समाधान निकाले।
अभ्यर्थियों और शिक्षकों को अभी क्या समझना चाहिए?
फिलहाल किसी भी पक्ष के लिए अंतिम परिणाम घोषित नहीं हुआ है। 67,867 शिक्षकों की नौकरी को सुरक्षित रखने की बात राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कही है, लेकिन अंतिम आदेश अदालत का होगा। इसी तरह 6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मांग भी अभी पूरी नहीं हुई है।उम्मीदवारों को भर्ती से जुड़े किसी भी नए आदेश, मेरिट सूची या नियुक्ति संबंधी जानकारी के लिए आधिकारिक निर्णय का इंतजार करना चाहिए। सोशल मीडिया पर चल रही संभावित सूची या नियुक्ति की तारीख को अंतिम मानना सही नहीं होगा।69 हजार शिक्षक भर्ती का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके साथ हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य और पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों की सेवा जुड़ी हुई है। सरकार 67,867 शिक्षकों को सुरक्षित रखते हुए संशोधित मेरिट में आने वाले उम्मीदवारों को खाली पदों के जरिए मौका देने का प्रस्ताव रख चुकी है। दूसरी तरफ 6800 अभ्यर्थी 29 अगस्त से आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।अब इस पूरे विवाद की असली दिशा अदालत के अगले फैसले से तय होगी। फिलहाल इतना साफ है कि 67,867 शिक्षकों को हटाकर नई भर्ती करने की सरकार की योजना नहीं है और 6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता रिक्त पदों के जरिए निकालने का प्रस्ताव सामने आया है। अंतिम फैसला अभी बाकी है।
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