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शनिवार, 26 सितंबर 2026

Prayagraj News: मानदेय बढ़ाने की मांग पर सड़क पर उतरीं समूह सखियां, विकास भवन के सामने किया चक्काजाम

 


Prayagraj News: मानदेय बढ़ाने की मांग पर सड़क पर उतरीं समूह सखियां, विकास भवन के सामने किया चक्काजाम

प्रयागराज। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को प्रयागराज में प्रदर्शन किया। जिले के सभी ब्लॉकों से बड़ी संख्या में समूह सखियां कलक्ट्रेट पहुंचीं और पहले परिसर में धरना देकर अपनी मांगें रखीं। महिलाओं की मुख्य मांग समूह संचालिका का मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह करने की रही। इसके साथ स्वास्थ्य सुविधा, स्मार्टफोन और आर्थिक रूप से कमजोर समूह सखियों के लिए 5 लाख रुपये की सहायता की मांग भी उठाई गई।प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात की मांग को लेकर नारेबाजी की। सुरक्षा कारणों से संगम सभागार की ओर जाने वाला गेट बंद था। महिलाओं ने गेट खोलने का प्रयास किया। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एडीएम नजूल का रास्ता भी कुछ समय के लिए रुक गया। अधिकारी बाद में किनारे से निकल गए। अधिकारियों की ओर से महिलाओं को उनकी बात आगे पहुंचाने का भरोसा दिया गया, लेकिन महिलाएं अपनी मांगों को लेकर विकास भवन पहुंच गईं।

विकास भवन के सामने लगाया चक्काजाम

कलक्ट्रेट से निकलने के बाद समूह सखियां विकास भवन पहुंचीं। यहां महिलाओं ने गेट के सामने चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के कारण मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों को महिलाओं से बातचीत करनी पड़ी। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुना और उन्हें शासन स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया।आश्वासन मिलने के बाद महिलाओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। प्रशासन की ओर से यह भरोसा दिया गया कि समूह सखियों की मांगों को संबंधित स्तर पर आगे रखा जाएगा।

2 हजार से 20 हजार रुपये मानदेय करने की मांग

समूह सखियों की सबसे प्रमुख मांग मानदेय बढ़ाने की है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने समूह संचालिका का वर्तमान 2,000 रुपये मानदेय बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी। यानी प्रस्तावित बढ़ोतरी 18,000 रुपये प्रतिमाह की है और मांगी गई राशि मौजूदा मानदेय की तुलना में 10 गुना है।समूह सखियों का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़े काम के अलावा उन्हें विभिन्न गतिविधियों और अभिलेखों से जुड़े कार्य भी करने पड़ते हैं। हाल के दिनों में प्रदेश के दूसरे जिलों में भी समूह सखियों ने मानदेय बढ़ाने और काम के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।

स्मार्टफोन और स्वास्थ्य सुविधा की भी मांग

मानदेय बढ़ाने के साथ प्रदर्शनकारी महिलाओं ने स्मार्टफोन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। समूह सखियों से जुड़े काम में ऑनलाइन गतिविधियों और डिजिटल माध्यम के इस्तेमाल को देखते हुए महिलाओं ने काम के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है।इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधा देने की मांग भी प्रमुख रही। महिलाओं ने आर्थिक रूप से कमजोर समूह सखियों के लिए 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की मांग रखी। इस तरह उनकी मांगें केवल मानदेय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, डिजिटल सुविधा और आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ी हैं।

जिले के सभी ब्लॉकों से पहुंचीं महिलाएं

प्रदर्शन में प्रयागराज जिले के सभी ब्लॉकों से समूह सखियां पहुंची थीं। बड़ी संख्या में महिलाओं के कलक्ट्रेट पहुंचने के बाद परिसर में अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी हुई। महिलाएं जिलाधिकारी से सीधे मुलाकात करना चाहती थीं।प्रशासन की ओर से उन्हें समझाने का प्रयास किया गया कि उनकी मांगों को आगे संबंधित अधिकारियों और शासन तक भेजा जाएगा। इसके बाद भी जब महिलाएं नहीं मानीं तो वे विकास भवन की ओर चली गईं। वहां चक्काजाम के बाद अधिकारियों ने वार्ता के लिए बुलाया।

शासन को भेजी जाएंगी मांगें

वार्ता के दौरान अधिकारियों ने समूह सखियों की मांगों को शासन तक भेजने का आश्वासन दिया। इसके बाद महिलाओं ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह ने कहा कि समूह की महिलाएं अपनी मांग रखने आई थीं। उनकी मुख्य मांग मानदेय बढ़ाने की है, जिसे शासन को भेजा जा रहा है। पहचान पत्र देने की बात भी कही गई थी और इसे स्थानीय स्तर से जारी करने की बात कही गई।

प्रदेश के अन्य जिलों में भी उठ रही मांग

समूह सखियों की मांग केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं है। सितंबर में कौशांबी में भी समूह सखियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर 2,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये मानदेय, स्थायी नियुक्ति, स्वास्थ्य बीमा और स्मार्टफोन जैसी सुविधाओं की मांग की थी। उन्होंने मानदेय सीधे बैंक खाते में भेजने और नियमित भुगतान की मांग भी रखी थी।लखनऊ में भी समूह सखियों ने विकास भवन पहुंचकर 15,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय और यात्रा भत्ता देने की मांग की थी। उन्होंने डिजिटल कार्य के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने की बात भी रखी थी।

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी है बड़ी संख्या में महिलाएं

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर आजीविका और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जाता है। प्रयागराज मंडल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र की 10 से 20 गरीब महिलाओं को संगठित कर स्वयं सहायता समूह बनाए जाते हैं। समूहों को शुरुआती स्तर पर स्टार्टअप फंड और आगे रिवॉल्विंग फंड जैसी सहायता भी दी जाती है।प्रयागराज में हुए प्रदर्शन के बाद फिलहाल महिलाओं को उनकी मांगों को शासन तक भेजने का आश्वासन मिला है। अब समूह सखियों की नजर इस बात पर रहेगी कि मानदेय बढ़ाने, स्वास्थ्य सुविधा, स्मार्टफोन और आर्थिक सहायता से जुड़ी मांगों पर शासन स्तर से क्या फैसला लिया जाता है।

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