उन्नाव में शिक्षक संकुल प्रशिक्षण पर सवाल, निर्धारित समय से पहले प्रशिक्षण खत्म करने का आरोप; निपुण लक्ष्य पर उठी चिंता
उन्नाव में शिक्षक संकुल प्रशिक्षण को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। शिक्षकों की क्षमता विकसित करने और विद्यालयों को निपुण लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण को लेकर आरोप है कि जिले के 17 ब्लॉकों में निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक पूरे दिन प्रशिक्षण नहीं कराया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानों पर शिक्षक संकुलों की उपस्थिति दर्ज कराने के बाद कुछ ही घंटों में प्रशिक्षण समाप्त कर दिया गया। इसको लेकर प्रशिक्षण की गुणवत्ता, शासन की ओर से निर्धारित कार्यक्रम के पालन और प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध कराए गए बजट के इस्तेमाल पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस संबंध में अलग व्यवस्था का हवाला दिया गया है। ऐसे में मामला निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम और वास्तविक प्रशिक्षण अवधि के बीच अंतर को लेकर चर्चा में है।
शासनादेश में तय था प्रशिक्षण का विस्तृत कार्यक्रम
रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षक संकुल जनपदीय कार्यशाला के लिए शासन स्तर से विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। इसके तहत सुबह 9 बजे से 9:30 बजे तक प्रतिभागियों का पंजीकरण किया जाना था। इसके बाद 9:30 से 9:45 बजे तक स्टेट रिसोर्स ग्रुप यानी एसआरजी के मोटिवेशनल वीडियो का सत्र प्रस्तावित था। सुबह 9:45 से 10:15 बजे तक निपुण मिशन से जुड़ा शैक्षिक सत्र और 10:15 से 10:30 बजे तक उच्चाधिकारियों के प्रेरक सत्र का कार्यक्रम बताया गया। इसके बाद भी अलग-अलग विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों की ओर से विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाना निर्धारित था। प्रशिक्षण कार्यक्रम में एसआरजी, उत्कृष्ट शिक्षक संकुल, जिला समन्वयक गुणवत्ता, जिला समन्वयक एमआईएस और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े विषयों को शामिल किया गया था।
प्रशिक्षण की अवधि को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ स्थानों पर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण संचालित नहीं हुआ। आरोप है कि शिक्षक संकुलों की उपस्थिति दर्ज कराने के बाद प्रशिक्षण को कुछ घंटे में ही समाप्त कर दिया गया। इससे सवाल उठ रहा है कि जब प्रशिक्षण के लिए कई विषय और अलग-अलग सत्र निर्धारित किए गए थे तो उन्हें कम समय में किस तरह पूरा किया गया। प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों को निपुण मिशन, शैक्षिक गतिविधियों और विद्यालय स्तर पर शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने से संबंधित जानकारी दी जानी थी। ऐसे में निर्धारित सत्रों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलने पर प्रशिक्षण के वास्तविक उद्देश्य को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
874 के मुकाबले 567 शिक्षक संकुलों की उपस्थिति
रिपोर्ट में एक शिक्षक संकुल बैठक के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कुल 874 शिक्षक संकुलों के सापेक्ष 567 की उपस्थिति दर्ज होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ ब्लॉकों में प्रशिक्षण के लिए पहुंचे शिक्षक संकुलों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया और कम समय में प्रशिक्षण पूरा कराया गया। इसी व्यवस्था को लेकर प्रशिक्षण की निर्धारित समय-सारिणी और वास्तविक संचालन के बीच अंतर की चर्चा हो रही है। हालांकि उपस्थिति के इन आंकड़ों का अंतिम अर्थ और प्रशिक्षण व्यवस्था की स्थिति संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड और स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट होगी।
बजट के उपयोग पर भी उठे सवाल
शिक्षक प्रशिक्षण के लिए शासन की ओर से बजट उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में यदि किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम को निर्धारित अवधि और सत्रों के अनुसार संचालित नहीं किया जाता है तो प्रशिक्षण की गुणवत्ता के साथ-साथ बजट के उपयोग को लेकर भी सवाल उठते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक शिफ्ट में दो सौ से अधिक शिक्षकों की उपस्थिति और हस्ताक्षर लिए गए तथा प्रशिक्षण में पहुंचे शिक्षकों को निर्धारित व्यवस्था के तहत हस्ताक्षर कराकर रवाना कर दिया गया। यदि ऐसा हुआ है तो प्रशिक्षण की वास्तविक अवधि और उसमें कराए गए विषयों का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि बजट के दुरुपयोग या किसी वित्तीय अनियमितता का निष्कर्ष केवल प्रशिक्षण की अवधि से निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए विभागीय रिकॉर्ड और जांच की जरूरत होगी।
अधिकारियों ने बताई अलग व्यवस्था
मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अलग पक्ष भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार डायट उप प्राचार्य या संबंधित अधिकारियों की ओर से कहा गया कि पूरे दिन प्रशिक्षण कराया जाना अनिवार्य नहीं था और आवश्यकता के अनुसार कुछ घंटे का समय निर्धारित किया गया था। यानी अधिकारियों का पक्ष यह है कि प्रशिक्षण को स्थानीय आवश्यकता और व्यवस्था के अनुसार संचालित किया गया। दूसरी ओर, रिपोर्ट में शासन स्तर से निर्धारित कार्यक्रम और वास्तविक प्रशिक्षण अवधि के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि संबंधित प्रशिक्षण के लिए जारी आधिकारिक निर्देशों में समय और सत्रों को अनिवार्य रूप से किस प्रकार निर्धारित किया गया था।
निपुण लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रशिक्षण क्यों जरूरी?
शिक्षक संकुल प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज कराना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बेहतर शैक्षिक गतिविधियों, निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों और विद्यालय स्तर पर प्रभावी शिक्षण के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षण में शिक्षकों को ऐसी गतिविधियों और तरीकों की जानकारी दी जाती है, जिन्हें बाद में विद्यालयों में लागू किया जाना होता है। इसलिए प्रशिक्षण के प्रत्येक सत्र के लिए पर्याप्त समय मिलना महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसी प्रशिक्षण में निर्धारित विषयों को विस्तार से समझाने के बजाय केवल औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाती है, तो उसका असर प्रशिक्षण के परिणामों पर पड़ सकता है। फिलहाल उन्नाव में उठे सवालों का अंतिम जवाब विभागीय रिकॉर्ड, अधिकारियों के स्पष्टीकरण और यदि कोई जांच होती है तो उसके निष्कर्ष से ही सामने आएगा।
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