UP Principal Recruitment 2026: 2647 पदों की भर्ती से पहले नए नियमों पर शिक्षक संघों की आपत्ति, 50% अंक और बीएड पर उठी मांग
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती की तैयारी के बीच नई अर्हता को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। सोमवार को माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा निदेशालय में उप शिक्षा निदेशक चंद्र प्रकाश को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। वहीं माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट ने भी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग पहुंचकर संशोधित अर्हताओं पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। दोनों संगठनों ने परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता खत्म करने और बीएड के संबंध में राहत देने की मांग की है।
13 साल बाद प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापक भर्ती की तैयारी
सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर लंबे समय बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को 2,647 रिक्त पदों का अधियाचन मिल चुका है। इनमें 1,475 प्रधानाचार्य और 1,172 प्रधानाध्यापक के पद शामिल हैं। जुलाई में इन रिक्तियों का विवरण आयोग के पोर्टल पर अपलोड किए जाने की जानकारी दी गई थी।शिक्षक संगठनों का कहना है कि करीब 13 वर्ष बाद संस्था प्रधान के पदों पर भर्ती की तैयारी हो रही है। ऐसे में लंबे समय से सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की अर्हता को लेकर किए गए बदलाव को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई है।
3 सितंबर को बदले गए अर्हता के नियम
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 3 सितंबर 2026 को प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक पदों की अर्हता में संशोधन किया था। संशोधित नियमों के अनुसार दोनों पदों के लिए स्नातकोत्तर में कम से कम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं।प्रधानाचार्य पद के लिए एनसीटीई से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम से बीएड भी जरूरी किया गया है। इसके साथ ही कक्षा नौ से 12 तक प्रवक्ता या सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार वर्ष का शिक्षण अनुभव जैसी शर्तें भी रखी गई हैं। न्यूनतम आयु 30 वर्ष की शर्त भी पूर्ववत रखी गई है।प्रधानाध्यापक पद के लिए स्नातकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक के साथ बीएड और बीपीएड की अर्हता निर्धारित की गई है।
50 प्रतिशत अंक की शर्त हटाने की मांग
माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट ने नई अर्हता में स्नातकोत्तर के 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता को हटाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पहले से कार्यरत ऐसे शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जो वर्षों से सेवा दे रहे हैं लेकिन संशोधित अर्हता पूरी नहीं करते।प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले अर्हता में बदलाव से बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षक परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो सकते हैं। संगठन ने सरकार से संशोधित नियमों पर दोबारा विचार करने की मांग की है।
बीएड की अनिवार्यता पर भी शिक्षक संघों की आपत्ति
शिक्षक संगठनों की दूसरी प्रमुख मांग बीएड को लेकर है। संघों ने कहा है कि जो प्रवक्ता और सहायक अध्यापक पहले से नियमानुसार विद्यालयों में नियुक्त हैं, उन्हें उनके अनुभव के आधार पर बीएड प्रशिक्षण की अनिवार्यता से छूट दी जानी चाहिए।इसके साथ ही एलटी समेत बीएड के समकक्ष प्रशिक्षण को भी संस्था प्रधान पद की अर्हता में स्वीकार करने की मांग की गई है। शिक्षक संगठनों का तर्क है कि लंबे समय से विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के अनुभव को भी अर्हता तय करते समय महत्व दिया जाना चाहिए।
एनसीटीई की गाइडलाइन पर शिक्षक संघ ने उठाया सवाल
शिक्षक संगठन की ओर से यह भी दावा किया गया है कि नए नियमों के पीछे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की गाइडलाइन का तर्क दिया जा रहा है। संघ का कहना है कि प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक पदों के लिए एनसीटीई ने ऐसी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है।यह शिक्षक संगठन की ओर से उठाया गया दावा है। अर्हता की अंतिम वैधानिक स्थिति संबंधित शासनादेश, सेवा नियम और भर्ती के आधिकारिक विज्ञापन में स्पष्ट होगी।
चयन आयोग में भी पहुंचा मामला
माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश संरक्षक डॉ. हरि प्रकाश यादव की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के उपसचिव और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. संजय कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा।प्रतिनिधिमंडल ने भी स्नातकोत्तर में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता समाप्त करने और बीएड के साथ एलटी तथा अन्य समकक्ष प्रशिक्षित डिग्रियों को मान्यता देने की मांग की। इससे पहले ठकुराई गुट ने शिक्षा निदेशालय में ज्ञापन देकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
2647 पदों का पूरा आंकड़ा
प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक भर्ती को लेकर उपलब्ध अधियाचन के अनुसार पदों का विवरण इस प्रकार है:
| पद | रिक्तियां |
|---|---|
| प्रधानाचार्य | 1,475 |
| प्रधानाध्यापक | 1,172 |
| कुल | 2,647 |
इन पदों के अलावा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में टीजीटी, पीजीटी और संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के पद भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल हैं। अलग से भेजे गए अधियाचन में 17,740 टीजीटी, 2,615 प्रवक्ता और 897 सहायक अध्यापक के पद शामिल बताए गए हैं। इन्हें प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के 2,647 पदों के साथ जोड़ने पर सहायता प्राप्त विद्यालयों में कुल 23,899 पदों की भर्ती का आंकड़ा बनता है।
अब विज्ञापन का इंतजार
प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक भर्ती के लिए आयोग को रिक्तियों का विवरण मिल चुका है। आयोग की ओर से इन पदों के लिए लिखित परीक्षा का पाठ्यक्रम भी पहले जारी किया जा चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लिखित परीक्षा में 120 प्रश्न रखे गए हैं।सितंबर में अर्हता में संशोधन के बाद अब शिक्षक संगठनों की ओर से लगातार आपत्ति दर्ज कराई जा रही है। ऐसे में अभ्यर्थियों की नजर भर्ती विज्ञापन पर है। विज्ञापन जारी होने पर ही आवेदन की अंतिम अर्हता, प्रमाणपत्रों की शर्त और अन्य नियमों की स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आएगी।ठकुराई गुट ने मांगों पर एक सप्ताह में सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर प्रदेश स्तर पर धरना देने की चेतावनी दी है। फिलहाल मामला शासन और चयन आयोग के स्तर पर शिक्षक संगठनों की आपत्तियों और संशोधित अर्हताओं के बीच आगे बढ़ रहा है।
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