मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में युवाओं को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी ने इस हलचल को और बढ़ा दिया। सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संवाद में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंचे। कार्यक्रम स्थल भर जाने के बाद कई छात्रों को बाहर लौटना पड़ा। मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष को सुनने पहुंचे इन छात्रों में उत्साह तो था, लेकिन बाहर लौटने वाले छात्रों की मायूसी ने यह भी दिखाया कि युवाओं के बीच राजनीतिक संवाद को लेकर उत्सुकता जरूर है।नितिन नवीन ने युवाओं से संवाद करते हुए उन्हें देश की वर्तमान ताकत बताया और नशे तथा शॉर्टकट से दूर रहने की अपील की। उन्होंने युवाओं से अनुशासन और निरंतरता के साथ आगे बढ़ने की बात कही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मेरठ के कार्यक्रम में युवाओं को लेकर अपनी सरकार की योजनाओं और रोजगार से जुड़े विषयों पर बात की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में नौ लाख नौकरियां दी जा चुकी हैं और अगले छह महीने में एक लाख और रोजगार देने की बात कही। यह मुख्यमंत्री का कार्यक्रम में किया गया दावा है।लेकिन इन राजनीतिक बयानों और मंच से होने वाली घोषणाओं के बीच मेरठ के कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं की चिंता कुछ अलग है।
उनसे बातचीत में सबसे ज्यादा चर्चा पढ़ाई के खर्च, रोजगार के अवसर और घर के आसपास बेहतर शिक्षा मिलने को लेकर सामने आई। छात्राओं का कहना है कि राजनीतिक दल युवाओं के बीच संवाद करते हैं तो यह अच्छी बात है, क्योंकि कम से कम छात्रों की समस्याएं सार्वजनिक मंच तक पहुंचती हैं। लेकिन समस्या बताने के बाद उसका समाधान कब होगा, यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है।छात्राओं का कहना है कि आज उच्च शिक्षा हासिल करना पहले के मुकाबले आसान नहीं रह गया है। कॉलेज की फीस के अलावा किताबें, परीक्षा शुल्क, आने-जाने का खर्च, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और कई पाठ्यक्रमों में अतिरिक्त प्रशिक्षण का खर्च परिवारों पर पड़ता है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह खर्च कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में छात्र यह चाहते हैं कि उन्हें पढ़ाई के बाद रोजगार की स्पष्ट संभावना दिखाई दे।
उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा लेने वाली छात्राओं की संख्या का आंकड़ा भी इस बदलाव की तस्वीर दिखाता है। 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 7,984 कॉलेजों में कुल 53,28,969 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। इनमें 28,75,211 छात्राएं और 24,53,758 छात्र थे। यानी छात्राओं की संख्या छात्रों से 4,21,453 अधिक थी। एक साल पहले 2023-24 में कुल पंजीकरण 54,76,441 था। इसका मतलब यह भी है कि 2024-25 में कुल विद्यार्थियों की संख्या पिछले सत्र के मुकाबले 1,47,472 कम रही।इन आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर प्रदेश की लड़कियां बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रही हैं। लेकिन पढ़ाई के बाद रोजगार का सवाल अभी भी उनके सामने खड़ा है। छात्राओं का कहना है कि परिवार पढ़ाई पर कई साल और बड़ी रकम खर्च करता है। ऐसे में डिग्री हासिल करने के बाद नौकरी या स्वरोजगार का रास्ता नहीं खुलता तो पूरी मेहनत अधूरी लगती है।
रोजगार के आंकड़ों में भी युवाओं की स्थिति अलग से देखने की जरूरत है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 2025 में उत्तर प्रदेश की सामान्य बेरोजगारी दर 2.7 प्रतिशत थी। वहीं जुलाई-सितंबर 2025 की तिमाही में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लिए उत्तर प्रदेश में वर्तमान साप्ताहिक स्थिति के आधार पर बेरोजगारी दर 16.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी। ग्रामीण क्षेत्र में यह 15.9 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 21.4 प्रतिशत थी।यही आंकड़ा बताता है कि युवाओं के रोजगार का सवाल सामान्य बेरोजगारी दर से अलग है। कॉलेज से निकलने वाले युवाओं के लिए नौकरी की तलाश, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और कौशल के मुताबिक अवसर मिलना बड़ी चुनौती है। खासकर शहरों में पढ़ने वाले युवाओं के लिए डिग्री के साथ रोजगार योग्य कौशल हासिल करना भी जरूरी हो गया है।
मेरठ की छात्राओं की बातचीत में दूसरा बड़ा मुद्दा यह सामने आया कि अच्छे पाठ्यक्रम और बेहतर शिक्षा हर जिले में उपलब्ध होनी चाहिए। छात्राओं का कहना है कि कई ऐसे पाठ्यक्रम हैं, जिनकी पढ़ाई के लिए उन्हें मेरठ से बाहर जाना पड़ता है। किसी को दिल्ली जाना पड़ता है तो किसी को नोएडा, लखनऊ या दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।घर से दूर पढ़ाई का मतलब सिर्फ फीस बढ़ना नहीं है। छात्रावास, किराया, भोजन, आने-जाने और दूसरी जरूरतों का खर्च भी जुड़ जाता है। छात्राओं के लिए परिवार की चिंता और सुरक्षा का सवाल भी अलग से रहता है। अगर जिले में ही अच्छे महाविद्यालय, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, व्यावसायिक पाठ्यक्रम और रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण उपलब्ध हों तो काफी संख्या में छात्राओं को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मेरठ में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्रों का कार्यक्रम स्थल तक पहुंचना भी युवाओं की राजनीतिक गतिविधियों में दिलचस्पी को दिखाता है। कार्यक्रम स्थल भर जाने के कारण कुछ छात्रों को बाहर जाना पड़ा। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नितिन नवीन को सुनने पहुंचे थे, लेकिन जगह नहीं मिलने के कारण उन्हें लौटना पड़ा।नितिन नवीन का यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश दौरा संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया गया है। उनके दो दिवसीय दौरे में मेरठ के बाद सहारनपुर में भी संगठनात्मक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने की चर्चा के बीच युवाओं से संवाद को राजनीतिक गतिविधियों का अहम हिस्सा बनाया गया है।
वहीं छात्रों के लिए राजनीतिक कार्यक्रम की अहमियत इस बात से तय होती है कि उनके मुद्दों पर कितनी गंभीरता से चर्चा होती है। छात्राओं का कहना है कि मंच पर युवाओं की बात होना जरूरी है, लेकिन उसके बाद जमीन पर बदलाव भी दिखाई देना चाहिए। फीस कम हो, अच्छे पाठ्यक्रम नजदीक मिलें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर सुविधाएं हों और पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के अवसर बढ़ें, यही उनकी प्राथमिकता है।दरअसल, उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ है, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या और रोजगार के बीच तालमेल का सवाल अभी भी बना हुआ है। 2023-24 से 2024-25 के बीच प्रदेश में निजी कॉलेजों की संख्या 7,924 से बढ़कर 7,984 हुई और निजी विश्वविद्यालयों की संख्या 38 से बढ़कर 47 हो गई। इसके बावजूद उच्च शिक्षा में कुल विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट दर्ज हुई।
यह आंकड़ा शिक्षा की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी उपयोगिता और विद्यार्थियों की पसंद पर भी सवाल खड़े करता है।मेरठ की छात्राओं की बातों में किसी एक राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से ज्यादा अपने भविष्य की चिंता दिखाई देती है। उनका कहना है कि चुनाव के समय युवाओं की बातें हर तरफ सुनाई देती हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने कितने अवसर होते हैं। डिग्री लेने के बाद नौकरी के लिए दूसरे शहरों की दौड़ न लगानी पड़े और परिवार को शिक्षा के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च न करना पड़े, यही उनकी मांग है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में युवाओं के बीच राजनीतिक संवाद और तेज होने की संभावना है।
नेता मंच से युवाओं के भविष्य की बात करेंगे, छात्र उनसे सवाल भी पूछेंगे। लेकिन मेरठ के कॉलेजों से निकल रही आवाज का सार यही है कि युवाओं को केवल कार्यक्रमों में बुलाकर उनकी बात सुनना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहिए, जहां अच्छे पाठ्यक्रम उनके आसपास मिलें, फीस परिवार की पहुंच में रहे और पढ़ाई पूरी होने के बाद रोजगार का रास्ता भी दिखाई दे। युवाओं के बीच राजनीतिक संवाद कितना असर पैदा करता है, इसका जवाब आने वाले समय में केवल मंचों पर नहीं, बल्कि कॉलेज परिसरों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के बीच दिखाई देगा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें