UP 69000 Teacher Recruitment: 6800 अभ्यर्थी फिर करेंगे आंदोलन, 29 अगस्त से लखनऊ में धरना; नियुक्ति की मांग तेज
उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। भर्ती में शामिल 6800 अभ्यर्थियों ने 29 अगस्त 2026 से लखनऊ में धरना देने का फैसला किया है। ये अभ्यर्थी 5 जनवरी 2022 को जारी 6800 पात्र अभ्यर्थियों की सूची के आधार पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से मामला अदालत में चल रहा है और अब सरकार को उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग भी रखी है।69 हजार शिक्षक भर्ती का मामला कई वर्षों से आरक्षण और मेरिट को लेकर विवादों में रहा है। 5 जनवरी 2022 को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से 6800 अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई थी। सूची जारी होने के बाद भी इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी। अब एक बार फिर इन उम्मीदवारों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि वे वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं और अब इस मामले का समाधान चाहते हैं।
29 अगस्त से लखनऊ में धरना
अभ्यर्थियों के अनुसार 29 अगस्त से लखनऊ में धरना शुरू किया जाएगा। आंदोलन में 6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग प्रमुख रहेगी। उम्मीदवारों का कहना है कि वे सरकार के सामने अपनी स्थिति और मांगों को रखना चाहते हैं ताकि इस लंबे विवाद का कोई रास्ता निकले।यह आंदोलन ऐसे समय में होने जा रहा है जब 69 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़ा मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और उनकी मांग के बावजूद नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय अदालत की कार्यवाही और सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगा।
6800 अभ्यर्थियों की सूची का क्या है मामला?
69 हजार शिक्षक भर्ती के दौरान आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया था। इसके बाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने मेरिट और आरक्षण के नियमों के सही अनुपालन की मांग उठाई। इसी क्रम में 5 जनवरी 2022 को 6800 अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई थी।अभ्यर्थियों का कहना है कि सूची जारी होने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसी वजह से वे लगातार सरकार और न्यायालय के सामने अपनी मांग रखते रहे हैं। अब 29 अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन को भी इसी पुराने विवाद की अगली कड़ी माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई
69 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़ा विवाद हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। मामले में आरक्षण, मेरिट और पहले से नियुक्त शिक्षकों की स्थिति जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया है।जुलाई में सरकार ने अदालत के सामने कहा था कि 2020 में भर्ती किए गए 67,867 शिक्षकों की नौकरी पर कोई खतरा नहीं होगा। सरकार के मुताबिक यदि नई मेरिट सूची तैयार होती है और उसमें नए उम्मीदवार पात्र पाए जाते हैं तो खाली पदों पर नियुक्ति का रास्ता निकाला जा सकता है।इस स्थिति में 6800 अभ्यर्थियों की मांग को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि मामला केवल नई नियुक्ति का नहीं है। इसमें पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी, आरक्षण के आधार पर मेरिट तैयार करने और संभावित खाली पदों पर नियुक्ति जैसे कई पहलू जुड़े हैं।
पहले भी लंबे समय तक चला आंदोलन
6800 अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले भी इस मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन और धरने होते रहे हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार आरक्षण से जुड़े मामले को लेकर उन्होंने लंबे समय तक आंदोलन किया था और बाद में मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ा।अब 29 अगस्त से एक बार फिर लखनऊ में धरने की तैयारी है। अभ्यर्थियों की कोशिश है कि सरकार उनके प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करे और नियुक्ति के रास्ते पर कोई स्पष्ट फैसला सामने आए।
67,867 शिक्षकों की नौकरी पर क्या असर पड़ेगा?
यह सवाल इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि 2020 में नियुक्त किए गए 67,867 शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रहेगी। यानी नई मेरिट सूची बनने की स्थिति में भी पहले से कार्यरत शिक्षकों को हटाने की बात सरकार की ओर से नहीं कही गई है।अगर अदालत के निर्देश के अनुसार आगे कोई नई मेरिट सूची तैयार होती है तो पात्र पाए जाने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति खाली पदों के आधार पर करने का रास्ता तलाशा जा सकता है। हालांकि अंतिम व्यवस्था अदालत के आदेश और आगे की प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
अब 6800 अभ्यर्थियों की नजर किस पर?
6800 अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और राज्य सरकार का अगला कदम है। 29 अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन के जरिए उम्मीदवार सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना चाहते हैं। वे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर नियुक्ति को लेकर समाधान की मांग करेंगे।अभी यह कहना सही नहीं होगा कि 6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति तय हो गई है। न ही आंदोलन की घोषणा को नियुक्ति आदेश के रूप में देखा जा सकता है। फिलहाल स्थिति यह है कि अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग को लेकर फिर आंदोलन करने जा रहे हैं और भर्ती से जुड़ा मूल विवाद अदालत में विचाराधीन है।69 हजार शिक्षक भर्ती का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ-साथ पहले से नियुक्त शिक्षकों की स्थिति पर भी पड़ सकता है। अब 29 अगस्त से शुरू होने वाला आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही यह तय करेगी कि इस लंबे विवाद में आगे क्या रास्ता निकलता है।
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