UP E-Challan 2.0: यूपी में पुराना ई-चालान सिस्टम बंद, अब ऑनलाइन चुनौती की सुविधा; 45 दिन में शिकायत, 30 दिन में फैसला
उत्तर प्रदेश में वाहन चालकों के लिए ई-चालान व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। प्रदेश में पुरानी ई-चालान प्रणाली को बुधवार रात से बंद कर दिया गया है और अब चालान की नई व्यवस्था लागू की जा रही है। यातायात निदेशालय ने सभी जिलों को नई प्रणाली को लेकर निर्देश जारी किए हैं। पुरानी व्यवस्था में लंबित चालानों और जरूरी अभिलेखों को नई प्रणाली में स्थानांतरित किया जा रहा है। इस दौरान न्यायालय और लोक अदालत से संबंधित रसीदों तथा निस्तारित मामलों का विवरण भी नई व्यवस्था में दर्ज किया जा रहा है, ताकि पहले से मौजूद चालानों के निस्तारण में किसी तरह की परेशानी न आए। अमर उजाला की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक पुरानी प्रणाली से अब कोई नया ई-चालान जारी नहीं किया जाएगा।
अब नेक्स्ट जेन ई-चालान 2.0 से होगी कार्रवाई
नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश में चालान जारी करने और उसके निस्तारण की प्रक्रिया को नए डिजिटल तंत्र से जोड़ा जा रहा है। एनआईसी की ओर से नेक्स्ट जेन ई-चालान एप को अपडेट किया गया है। फिलहाल पुराने चालानों से जुड़े आंकड़ों को नई प्रणाली में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। अमर उजाला के मुताबिक नई व्यवस्था बुधवार आधी रात से लाइव कर दी गई है और इसके साथ वाहन मालिकों को गलत चालान के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत करने की सुविधा भी उपलब्ध हो गई है।
गलत चालान होने पर घर बैठे कर सकेंगे शिकायत
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव गलत चालान को चुनौती देने की सुविधा है। यदि किसी वाहन मालिक को लगता है कि उसके वाहन का चालान गलत तरीके से काटा गया है तो उसे संबंधित कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। वह ऑनलाइन माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेगा। इसके लिए चालान जारी होने की तारीख से 45 दिन की समयसीमा निर्धारित की गई है। शिकायत दर्ज करने के लिए नए ई-चालान तंत्र में सुविधा उपलब्ध कराई गई है।इस व्यवस्था की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही थी क्योंकि वाहन मालिकों की ओर से गलत चालान को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ मामलों में वाहन घर पर खड़ा होने के बावजूद किसी दूसरे स्थान का चालान दर्ज होने, किसी दूसरे वाहन के नंबर पर चालान कटने या चार पहिया वाहन का चालान दोपहिया वाहन के नंबर पर दर्ज होने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। नई व्यवस्था में ऐसी आपत्तियों को ऑनलाइन दर्ज करने का रास्ता दिया गया है।
30 दिन में करना होगा शिकायत का निस्तारण
नई व्यवस्था में शिकायत दर्ज कराने के साथ उसके निस्तारण की समयसीमा भी तय की गई है। ऑनलाइन चुनौती मिलने के बाद शिकायत निस्तारण अधिकारी यानी ग्रेविएंस रिड्रेसल अफसर को 30 दिन के भीतर मामले की जांच करके निर्णय देना होगा। अगर जांच में चालान गलत पाया जाता है तो उसे समाप्त किया जा सकता है। वहीं चालान सही पाए जाने पर वाहन मालिक को निर्धारित जुर्माना जमा करना होगा।सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि निर्धारित समय में शिकायत पर फैसला नहीं होने की स्थिति में चालान स्वत: समाप्त माना जा सकता है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार नई व्यवस्था में 30 दिन के भीतर शिकायत का निस्तारण नहीं होने पर चालान स्वत: समाप्त होने का प्रावधान है।
चालान सही निकला तो भुगतान के लिए मिलेगा समय
अगर शिकायत की जांच के बाद अधिकारी चालान को सही ठहराता है तो वाहन मालिक को जुर्माना जमा करने के लिए निर्धारित समय दिया जाएगा। अमर उजाला के अनुसार चालान जारी होने से कुल 120 दिन यानी करीब चार महीने की अवधि में भुगतान करना होगा। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर वाहन से जुड़े कुछ परिवहन विभागीय कार्यों पर रोक लग सकती है। इनमें वाहन की फिटनेस, स्थानांतरण और नवीनीकरण जैसे काम शामिल हो सकते हैं।वहीं केंद्र सरकार की संशोधित चालान व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि यदि किसी व्यक्ति की शिकायत खारिज हो जाती है और वह मामले को न्यायालय में ले जाना चाहता है तो निर्धारित परिस्थितियों में चालान की 50 प्रतिशत राशि जमा करने की आवश्यकता हो सकती है। यह प्रावधान मोटर वाहन नियमों में किए गए बदलावों से जुड़ा है।
पुराने चालानों के डेटा का हो रहा स्थानांतरण
नई व्यवस्था लागू करने से पहले पुराने ई-चालानों का डेटा भी स्थानांतरित किया जा रहा है। न्यायालय और लोक अदालत से संबंधित रसीदों तथा निस्तारित मामलों की जानकारी को भी नई प्रणाली में दर्ज किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि पहले से दर्ज चालानों के भुगतान और निस्तारण की प्रक्रिया में रिकॉर्ड से जुड़ी समस्या पैदा न हो। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार डेटा माइग्रेशन के दौरान पुराने चालानों की जानकारी और भुगतान व्यवस्था कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है।
वाहन मालिकों के लिए क्या बदला
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि गलत चालान के खिलाफ शिकायत करने के लिए कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी। अब ऑनलाइन माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई जा सकेगी। इसके लिए 45 दिन की समयसीमा का ध्यान रखना जरूरी होगा। शिकायत दर्ज होने के बाद अधिकारी को 30 दिन में उसका निस्तारण करना होगा। अगर चालान सही पाया जाता है तो निर्धारित अवधि में जुर्माना जमा करना होगा और न्यायालय जाने की स्थिति में लागू नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनानी होगी।नई ई-चालान व्यवस्था का उद्देश्य चालान जारी करने से लेकर शिकायत, जांच, भुगतान और निस्तारण तक की प्रक्रिया को एक डिजिटल व्यवस्था में लाना है। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए जरूरी है कि वे अपने मोबाइल नंबर और वाहन से जुड़े विवरण सही रखें तथा चालान आने पर उसकी जानकारी समय पर जांच लें। खास तौर पर गलत चालान की स्थिति में 45 दिन की समयसीमा समाप्त होने से पहले ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करना महत्वपूर्ण होगा।
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