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बुधवार, 23 सितंबर 2026

UP Teacher Transfer 2026: 6 हजार शिक्षकों के तबादले पर ब्रेक, हाईकोर्ट केस में फंसी सूची म्युचुअल ट्रांसफर भी रुका

 


UP Teacher Transfer 2026: 6 हजार शिक्षकों के तबादले पर ब्रेक, हाईकोर्ट केस में फंसी सूची म्युचुअल ट्रांसफर भी रुका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात हजारों शिक्षकों के तबादले का इंतजार और लंबा हो गया है। बेसिक शिक्षा परिषद ने फिलहाल सभी तरह के स्थानांतरण पर रोक लगा रखी है। सबसे ज्यादा चिंता उन करीब छह हजार शिक्षकों की है, जिन्होंने विशेष परिस्थितियों के आधार पर अंतरजनपदीय तबादले के लिए आवेदन किया था। आवेदन प्रक्रिया पूरी हुए कई महीने गुजर चुके हैं, लेकिन 23 सितंबर तक अंतिम सूची जारी नहीं हो सकी है।

जून में शुरू हुई थी तबादला प्रक्रिया

परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय तबादले की प्रक्रिया जून में शुरू की गई थी। शिक्षकों को अपने जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन देना था और सत्यापन के बाद संबंधित जानकारी परिषद को भेजी जानी थी। इसमें स्वयं या अविवाहित पुत्र-पुत्री की दिव्यांगता समेत निर्धारित विशेष परिस्थितियों को आधार बनाया गया था।शुरुआती दौर में विशेष श्रेणी के करीब सात हजार आवेदन आने की बात सामने आई थी। इनमें शिक्षक दंपती, दिव्यांग, कैंसर से पीड़ित और डायलिसिस करा रहे शिक्षकों के आवेदन भी शामिल थे। दस्तावेजों की जांच के दौरान कई प्रमाणपत्र स्पष्ट न होने के कारण बेसिक शिक्षा अधिकारियों से उनकी प्रमाणित प्रतियां दोबारा मांगी गई थीं। सितंबर तक करीब छह हजार पात्र आवेदकों की सूची का इंतजार बना हुआ है।

हाईकोर्ट के इस केस की वजह से अटकी सूची

तबादला सूची जारी नहीं होने के पीछे हाईकोर्ट में चल रहा मामला महत्वपूर्ण कारण बन गया है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी के मुताबिक सौरभ सिंह से जुड़े मामले की वजह से फिलहाल तबादला सूची जारी नहीं हो पा रही है। म्युचुअल ट्रांसफर को लेकर भी अभी कोई नया आदेश नहीं है।इस मामले की पृष्ठभूमि सरप्लस शिक्षकों के पुनर्समायोजन से जुड़ी है। जून में सौरभ कुमार सिंह व छह अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिलों से सरप्लस शिक्षकों की सूची का सत्यापन कराने और आपत्तियों के निस्तारण के निर्देश दिए गए थे। उस समय अगली सुनवाई तक शिक्षकों के तबादलों पर रोक की बात भी सामने आई थी।

6 हजार शिक्षकों की बढ़ी परेशानी

तबादले की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियां स्थानांतरण की जरूरत को बढ़ाती हैं। सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक दिव्यांग, महिला और असाध्य रोग से पीड़ित शिक्षकों समेत करीब छह हजार आवेदक सूची की प्रतीक्षा कर रहे हैं।कई शिक्षक अपने परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर दूसरे जिलों में तैनात हैं। शिक्षकों को उम्मीद थी कि विशेष श्रेणी में आवेदन करने के बाद उन्हें जल्द राहत मिलेगी, लेकिन प्रक्रिया लंबी खिंचने के कारण अब पूरा मामला न्यायालय और विभाग के अगले निर्णय पर निर्भर हो गया है।

म्युचुअल ट्रांसफर पर भी कोई आदेश नहीं

म्युचुअल ट्रांसफर का इंतजार कर रहे शिक्षकों को भी फिलहाल राहत नहीं मिली है। इसमें दो शिक्षक आपसी सहमति के आधार पर एक-दूसरे के कार्यस्थल या जिले में स्थानांतरण चाहते हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस व्यवस्था में शिक्षकों की संख्या सीधे तौर पर कम नहीं होती, क्योंकि दोनों शिक्षक एक-दूसरे की जगह लेते हैं।उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष निर्भय सिंह ने मौजूदा स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि म्युचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से शिक्षक परेशान हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव के अनुसार अभी म्युचुअल ट्रांसफर को लेकर कोई आदेश नहीं है।इससे पहले 2025 की अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण प्रक्रिया में कुल 3,687 शिक्षक लाभान्वित हुए थे। परिषद की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ऑनलाइन सत्यापन और शिक्षकों की आपसी सहमति से बने जोड़ों के आधार पर यह प्रक्रिया पूरी की गई थी।

छात्र-शिक्षक अनुपात भी तबादले में अहम

तबादले का मामला केवल शिक्षकों की पसंद के जिले तक सीमित नहीं है। विभाग विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात को भी आधार बना रहा है। जून के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 1.11 लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 93.91 लाख विद्यार्थी और 3.03 लाख शिक्षक थे। प्रदेश का औसत छात्र-शिक्षक अनुपात 31 बताया गया था, लेकिन अलग-अलग जिलों में इसमें बड़ा अंतर था।इसी कारण विभाग की कोशिश है कि तबादले के दौरान ऐसे विद्यालयों और जिलों में शिक्षकों की उपलब्धता प्रभावित न हो, जहां पहले से शिक्षकों की कमी है।

शिक्षामित्रों के तबादले भी नहीं हुए शुरू

मामला केवल नियमित शिक्षकों तक सीमित नहीं है। शिक्षामित्रों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी अभी शुरू नहीं हुई है। ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवकाश के दौरान भी अपेक्षित तबादला प्रक्रिया पूरी नहीं होने से शिक्षकों का इंतजार बढ़ता गया है।फिलहाल करीब छह हजार विशेष श्रेणी के आवेदकों के साथ म्युचुअल ट्रांसफर की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों की नजर बेसिक शिक्षा परिषद के अगले आदेश पर है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 23 सितंबर तक विभाग की ओर से सूची जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।

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