IIT Bombay Professor Grok: नक्सल कहे जाने पर प्रोफेसर सूर्यकांत वाघमोरे ने Grok से पूछा सवाल, AI ने दिया यह जवाब
मुंबई। आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद संस्थान में शुरू हुआ विवाद अब सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक पहुंच गया है। आईआईटी बॉम्बे के समाजशास्त्र के प्रोफेसर सूर्यकांत वाघमोरे ने सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ हो रही टिप्पणियों के बीच एआई चैटबॉट ग्रोक से ही एक सवाल पूछ लिया। उन्होंने ग्रोक से पूछा कि क्या उनके नक्सलवाद से जुड़े होने का कोई आधार है और तकनीकी संस्थान में समाजशास्त्र के प्रोफेसर की भूमिका पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब क्या है।यह पूरा घटनाक्रम साहिल वाकोड़े की मौत के बाद कैंपस में बने तनावपूर्ण माहौल के बीच सामने आया है। वाघमोरे उन शिक्षकों में शामिल हैं जिन्होंने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के समर्थन में सामने आए फैकल्टी फोरम के रुख पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर भी बहस तेज हुई और कुछ लोगों ने उन्हें 'नक्सल' तक कहना शुरू कर दिया।
वाघमोरे ने ग्रोक से क्या पूछा?
सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ चल रही टिप्पणियों के जवाब में प्रोफेसर सूर्यकांत वाघमोरे ने ग्रोक को टैग करते हुए पूछा कि वह समाजशास्त्र के प्रोफेसर हैं और कुछ लोग उन्हें नक्सल कह रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थान में समाजशास्त्र के शिक्षक की जगह को लेकर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।रिपोर्ट के अनुसार, ग्रोक ने जवाब में कहा कि वाघमोरे के नक्सलवादियों से संबंध का कोई सबूत उपलब्ध नहीं है। एआई जवाब में उनके अकादमिक काम और आईआईटी जैसे संस्थानों में सामाजिक विज्ञान तथा मानविकी की भूमिका का भी उल्लेख किया गया।इसके बाद जब एक अन्य उपयोगकर्ता ने वाघमोरे के शोध और अकादमिक काम पर सवाल उठाया तो ग्रोक के जवाब में उनके प्रकाशित शोध और पुस्तकों का संदर्भ सामने आया। इस पर वाघमोरे ने सोशल मीडिया पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "डन... डस्टेड।"हालांकि, ग्रोक का जवाब किसी आधिकारिक जांच या संस्थागत प्रमाण का विकल्प नहीं है। किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि का आधार स्वतंत्र जांच, दस्तावेज और संबंधित संस्थाओं के आधिकारिक रिकॉर्ड ही होते हैं।
साहिल वाकोड़े की मौत से शुरू हुआ विवाद
आईआईटी बॉम्बे के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोड़े की 18 सितंबर को मौत के बाद यह पूरा विवाद शुरू हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, परीक्षा के दौरान साहिल पर मोबाइल फोन और चैटजीपीटी के इस्तेमाल से संबंधित आरोप सामने आए थे। इसके बाद वह छात्रावास लौटे और बाद में उनकी मौत की खबर सामने आई। घटना के बाद उनके परिवार ने जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए।परिवार के आरोपों के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ एससी/एसटी कानून और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। संस्थान स्तर पर भी कार्रवाई हुई और दूल्ला को डीन के पद से हटाने तथा मामले की जांच से जुड़े कदम उठाए गए। बाद में जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई।वहीं, आईआईटी बॉम्बे की ओर से कहा गया था कि साहिल की ओर से संस्थान के एससी-एसटी प्रकोष्ठ या प्रशासन के पास जातिगत भेदभाव से जुड़ी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। ऐसे में परिवार के आरोप और संस्थान के रुख के बीच वास्तविक स्थिति जांच का विषय बनी हुई है।
फैकल्टी फोरम के समर्थन से बढ़ा विवाद
साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर दूल्ला के समर्थन में बयान जारी किया। फोरम का कहना था कि परीक्षा के दौरान दूल्ला ने अपनी जिम्मेदारी के तहत कार्रवाई की थी और उनके खिलाफ गलत जानकारी के जरिए उनकी छवि प्रभावित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।फैकल्टी फोरम के इस रुख के बाद कैंपस में मतभेद और स्पष्ट दिखाई देने लगे। कुछ शिक्षक दूल्ला के समर्थन में सामने आए, जबकि कुछ ने जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की बात कही।प्रोफेसर सूर्यकांत वाघमोरे ने फैकल्टी फोरम के रुख पर सवाल उठाया। उनका तर्क रहा कि किसी जांच के बीच आरोपी शिक्षक के समर्थन में सामूहिक बयान जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला संदेश दे सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फैकल्टी फोरम की राय को आईआईटी बॉम्बे के सभी शिक्षकों की राय नहीं माना जा सकता।
कौन हैं सूर्यकांत वाघमोरे?
सूर्यकांत वाघमोरे आईआईटी बॉम्बे के मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग में समाजशास्त्र के प्रोफेसर हैं। आईआईटी बॉम्बे की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान, इतिहास और अर्थशास्त्र में स्नातक किया। इसके बाद टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से सामुदायिक विकास में परास्नातक और एडिनबर्ग विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में पीएचडी की।उनके शोध का प्रमुख क्षेत्र सामाजिक बहिष्कार, जाति, हाशिए के समूहों की राजनीति, राज्य और नागरिक समाज के संबंध तथा सामाजिक आंदोलनों से जुड़ा रहा है। वह 'Civility against Caste: Dalit Politics and Citizenship in Western India' के लेखक हैं। आईआईटी बॉम्बे की वेबसाइट पर उनकी कई शोध परियोजनाओं और अकादमिक प्रकाशनों का भी विवरण उपलब्ध है।
2023 में भी चर्चा में आए थे वाघमोरे
सूर्यकांत वाघमोरे इससे पहले 2023 में आईआईटी बॉम्बे के छात्रावास की मेस में शाकाहारी छात्रों के लिए अलग मेज निर्धारित किए जाने के विवाद के दौरान भी चर्चा में आए थे। उस समय उन्होंने अलग व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई थी। उनके बयान में भोजन के आधार पर अलगाव को लेकर सवाल उठाए गए थे।
अब जांच पर टिकी सबकी नजर
साहिल वाकोड़े की मौत के मामले में फिलहाल पुलिस और क्राइम ब्रांच की जांच महत्वपूर्ण है। क्राइम ब्रांच सीसीटीवी फुटेज और दूसरे डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्यों की मदद से घटनाक्रम की समयरेखा तैयार कर रही है। अधिकारियों की ओर से संबंधित लोगों के बयान और अन्य साक्ष्य जुटाए जाने की प्रक्रिया जारी है।इस बीच आईआईटी बॉम्बे का विवाद केवल छात्र की मौत और पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा है। कैंपस में शिक्षकों के अलग-अलग रुख, सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप और अब ग्रोक के जरिए जवाब मांगने की घटना ने इसे और चर्चा में ला दिया है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों पर ही निर्भर करेगा।
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