IIT Bombay Sahil Wakode: एचसी वर्मा ने नकल और डमी स्कूलों पर उठाए सवाल, साहिल की मौत के बाद शिक्षा व्यवस्था पर बहस
मुंबई। आईआईटी बॉम्बे के बीटेक छात्र साहिल वाकोड़े की मौत ने देश में उच्च शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। इसी बीच आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी और शिक्षक प्रोफेसर एचसी वर्मा ने परीक्षा में अनैतिक तरीकों, डमी स्कूलों और प्रैक्टिकल परीक्षाओं में मिलने वाले अंकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बच्चों के बीच छोटी उम्र से ही जब नियमों को नजरअंदाज करने और शॉर्टकट अपनाने की प्रवृत्ति सामान्य बना दी जाती है, तो इसका असर आगे चलकर उनकी शैक्षणिक और सामाजिक सोच पर भी पड़ता है।
साहिल की मौत के बाद एचसी वर्मा ने उठाया बड़ा सवाल
प्रोफेसर एचसी वर्मा ने साहिल वाकोड़े की मौत को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति की जिंदगी कीमती है। लेकिन उन्होंने इस घटना को केवल एक छात्र की मौत तक सीमित रखने के बजाय परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा के उस माहौल पर सवाल उठाया, जिसमें अच्छे अंक और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता को कई बार सीखने से ज्यादा महत्व मिल जाता है।उनका कहना है कि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी परीक्षा के दौरान गलत तरीके अपनाने की समस्या को केवल अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इसके पीछे स्कूली शिक्षा से लेकर कोचिंग और सामाजिक अपेक्षाओं तक कई स्तरों पर बनी व्यवस्था की भूमिका पर चर्चा जरूरी है।
डमी स्कूलों के चलन पर भी निशाना
एचसी वर्मा ने डमी स्कूलों की व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्रों को नियमित स्कूल जाने के बजाय मुख्य रूप से कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई करने की आदत डाली जाती है, तो उनके व्यक्तित्व विकास, अनुशासन और व्यावहारिक शिक्षा पर क्या असर पड़ता है।प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल और कोचिंग के बीच ऐसी व्यवस्था में पढ़ते हैं, जहां परीक्षा परिणाम को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलती है। वर्मा का तर्क है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अधिक अंक हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थी में ईमानदारी, जिम्मेदारी और वास्तविक ज्ञान भी विकसित होना चाहिए।
30 में 28-29 अंक देने की व्यवस्था पर सवाल
प्रोफेसर वर्मा ने प्रैक्टिकल परीक्षाओं में अंकों के वितरण को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों को प्रयोगशाला में पर्याप्त व्यावहारिक अनुभव नहीं मिलता, लेकिन इसके बावजूद 30 अंकों की प्रैक्टिकल परीक्षा में 28 या 29 अंक तक दे दिए जाते हैं।उनका कहना है कि यदि विद्यार्थी ने वास्तव में प्रयोग नहीं किया और फिर भी उसे लगभग पूरे अंक मिल जाते हैं, तो इससे उसके मन में यह संदेश जा सकता है कि बिना मेहनत और वास्तविक योग्यता के भी परिणाम हासिल किया जा सकता है। उनके अनुसार यही सोच आगे चलकर परीक्षा में अनुचित साधनों को लेकर भी गलत नजरिया पैदा कर सकती है।
साहिल वाकोड़े कौन थे?
साहिल वाकोड़े आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के दूसरे वर्ष के छात्र थे। 18 सितंबर 2026 की शाम उन्हें संस्थान के छात्रावास स्थित कमरे में मृत पाया गया। घटना से पहले उसी दिन परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन होने को लेकर विवाद हुआ था।उपलब्ध जांच संबंधी रिपोर्टों के मुताबिक, परीक्षा के दौरान साहिल पर चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर अनुचित तरीके से उत्तर हासिल करने की कोशिश करने का आरोप सामने आया था। बाद में पुलिस ने परीक्षा हॉल, परिसर और छात्रावास के सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की, ताकि परीक्षा खत्म होने के बाद साहिल की गतिविधियों की पूरी समयरेखा तैयार की जा सके।
12:30 से 12:45 बजे की सीसीटीवी फुटेज भी जांच में
मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य बनकर सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 12:30 से 12:45 बजे के बीच की परीक्षा हॉल की फुटेज में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को साहिल से परीक्षा हॉल छोड़ने के लिए कहते हुए देखा गया। इसके बाद जांच एजेंसियां साहिल के परीक्षा हॉल से निकलने से लेकर हॉस्टल पहुंचने तक के घटनाक्रम को जोड़ने में जुटी हैं।
परिवार ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप
साहिल के परिवार ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और बाद में जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
हालांकि, ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। आईआईटी बॉम्बे की ओर से पहले यह कहा गया था कि साहिल ने संस्थान के एससी-एसटी प्रकोष्ठ के सामने जातिगत भेदभाव से संबंधित कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। इसलिए घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, इसका अंतिम निष्कर्ष पुलिस और संस्थागत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
डूला को छुट्टी पर भेजा, 10 सदस्यीय समिति गठित
विवाद बढ़ने के बाद आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को छुट्टी पर भेज दिया। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच के लिए 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति भी गठित की है। समिति की अध्यक्षता आईआईटी पालक्काड के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन प्रोफेसर रमेश वेंकटेश्वरन कर रहे हैं।समिति में शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मनोचिकित्सक, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, पूर्व सतर्कता अधिकारी और तीन छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
छात्रों ने रखीं 18 मांगें
साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने संस्थान के सामने 18 मांगें रखी हैं। इनमें स्वतंत्र जांच, छात्र कल्याण और शिकायत निवारण व्यवस्था में सुधार तथा परिसर में चौबीसों घंटे मनोचिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल हैं। छात्रों ने संस्थान से इन मांगों पर लिखित जवाब और कार्ययोजना की मांग की है।
एचसी वर्मा की बात ने छेड़ी बड़ी बहस
साहिल की मौत की जांच जहां पुलिस और आईआईटी की समिति कर रही है, वहीं एचसी वर्मा की टिप्पणी ने शिक्षा व्यवस्था के एक व्यापक सवाल को सामने ला दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, डमी स्कूल, प्रैक्टिकल शिक्षा, अंकों की संस्कृति और परीक्षा में ईमानदारी इन सभी मुद्दों को एक साथ देखने की जरूरत पर बहस शुरू हो गई है।साहिल मामले में अंतिम जिम्मेदारी किसकी थी और उसकी मौत के पीछे कौन-कौन से कारण थे, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। लेकिन इस घटना ने यह सवाल जरूर सामने रखा है कि इंजीनियरिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ में छात्रों की शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता, मानसिक सुरक्षा और वास्तविक सीखने को कितना महत्व दिया जा रहा है।
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