राजस्थान में 67,104 शिक्षक पद खाली, अब गेस्ट फैकल्टी के भरोसे सरकारी स्कूल; जयपुर में 2,873 पद रिक्त
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का आंकड़ा एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था की बड़ी चुनौती सामने ला रहा है। प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक और व्याख्याता के कुल 67,104 पद खाली हैं। इनमें वरिष्ठ अध्यापक के 51,877 और व्याख्याताओं के 15,227 पद शामिल हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि आने वाले महीनों में शिक्षा विभाग के हजारों कर्मचारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में रिक्त पदों की संख्या और बढ़ सकती है।सरकार ने फिलहाल इस कमी से निपटने के लिए विद्या संबल योजना के तहत गेस्ट फैकल्टी लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। यानी जिन सरकारी स्कूलों में विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां अस्थायी तौर पर अतिथि शिक्षकों की मदद से पढ़ाई व्यवस्था चलाने की तैयारी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई आगे बढ़ रही है और बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए नियमित विषय शिक्षकों की जरूरत लगातार बढ़ती जा रही है।
67 हजार पद खाली होने का मतलब क्या है?
शिक्षा विभाग के शाला दर्पण पोर्टल के अगस्त के आंकड़ों के अनुसार वरिष्ठ अध्यापक और व्याख्याता के 67,104 पद रिक्त हैं। इनमें वरिष्ठ अध्यापक के पदों की संख्या सबसे ज्यादा है। अकेले इस श्रेणी में 51,877 पद खाली हैं, जबकि व्याख्याताओं के 15,227 पद रिक्त हैं।इन पदों का खाली होना केवल सरकारी नौकरी के अवसरों का आंकड़ा नहीं है। इसका सीधा संबंध स्कूलों में उपलब्ध शिक्षकों और विद्यार्थियों की पढ़ाई से है। खासकर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं में विषयवार शिक्षक नहीं होने पर विद्यार्थियों को परेशानी होती है। गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी और अन्य विषयों में नियमित शिक्षक की उपलब्धता परीक्षा परिणाम और पाठ्यक्रम पूरा होने की गति को प्रभावित कर सकती है।यही वजह है कि सरकार ने फिलहाल खाली पदों पर गेस्ट फैकल्टी की व्यवस्था करने का रास्ता चुना है।
कलेक्टर की अध्यक्षता में बनेगी चयन समिति
गेस्ट फैकल्टी के चयन के लिए जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी। इस समिति की अध्यक्षता कलेक्टर करेंगे। कलेक्टर की ओर से नामित अधिकारी भी समिति की अध्यक्षता कर सकता है।चयन प्रक्रिया में संबंधित पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और पात्रता को आधार बनाया जाएगा। समिति अभ्यर्थियों की मेरिट तैयार करेगी और जहां संभव होगा, एक रिक्त पद के लिए तीन अभ्यर्थियों का पैनल तैयार किया जाएगा।इस व्यवस्था में पात्र सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी गेस्ट फैकल्टी के तौर पर मौका दिया जा सकता है। इससे उन स्कूलों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है जहां शिक्षक की कमी के कारण नियमित कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं।हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गेस्ट फैकल्टी के रूप में काम करने से किसी अभ्यर्थी को नियमित नियुक्ति या भविष्य में नियमितीकरण का अधिकार नहीं मिलेगा। यह व्यवस्था केवल स्वीकृत रिक्त पदों के विरुद्ध अस्थायी शिक्षण व्यवस्था के लिए होगी।
तीन महीने में 4,230 कर्मचारी होंगे सेवानिवृत्त
शिक्षकों की मौजूदा कमी के बीच सेवानिवृत्ति का आंकड़ा भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध मासिक रिपोर्ट के अनुसार जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के 4,230 कर्मचारी सेवानिवृत्त होने का अनुमान है।इनमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के 4,031 कर्मचारी और प्रारंभिक शिक्षा विभाग के 199 कर्मचारी शामिल हैं।महीने के हिसाब से देखें तो जुलाई में 2,158, अगस्त में 1,238 और सितंबर में 834 कर्मचारी सेवानिवृत्त होने का अनुमान है।इसका अर्थ यह है कि सरकार जिस समय मौजूदा रिक्तियों को अस्थायी शिक्षकों के माध्यम से संभालने की कोशिश कर रही है, उसी समय विभाग से बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो रहे हैं। अगर खाली होने वाले पदों पर समय रहते स्थायी नियुक्तियां नहीं होती हैं तो आने वाले महीनों में स्कूलों पर इसका दबाव और बढ़ सकता है।
व्याख्याताओं को 30 हजार तक मानदेय
विद्या संबल योजना में अलग-अलग श्रेणी के शिक्षकों के लिए अलग मानदेय निर्धारित किया गया है। व्याख्याताओं को अधिकतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह, वरिष्ठ अध्यापकों को 25 हजार रुपये और ग्रेड-3 शिक्षकों को अधिकतम 21 हजार रुपये प्रतिमाह तक मानदेय दिया जा सकेगा।प्रयोगशाला सहायकों और कंप्यूटर प्रशिक्षकों के लिए भी अधिकतम 21 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय का प्रावधान है। भुगतान निर्धारित प्रति घंटा दर के आधार पर किया जाएगा।राजस्थान के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा संस्थानों में भी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विद्या संबल योजना का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकारी स्तर पर जारी एक 2026-27 विज्ञप्ति में गेस्ट फैकल्टी के लिए प्रति कालांश मानदेय की व्यवस्था भी दर्ज है।
जयपुर में 2,873 पद खाली, ग्रेड-2 की सबसे बड़ी कमी
प्रदेश की राजधानी जयपुर के सरकारी स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी गंभीर है। जिले के 1,049 सरकारी स्कूलों में स्वीकृत पदों की तुलना में शिक्षकों और दूसरे शैक्षणिक पदों के कुल 2,873 पद रिक्त हैं।सबसे बड़ी कमी ग्रेड-2 शिक्षकों में दिखाई देती है। जयपुर में ग्रेड-2 के 4,934 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 3,794 शिक्षक कार्यरत हैं। इस तरह 1,140 पद खाली हैं। ग्रेड-1 के 3,779 स्वीकृत पदों में 3,090 शिक्षक कार्यरत हैं और 689 पद रिक्त हैं।ग्रेड-3 लेवल-2 के 2,535 पदों में 2,130 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 405 पद खाली हैं। ग्रेड-3 लेवल-1 के 2,825 पदों में 2,501 शिक्षक कार्यरत हैं और 324 पद रिक्त हैं।यानी जयपुर जैसे बड़े जिले में भी शिक्षकों की कमी केवल एक श्रेणी तक सीमित नहीं है। लैब असिस्टेंट और प्रशिक्षकों के पद भी खाली शिक्षक पदों के अलावा स्कूलों में दूसरे शैक्षणिक पदों की स्थिति भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है।जयपुर जिले में प्रशिक्षक और शारीरिक शिक्षकों के 864 स्वीकृत पदों में 678 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 186 पद खाली हैं। इसी तरह लैब असिस्टेंट के 465 पदों में 338 कर्मचारी कार्यरत हैं और 127 पद रिक्त हैं।कंप्यूटर लैब इंचार्ज के दो स्वीकृत पदों में से दोनों खाली हैं। इसका असर केवल कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों तक सीमित नहीं है। प्रयोगशाला, कंप्यूटर शिक्षा और शारीरिक शिक्षा जैसी गतिविधियों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
प्रारंभिक शिक्षा में भी 994 पद रिक्त
जयपुर की प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं। ग्रेड-1, ग्रेड-2, ग्रेड-3 लेवल-2 और ग्रेड-3 लेवल-1 व समकक्ष श्रेणियों में कुल 994 पद रिक्त बताए गए हैं।ग्रेड-1 के 792 स्वीकृत पदों में 518 शिक्षक कार्यरत हैं और 274 पद खाली हैं। ग्रेड-2 के 2,600 पदों में 2,383 शिक्षक कार्यरत हैं और 217 पद रिक्त हैं।ग्रेड-3 लेवल-2 और समकक्ष के 4,292 स्वीकृत पदों में 3,830 शिक्षक कार्यरत हैं। इस श्रेणी में 462 पद खाली हैं। ग्रेड-3 लेवल-1 और समकक्ष के 254 पदों में 213 शिक्षक कार्यरत हैं तथा 41 पद रिक्त हैं।इस तरह केवल ग्रेड-3 की दोनों श्रेणियों में जयपुर जिले में 503 पद खाली हैं।
अस्थायी इंतजाम से कितनी दूर होगी समस्या?
राजस्थान सरकार का गेस्ट फैकल्टी का फैसला फिलहाल स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध कराने का एक व्यावहारिक रास्ता हो सकता है। लेकिन 67,104 वरिष्ठ अध्यापक और व्याख्याता पदों का खाली होना यह भी बताता है कि समस्या का स्थायी समाधान केवल अस्थायी शिक्षकों से नहीं होगा।शिक्षा व्यवस्था में गेस्ट फैकल्टी खाली कक्षाओं को तत्काल शिक्षक दे सकती है, लेकिन नियमित शिक्षक की जगह लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर रहना अलग चुनौती है। नियमित शिक्षक स्कूल की शैक्षणिक योजना, विद्यार्थियों की प्रगति, परीक्षा तैयारी और स्कूल की दूसरी जिम्मेदारियों में लंबे समय तक भूमिका निभाते हैं।यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विद्या संबल योजना से तत्काल राहत मिलने के बाद सरकार 67 हजार से ज्यादा रिक्त पदों को स्थायी भर्ती से कब भरेगी।शाला दर्पण पर 2026 में वरिष्ठ अध्यापक पदस्थापन की प्रक्रिया के रिकॉर्ड भी उपलब्ध हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि कुछ भर्ती प्रक्रियाओं पर काम चल रहा है। लेकिन मौजूदा रिक्तियों का आकार बताता है कि नियुक्ति प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है।राजस्थान के सरकारी स्कूलों के सामने फिलहाल तस्वीर साफ है 67,104 वरिष्ठ अध्यापक और व्याख्याता पद खाली हैं, तीन महीने में 4,230 कर्मचारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं और अकेले जयपुर में 2,873 शैक्षणिक पद रिक्त हैं। गेस्ट फैकल्टी से कक्षाओं को तत्काल सहारा मिल सकता है, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का स्थायी समाधान नियमित भर्ती और समय पर नियुक्ति से ही संभव होगा।
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