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सोमवार, 24 अगस्त 2026

Rajasthan School News: मिड-डे मील खाने के बाद 27 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, 14 अस्पताल पहुंचे; कद्दू की सब्जी से जुड़े सवालों की होगी जांच

Rajasthan School News: मिड-डे मील खाने के बाद 27 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, 14 अस्पताल पहुंचे; कद्दू की सब्जी से जुड़े सवालों की होगी जांच


 Rajasthan School News: मिड-डे मील खाने के बाद 27 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, 14 अस्पताल पहुंचे; कद्दू की सब्जी से जुड़े सवालों की होगी जांच

राजस्थान के कोटा में सरकारी स्कूल के बच्चों को दिया गया मध्याह्न भोजन सोमवार को जांच का विषय बन गया। रानपुर क्षेत्र के पूनिया देवरिया स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में खाना खाने के करीब दो घंटे बाद एक के बाद एक 27 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों ने उल्टी, दस्त, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की। हालत बिगड़ने पर स्कूल प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए 14 बच्चों को न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया।अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश बच्चों की हालत में सुधार बताया गया है। हालांकि 4 से 5 बच्चों के अभी अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हुई है। बच्चों ने कद्दू की सब्जी खाने के बाद परेशानी शुरू होने की बात कही है, लेकिन प्रशासन ने अभी भोजन को बीमारी की निश्चित वजह नहीं माना है। मेडिकल जांच और भोजन की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ होगी।


110 बच्चों ने खाया था स्कूल का भोजन

पूनिया देवरिया के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा आठ तक 130 विद्यार्थी नामांकित हैं। सोमवार को इनमें से 110 बच्चे स्कूल में उपस्थित थे। स्कूल प्रशासन के अनुसार सुबह करीब 10 बजे विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन दिया गया।खाना खाने के करीब दो घंटे बाद दोपहर 12 बजे के आसपास कुछ बच्चों ने उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की। इसके बाद पेट दर्द और दस्त की समस्या बताने वाले बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। जब कई विद्यार्थियों की तबीयत एक साथ बिगड़ने लगी तो शिक्षकों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।कुल 27 बच्चों के अस्वस्थ होने की जानकारी सामने आई, जबकि 14 बच्चों को अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश बच्चों को राहत दी।


केवलनगर की अन्नपूर्णा रसोई से आया था भोजन

स्कूल प्रभारी के अनुसार विद्यार्थियों को दिया गया भोजन केवलनगर स्थित अन्नपूर्णा रसोई से आया था। इसी रसोई से सोमवार को आसपास के नौ स्कूलों के लिए मध्याह्न भोजन भेजा गया था।घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने दूसरे स्कूलों से भी जानकारी ली। यहां सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसी रसोई से भोजन पाने वाले आठ अन्य स्कूलों में बच्चों के बीमार होने की सूचना नहीं मिली।इस जानकारी के बाद भोजन को ही बीमारी का अंतिम कारण मानना जल्दबाजी होगी। एक ही रसोई से कई स्कूलों में भोजन पहुंचने के बावजूद केवल एक स्कूल में बच्चों की तबीयत खराब होने की स्थिति की अलग से जांच जरूरी है।जिला शिक्षा अधिकारी ने भी कहा है कि शुरुआती स्तर पर भोजन को बीमारी की वजह नहीं माना जा सकता। मेडिकल जांच और रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएगा।


कद्दू की सब्जी खाने के बाद क्यों बिगड़ी तबीयत?

अस्पताल पहुंचे विद्यार्थियों ने कद्दू की सब्जी खाने के बाद तबीयत खराब होने की बात बताई है। सातवीं कक्षा के छात्र अर्जुन भील के अनुसार सब्जी खाने के करीब दो घंटे बाद उसके पेट में दर्द हुआ और उल्टी शुरू हो गई।पांचवीं कक्षा की छात्रा प्रिया ने भी सब्जी खाने के बाद उल्टी होने की बात बताई। वहीं चौथी कक्षा के छात्र राहुल ने चक्कर आने और नीचे गिरने की जानकारी दी।इन बयानों से भोजन और बीमारी के बीच समय का संबंध जरूर दिखाई देता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि कद्दू की सब्जी ही बीमारी का कारण थी। इसकी पुष्टि के लिए भोजन के नमूने और मेडिकल रिपोर्ट महत्वपूर्ण होंगे।


शिक्षा मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अधिकारियों को घटना की जांच करने के निर्देश दिए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार पोषाहार के नमूने लेकर उनकी जांच कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने को कहा गया है। मंत्री ने अस्पताल प्रशासन से बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली।इससे जांच अब केवल बच्चों की तबीयत तक सीमित नहीं रहेगी। भोजन तैयार होने से लेकर स्कूल तक पहुंचने और बच्चों को परोसे जाने तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।


PM POSHAN में भोजन के लिए तय हैं पोषण मानक

मध्याह्न भोजन अब प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण यानी पीएम पोषण योजना के तहत आता है। इस योजना का उद्देश्य केवल बच्चों को भोजन देना नहीं, बल्कि उनके पोषण स्तर में सुधार करना और स्कूल में उनकी नियमित उपस्थिति को बढ़ावा देना भी है।कक्षा 1 से 5 के बच्चों के लिए प्रति बच्चा प्रतिदिन 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन तथा कक्षा 6 से 8 के बच्चों के लिए 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन का पोषण मानक निर्धारित है। उच्च प्राथमिक स्तर पर प्रति बच्चे के लिए 150 ग्राम खाद्यान्न, 30 ग्राम दाल, 75 ग्राम सब्जी और 7.5 ग्राम तेल व वसा के मानक दिए गए हैं।इसलिए स्कूल में मिलने वाला भोजन केवल पेट भरने की व्यवस्था नहीं है। उसकी गुणवत्ता और पोषण दोनों योजना के उद्देश्य का हिस्सा हैं।


भोजन की गुणवत्ता की निगरानी क्यों महत्वपूर्ण?

राजस्थान सरकार ने इस साल भी पीएम पोषण योजना के तहत खाद्यान्न के उठाव, परिवहन, वितरण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने को लेकर आदेश जारी किया है। इसका मतलब है कि भोजन की गुणवत्ता से जुड़े सवालों को केवल स्कूल स्तर की समस्या नहीं माना जा सकता। खाद्यान्न और भोजन की पूरी आपूर्ति श्रृंखला में निगरानी की जरूरत होती है।कोटा की घटना में इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भोजन कब तैयार हुआ, उसे स्कूल तक कब पहुंचाया गया, किस परिस्थितियों में रखा गया और बच्चों को परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई।यदि जांच में भोजन से जुड़ी कोई गड़बड़ी सामने आती है तो केवल रसोई तक जिम्मेदारी सीमित नहीं रहनी चाहिए। आपूर्ति, परिवहन, भंडारण और स्कूल स्तर पर भोजन वितरण की जिम्मेदारी भी देखनी होगी।


कोटा में मिड-डे मील की निगरानी को लेकर पहले भी सवाल

कोटा में पीएम पोषण योजना की निगरानी को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार जिले के 1,173 स्कूलों में पीएम पोषण से जुड़ी दैनिक जानकारी नियमित रूप से अपलोड नहीं की जा रही थी। कुछ दिनों में केवल 120 से 170 स्कूलों द्वारा जानकारी अपलोड किए जाने की बात सामने आई थी। राजस्थान स्तर पर भी पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने को लेकर कमी बताई गई थी।यह आंकड़ा सीधे तौर पर पूनिया देवरिया स्कूल की घटना को भोजन की गुणवत्ता से नहीं जोड़ता, लेकिन यह जरूर बताता है कि योजना में दैनिक निगरानी और रिकॉर्डिंग व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है।अगर किसी स्कूल में भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की संख्या या भोजन वितरण की जानकारी समय पर दर्ज नहीं होती है तो किसी घटना के बाद पूरी स्थिति को समझना भी मुश्किल हो सकता है।


क्या सिर्फ कद्दू की सब्जी को जिम्मेदार मानना सही होगा?

फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि जांच पूरी होने से पहले किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाए। बच्चों ने कद्दू की सब्जी खाने के बाद तबीयत बिगड़ने की बात कही है, लेकिन उसी रसोई से आठ अन्य स्कूलों में भी भोजन गया था और वहां बच्चों के बीमार होने की सूचना नहीं मिली।इसलिए जांच में कई संभावनाओं को देखा जाना चाहिए। भोजन की सामग्री, पानी, खाना पकाने की प्रक्रिया, भंडारण, परिवहन, तापमान, स्वच्छता और बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही बीमारी का कारण तय किया जा सकता है।यही कारण है कि भोजन के नमूनों की जांच और बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण होगी।


अभिभावकों के लिए अभी क्या स्थिति है?

फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल ले जाए गए अधिकांश बच्चों की हालत में सुधार बताया गया है। कुछ बच्चे अभी चिकित्सकीय निगरानी में हैं। स्कूल प्रशासन और विभाग के सामने सबसे पहली जिम्मेदारी बच्चों के स्वास्थ्य पर नजर रखना है।इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जांच पूरी होने तक भोजन की व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही न हो। यदि किसी स्तर पर भोजन की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।


27 बच्चों की तबीयत बिगड़ना छोटी घटना नहीं

पूनिया देवरिया स्कूल में 110 उपस्थित विद्यार्थियों में से 27 बच्चों के अस्वस्थ होने की घटना को केवल स्थानीय स्कूल की समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं होगा। यह स्कूल भोजन की निगरानी व्यवस्था की परीक्षा भी है।अभी तक उपलब्ध जानकारी में भोजन को बीमारी का कारण साबित नहीं किया गया है। लेकिन बच्चों की शिकायतें, घटना का समय, भोजन में कद्दू की सब्जी और अस्पताल पहुंचाए गए 14 विद्यार्थियों का आंकड़ा जांच को गंभीर बनाता है।अब असली सवाल यह है कि 27 बच्चों की तबीयत एक साथ क्यों बिगड़ी? इसका जवाब मेडिकल रिपोर्ट, भोजन के नमूनों और प्रशासनिक जांच से ही मिलेगा। अगर भोजन में कमी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा और अगर कारण कुछ और निकलता है तो उसके अनुसार कार्रवाई करनी होगी।सरकारी स्कूल के बच्चों को मिलने वाला भोजन उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों से जुड़ा है। इसलिए इस मामले में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्य आधारित जांच और पारदर्शी कार्रवाई सबसे जरूरी है।


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