Rajasthan Teacher News: फर्जी प्रतिनियुक्ति आदेश दिखाकर शिक्षिका ने कराया खुद को कार्यमुक्त, निलंबन के बाद FIR; एक और शिक्षक पर कार्रवाई
राजस्थान के अजमेर में शिक्षा विभाग से जुड़ा फर्जी प्रतिनियुक्ति आदेश का मामला सामने आया है। अजमेर के अजयसर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका सुमन देवी पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के नाम से जारी कथित फर्जी आदेश प्रस्तुत कर खुद को अजमेर के स्कूल से हनुमानगढ़ के भादरा स्थित एक सरकारी स्कूल के लिए कार्यमुक्त करा लिया।मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर आदेश का सत्यापन कराया गया। जांच में ऐसा कोई आदेश जारी नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद अजमेर के जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय-प्रारंभिक शिक्षा ने शिक्षिका को निलंबित कर दिया। अब गंज थाना पुलिस ने प्रधानाचार्य की शिकायत पर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
19 अगस्त को पेश किया था कथित फर्जी आदेश
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अजयसर के प्रधानाचार्य विनय कुमार जैन ने शिक्षिका के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।शिकायत के मुताबिक सुमन देवी ने 19 अगस्त को दोपहर करीब 12:15 बजे प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर के नाम से जारी एक आदेश स्कूल में प्रस्तुत किया। आदेश में चुनाव आचार संहिता लागू होने का हवाला देते हुए शिक्षिका को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय ढाणी बेरवाल, भादरा, हनुमानगढ़ में शैक्षणिक कार्य व्यवस्था के लिए लगाए जाने की बात कही गई थी।आदेश में संबंधित कर्मचारी को कार्यमुक्त करने के निर्देश भी दिए गए थे। प्रधानाचार्य ने दस्तावेज को विभागीय आदेश मानते हुए उसी दिन स्कूल समय समाप्त होने के बाद शिक्षिका को ऑफलाइन कार्यमुक्त कर दिया।यानी शिक्षिका ने कागजी आदेश के आधार पर अपने वर्तमान स्कूल से कार्यमुक्ति हासिल कर ली और दूसरे जिले के स्कूल में जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई।
विभागीय जांच में खुली आदेश की पोल
मामले में मोड़ तब आया जब आदेश का विभागीय स्तर पर सत्यापन कराया गया। जांच में पता चला कि प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था।इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की। 21 अगस्त को सुमन देवी को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, भिनाय निर्धारित किया गया है।वहीं, पुलिस ने भी मामले में दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अब जांच का मुख्य बिंदु यह रहेगा कि कथित फर्जी आदेश तैयार कैसे हुआ, उसे किसने तैयार किया और शिक्षिका ने इसे किस तरह विभागीय आदेश के रूप में इस्तेमाल किया।
गंज थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी की FIR
शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रही है। प्रधानाचार्य की शिकायत के आधार पर गंज थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।पुलिस अब कथित आदेश की सत्यता, उस पर किए गए हस्ताक्षर, दस्तावेज की तैयार करने की प्रक्रिया और उसके इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे या दस्तावेज तैयार करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति, पदस्थापन और कार्य व्यवस्था से जुड़े आदेश आधिकारिक माध्यम से जारी होते हैं। राजस्थान सरकार के शिक्षा पोर्टल पर भी कर्मचारी आदेश, प्रतिनियुक्ति, स्थानांतरण और पदस्थापन से जुड़े आदेश प्रकाशित किए जाते हैं।
दूसरे शिक्षक पर भी फर्जी प्रतिनियुक्ति आदेश का आरोप
इसी दौरान अजमेर जिले में ऐसा ही एक दूसरा मामला भी सामने आया है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नाहरपुरा (मायापुर) के लेवल-1 शिक्षक श्यामलाल ताड़ा को भी फर्जी प्रतिनियुक्ति आदेश के मामले में निलंबित किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार श्यामलाल ताड़ा पर भी शिक्षा निदेशालय के नाम से कथित फर्जी आदेश के जरिए मनचाही जगह कार्य व्यवस्था का लाभ लेने का आरोप है। उनके खिलाफ मांगलियावास थाने में मामला दर्ज कराया गया है।दोनों मामलों में विभागीय कार्रवाई के साथ पुलिस जांच भी शुरू होना यह बताता है कि मामला केवल प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं माना गया है।
फर्जी आदेश से मनचाही पोस्टिंग लेने की कोशिश?
शिक्षा विभाग में प्रतिनियुक्ति या कार्य व्यवस्था का उद्देश्य जरूरत के अनुसार किसी कर्मचारी को दूसरी जगह सेवाएं देने के लिए लगाया जाना है। इसके लिए सक्षम अधिकारी की ओर से आधिकारिक आदेश जरूरी होता है।ऐसे में अगर कोई कर्मचारी कथित रूप से फर्जी आदेश के आधार पर कार्यमुक्ति हासिल करता है तो इससे विभागीय रिकॉर्ड और स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकते हैं।सुमन देवी के मामले में भी सबसे अहम सवाल यही है कि कथित आदेश की सत्यता जांचे बिना कार्यमुक्ति कैसे हो गई और आदेश तैयार करने वाले व्यक्ति या माध्यम तक पुलिस जांच कैसे पहुंचती है।हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पुलिस जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
चुनाव आचार संहिता का दिया गया था हवाला
कथित आदेश में चुनाव आचार संहिता लागू होने वाली होने का हवाला दिया गया था। इसी आधार पर शिक्षिका को दूसरे स्कूल में शैक्षणिक कार्य व्यवस्था के लिए भेजने की बात कही गई थी।यह विवरण जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुलिस और विभाग यह भी देख सकते हैं कि आदेश की भाषा, प्रारूप, जारी करने वाले अधिकारी का नाम और हस्ताक्षर वास्तविक सरकारी आदेशों से मेल खाते थे या नहीं।अगर दस्तावेज में प्रथम दृष्टया सरकारी आदेश जैसा प्रारूप था, तो यह भी जांच का विषय होगा कि स्कूल स्तर पर उसकी पुष्टि क्यों नहीं हो सकी।
शिक्षा विभाग के लिए भी बड़ा सवाल
इस घटना ने शिक्षा विभाग में आदेशों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा कर दिया है। कर्मचारी की कार्यमुक्ति, प्रतिनियुक्ति या पदस्थापन जैसे मामलों में यदि आदेश की पुष्टि किए बिना कार्रवाई हो जाए तो फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल की संभावना बढ़ सकती है।राजस्थान के आधिकारिक शिक्षा पोर्टल पर कर्मचारी आदेशों और प्रतिनियुक्ति से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे में भविष्य में किसी भी संवेदनशील आदेश की डिजिटल या आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करने की व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी हो सकता है।
अब पुलिस जांच में किन बिंदुओं पर रहेगा फोकस?
गंज थाना पुलिस के सामने अब कई सवाल हैं। सबसे पहले कथित आदेश का मूल स्रोत पता करना होगा। इसके बाद यह जांच जरूरी होगी कि दस्तावेज किसने तैयार किया, उस पर हस्ताक्षर और मुहर कैसे लगी और इसे स्कूल प्रशासन के सामने किस माध्यम से प्रस्तुत किया गया।इसके अलावा पुलिस यह भी जांच सकती है कि कथित आदेश के आधार पर शिक्षिका को कार्यमुक्त कराने के बाद उन्होंने हनुमानगढ़ के स्कूल में योगदान देने की कोशिश की थी या नहीं।दूसरे शिक्षक के मामले में भी इसी तरह की जांच चल रही है।
शिक्षा विभाग में फर्जी आदेश का मामला क्यों गंभीर?
सरकारी स्कूलों में शिक्षक की एक-एक नियुक्ति और पदस्थापन सीधे शिक्षण व्यवस्था से जुड़ा होता है। किसी शिक्षक का फर्जी आदेश के आधार पर दूसरे स्कूल में जाना केवल विभागीय दस्तावेज का मामला नहीं है। इससे जिस स्कूल से शिक्षक कार्यमुक्त होता है, वहां विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्टाफ व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।अजमेर के इन मामलों में अब विभागीय जांच और पुलिस जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित फर्जी आदेश किस स्तर पर तैयार हुए और इसके पीछे किसी संगठित प्रयास की भूमिका थी या नहीं।फिलहाल सुमन देवी निलंबित हैं और उनके खिलाफ गंज थाने में मामला दर्ज है, जबकि श्यामलाल ताड़ा के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई और पुलिस केस की जानकारी सामने आई है। आगे की तस्वीर पुलिस जांच और दस्तावेजों के सत्यापन से साफ होगी।
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