RPSC Exam 2026: डमी अभ्यर्थियों पर लगेगी रोक, UPSC की तर्ज पर फेशियल ऑथेंटिकेशन से होगी पहचान; AI कैमरों पर भी विचार
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थियों और नकल पर रोक लगाने के लिए परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आयोग अब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा व्यवस्था में इस्तेमाल हो रही फेशियल ऑथेंटिकेशन तकनीक का अध्ययन कर रहा है। इसके लिए आरपीएससी की विशेष अध्ययन टीम ने यूपीएससी के परीक्षा केंद्रों पर लागू व्यवस्था और उसकी पूरी कार्यप्रणाली का जायजा लिया है।अध्ययन दल ने सोमवार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट आरपीएससी अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह को सौंप दी। अब आयोग रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद तय करेगा कि राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं के दौरान फेशियल ऑथेंटिकेशन समेत कौन-कौन से तकनीकी सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकते हैं।UPSC ने भी 2026 की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया था। इस व्यवस्था में परीक्षा केंद्र पर मौजूद अभ्यर्थी के चेहरे का मिलान आवेदन के समय जमा की गई तस्वीर से किया जाता है। इसका उद्देश्य किसी दूसरे व्यक्ति के अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने यानी प्रतिरूपण की संभावना को रोकना है।
आवेदन की फोटो से परीक्षा केंद्र पर होगा चेहरा मैच
फेशियल ऑथेंटिकेशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि परीक्षा केंद्र पर पहुंचने वाले अभ्यर्थी की पहचान पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाई जा सकती है। इससे डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा देने की संभावना कम की जा सकती है।UPSC की 2026 की व्यवस्था में परीक्षा केंद्र पर लाइव और रियल टाइम तरीके से अभ्यर्थियों की पहचान की गई थी। आयोग के अनुसार आवेदन के दौरान अपलोड की गई तस्वीर और परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी के चेहरे का मिलान किया गया।RPSC भी इसी तरह की व्यवस्था को अपनी परीक्षाओं के लिए उपयोगी मान रहा है। हालांकि राजस्थान में इसे किस परीक्षा से और किस स्तर पर लागू किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।
बायोमेट्रिक से लेकर AI कैमरों तक पर विचार
RPSC केवल फेशियल ऑथेंटिकेशन तक सीमित नहीं रहना चाहता। परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन, AI फेस रिकग्निशन वाले CCTV कैमरे और हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर (HHMD) के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है।हाल ही में आयोग अध्यक्ष की अध्यक्षता में इस संबंध में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें आयोग की आईटी टीम और राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।बैठक में परीक्षा केंद्रों की लाइव निगरानी, अभ्यर्थियों की पहचान और परीक्षा केंद्र में प्रतिबंधित वस्तुओं की जांच से जुड़े तकनीकी विकल्पों पर चर्चा हुई।आयोग ने अपनी तकनीकी जरूरतों और सवालों की जानकारी संबंधित एजेंसी को दी है। एजेंसी से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद यह तय किया जाएगा कि कौन-सी तकनीक कितनी उपयोगी और व्यावहारिक होगी।
चार-पांच दिन में मिलेगी तकनीकी रिपोर्ट
आयोग की ओर से संबंधित एजेंसी को तकनीकी जरूरतों की जानकारी भेजी जा चुकी है। बताया गया है कि एजेंसी से चार-पांच दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।रिपोर्ट में तकनीकी व्यवस्था की जरूरत, लागत, परीक्षा केंद्रों पर इसे लागू करने की प्रक्रिया और लाइव निगरानी से जुड़े पहलुओं का आकलन किया जा सकता है। इसके बाद आयोग आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें परीक्षा केंद्र में प्रवेश से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक अभ्यर्थियों की पहचान और गतिविधियों की निगरानी ज्यादा प्रभावी तरीके से की जा सके।
RPSC परीक्षाओं में सुरक्षा पर पहले भी उठे सवाल
RPSC की भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थियों और नकल से जुड़े मामलों के कारण परीक्षा सुरक्षा लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है। राजस्थान हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी एक भर्ती परीक्षा की जांच के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन, प्रभावी वीडियोग्राफी और डमी अभ्यर्थियों की पहचान के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से जुड़े गंभीर सवाल दर्ज हुए हैं।अदालत के रिकॉर्ड में जांच से जुड़े ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं जिनमें परीक्षा केंद्रों पर प्रभावी पहचान व्यवस्था के अभाव के कारण डमी अभ्यर्थियों की वास्तविक संख्या का पता लगाने में कठिनाई की बात कही गई थी।इसी पृष्ठभूमि में अब RPSC परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी पहचान प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
पुलिस के साथ भी बनेगी सुरक्षा रणनीति
परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी। RPSC राजस्थान पुलिस की भर्ती शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बैठक करेगा।आयोग अध्यक्ष पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। इसमें केंद्रों की निगरानी, अभ्यर्थियों की पहचान, प्रवेश व्यवस्था और परीक्षा के दौरान सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।इसका उद्देश्य परीक्षा के दौरान नकल, फर्जी अभ्यर्थी, प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य संभावित गड़बड़ियों को रोकना है।
अभ्यर्थियों के लिए क्या बदलेगा?
अगर RPSC फेशियल ऑथेंटिकेशन और बायोमेट्रिक जैसी व्यवस्थाएं लागू करता है तो अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर पहचान सत्यापन की अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। संभावना है कि परीक्षा केंद्र में प्रवेश के समय अभ्यर्थी की तस्वीर और चेहरे का मिलान किया जाए। इसके साथ बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जा सकता है। AI आधारित CCTV कैमरों से परीक्षा केंद्रों की निगरानी बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है।हालांकि इन व्यवस्थाओं की अंतिम रूपरेखा और लागू होने की तारीख अभी RPSC की आगामी घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
निष्पक्ष परीक्षा के लिए तकनीक पर जोर
RPSC अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के अनुसार आयोग का उद्देश्य युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखना और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना है। इसी कारण UPSC और देश के दूसरे भर्ती आयोगों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जा रहा है।फेशियल ऑथेंटिकेशन, बायोमेट्रिक्स और AI आधारित निगरानी का इस्तेमाल होने पर परीक्षा प्रक्रिया में किसी दूसरे अभ्यर्थी के नाम पर परीक्षा देने की संभावना को कम किया जा सकता है।हालांकि तकनीक तभी प्रभावी होगी जब उसके साथ सख्त परीक्षा प्रबंधन, प्रशिक्षित स्टाफ, सुरक्षित डेटा व्यवस्था और लगातार निगरानी भी सुनिश्चित की जाए। RPSC अब विशेष अध्ययन दल की रिपोर्ट, तकनीकी एजेंसी की रिपोर्ट और पुलिस-प्रशासन के साथ होने वाले विचार-विमर्श के आधार पर आगे का फैसला करेगा। अगर प्रस्तावित तकनीकी व्यवस्था लागू होती है तो राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थी की पहचान और परीक्षा केंद्र की निगरानी पहले की तुलना में काफी अधिक तकनीकी हो सकती है।
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