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सोमवार, 24 अगस्त 2026

Rajasthan School News: CJP अभियान के बाद सरकार का बड़ा प्लान, 3 साल में 12,500 करोड़ से बदलेंगे सरकारी स्कूल; 83,783 नए क्लासरूम

Rajasthan School News: CJP अभियान के बाद सरकार का बड़ा प्लान, 3 साल में 12,500 करोड़ से बदलेंगे सरकारी स्कूल; 83,783 नए क्लासरूम


 Rajasthan School News: CJP अभियान के बाद सरकार का बड़ा प्लान, 3 साल में 12,500 करोड़ से बदलेंगे सरकारी स्कूल; 83,783 नए क्लासरूम

राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बदहाल इमारतों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर चल रही बहस के बीच भजनलाल शर्मा सरकार ने स्कूल शिक्षा के ढांचे को सुधारने के लिए बड़ा रोडमैप सामने रखा है। सरकार के प्रस्तावित तीन साल के प्लान के तहत 2026-27 से 2028-29 के बीच करीब 12,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना में नए स्कूल भवन, अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, जर्जर भवनों की मरम्मत, शौचालय और डिजिटल शिक्षा जैसी सुविधाओं पर काम किया जाएगा।सरकार का यह प्लान ऐसे समय सामने आया है जब राजस्थान के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए सवाल उठाए जा रहे हैं। जयपुर के सांगानेर क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा स्थित सरकारी स्कूल का मामला इस बहस का केंद्र बना। स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को लेकर विवाद के बीच अब सरकार ने नए भवन के निर्माण के लिए 18 लाख रुपये मंजूर किए हैं और काम 1 सितंबर से शुरू होने की घोषणा की गई है।


3 साल में 3,587 नए स्कूल भवन बनाने की योजना

सरकार के रोडमैप में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नए स्कूल भवनों का है। योजना के तहत प्रदेश में 3,587 नए सरकारी स्कूल भवन बनाए जाएंगे। इन पर करीब 2,487.7 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी स्कूलों में भवन की कमी केवल पढ़ाई की जगह से जुड़ी समस्या नहीं है। सुरक्षित भवन, पर्याप्त कक्ष और विद्यार्थियों के लिए बुनियादी सुविधाएं स्कूल में पढ़ाई के माहौल का हिस्सा हैं।सरकारी आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में ऐसे स्कूल भी हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है। हालिया रिपोर्टों में सरकार की ओर से 611 स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं होने की जानकारी सामने आई है।


83,783 नए क्लासरूम बनेंगे

नए भवनों के साथ स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा-कक्षों की कमी दूर करने पर भी बड़ा खर्च प्रस्तावित है। सरकार के अनुसार 83,783 नए क्लासरूम बनाए जाएंगे। इसके लिए करीब 8,378.3 करोड़ रुपये का प्रावधान है।पूरी योजना में यह सबसे बड़ा खर्च वाला हिस्सा है। इसका सीधा असर उन स्कूलों पर पड़ सकता है जहां विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले कमरे कम हैं या जर्जर कक्षों के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है।कई सरकारी स्कूलों में एक ही कमरे में अलग-अलग गतिविधियां संचालित करने या उपलब्ध कमरों के अनुसार कक्षाएं चलाने की स्थिति सामने आती रही है। ऐसे में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष बनने से स्कूलों को अपनी कक्षाएं व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।


22,589 स्कूलों की होगी बड़ी मरम्मत

सरकार के रोडमैप में केवल नए निर्माण पर जोर नहीं है। पुराने और जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत भी योजना का बड़ा हिस्सा है।कुल 22,589 स्कूलों में मेजर रिपेयर और सुरक्षात्मक कार्य किए जाएंगे। इसके लिए करीब 1,129.5 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है।इसका मतलब है कि जिन स्कूलों को पूरी तरह नए भवन की जरूरत नहीं है, वहां मरम्मत और सुरक्षा से जुड़े काम कराकर मौजूदा ढांचे को उपयोगी बनाने की कोशिश होगी।


13,616 नए टॉयलेट कॉम्प्लैक्स का प्रस्ताव

सरकारी स्कूलों में शौचालय की सुविधा विद्यार्थियों के लिए बेहद जरूरी है। खासकर छात्राओं की स्कूल में नियमित उपस्थिति और सुरक्षित वातावरण के लिए अलग और उपयोगी शौचालय महत्वपूर्ण हैं।राजस्थान सरकार के रोडमैप में 13,616 टॉयलेट कॉम्प्लैक्स बनाने का प्रस्ताव है। इन पर करीब 340.4 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।योजना का यह हिस्सा स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सीधे सुधार से जुड़ा है।


डिजिटल शिक्षा पर भी बड़ा खर्च

सरकार की योजना केवल भवन और शौचालय तक सीमित नहीं है। डिजिटल शिक्षा को भी इसमें शामिल किया गया है। प्रस्तावित योजना के तहत 9,000 स्मार्ट क्लासरूम, 7,000 आईसीटी लैब और 80,000 टैबलेट उपलब्ध कराने की योजना है।डिजिटल शिक्षा से जुड़े काम के लिए दिसंबर 2026 तक करीब 1,087 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान बताया गया है।इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को तकनीक से जोड़ने की कोशिश होगी। हालांकि असली चुनौती यह होगी कि जिन स्कूलों में अभी भवन, बिजली, शौचालय या पर्याप्त कमरे जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है, वहां डिजिटल सुविधाएं कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचती हैं।


रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल के लिए 18 लाख मंजूर

जयपुर जिले के सांगानेर ब्लॉक के रामपुरा-कंवरपुरा राजकीय प्राथमिक विद्यालय का मामला इस पूरी बहस का सबसे चर्चित उदाहरण बन गया है।सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार तकनीकी सर्वे के बाद स्कूल भवन को सितंबर 2025 में जर्जर घोषित किया गया था। स्कूल में दो शिक्षक और 18 विद्यार्थी होने की जानकारी भी सामने आई है। भवन की स्थिति खराब होने के बाद विद्यार्थियों को दूसरे स्थान पर पढ़ाने की व्यवस्था की गई थी।अब सरकार ने नए भवन के लिए कुल 18 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इसमें 12 लाख रुपये जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट यानी DMFT से और 6 लाख रुपये विधायक कोष से दिए गए हैं। निर्माण कार्य 1 सितंबर 2026 से शुरू करने की घोषणा की गई है।


CJP अभियान के बाद तेज हुई चर्चा

रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल की स्थिति उस समय ज्यादा चर्चा में आई जब स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची CJP टीम के साथ विवाद और मारपीट की घटना सामने आई। इसके बाद स्कूल भवन और राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा तेजी से राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में आया।इसके बाद सरकार की ओर से 12,500 करोड़ रुपये के स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप की घोषणा सामने आई। हालांकि सरकार के अनुसार स्कूलों के विकास पर काम पहले से चल रहा है और 3,006 करोड़ रुपये से अधिक के काम पहले ही स्वीकृति, निविदा या क्रियान्वयन के अलग-अलग चरणों में हैं।इसलिए पूरी योजना को केवल हालिया विवाद की प्रतिक्रिया के तौर पर देखना सही नहीं होगा। लेकिन यह जरूर है कि सरकारी स्कूलों की स्थिति पर उठे सवालों के बाद इस मुद्दे को सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर ज्यादा ध्यान मिला है।


क्या 12,500 करोड़ से बदल जाएगी सरकारी स्कूलों की तस्वीर?

राजस्थान सरकार का रोडमैप कागज पर काफी बड़ा है। 3,587 नए भवन, 83,783 क्लासरूम, 22,589 स्कूलों की मरम्मत और 13,616 टॉयलेट कॉम्प्लैक्स ये आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के कई स्तरों को एक साथ शामिल किया है।लेकिन असली परीक्षा योजना की घोषणा नहीं, बल्कि उसका जमीन पर क्रियान्वयन होगा। नए भवन समय पर बनते हैं या नहीं, जर्जर स्कूलों की मरम्मत वास्तव में कितने समय में पूरी होती है, शौचालय उपयोग योग्य रहते हैं या नहीं और स्मार्ट क्लासरूम व आईसीटी लैब का इस्तेमाल नियमित पढ़ाई में कितना होता है इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में मिलेंगे।रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल का उदाहरण भी यही बताता है कि किसी जर्जर भवन की समस्या का समाधान केवल बजट स्वीकृति से पूरा नहीं होता। 18 लाख रुपये मंजूर होने के बाद अब नजर 1 सितंबर से शुरू होने वाले निर्माण और उसके पूरा होने पर होगी।राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अगर यह रोडमैप तय समयसीमा के भीतर लागू होता है तो इसका असर लाखों विद्यार्थियों के स्कूल वातावरण पर पड़ सकता है। लेकिन इसके लिए निर्माण की गुणवत्ता, समयबद्धता और जिलेवार निगरानी उतनी ही जरूरी होगी जितना बजट का प्रावधान।

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