Pension News: सरकारी कर्मचारियों की पुरानी सेवा को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पेंशन पात्रता पर अहम आदेश
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की पेंशन पात्रता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी की नियमित नियुक्ति से पहले की गई मौसमी, तदर्थ, कार्यभारित या अस्थायी सेवा को पेंशन की पात्रता निर्धारित करते समय सेवा अवधि में शामिल किया जाएगा। हालांकि पेंशन की वास्तविक राशि की गणना नियमित सेवा की अवधि के आधार पर ही की जाएगी।यह फैसला सेवानिवृत्त संग्रह अमीन चंद्रपाल भाटी की याचिका पर सुनाया गया। न्यायमूर्ति अनिश गुप्ता ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को याची को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया।
नियमित नियुक्ति से पहले की सेवा भी होगी शामिल
मामले में मुख्य सवाल यह था कि कर्मचारी की नियमित नियुक्ति से पहले की गई सेवा को पेंशन की पात्रता निर्धारित करने के लिए गिना जा सकता है या नहीं। हाईकोर्ट ने कहा कि नियमित नियुक्ति से पहले की मौसमी, तदर्थ, कार्यभारित अथवा अस्थायी सेवा को पेंशन की पात्रता तय करने के लिए सेवा अवधि में शामिल किया जाना चाहिए।इसका मतलब यह है कि कर्मचारी की नियमित नियुक्ति से पहले की सेवा को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन की राशि निर्धारित करते समय केवल नियमित सेवा को आधार बनाया जाएगा।
सेवानिवृत्त संग्रह अमीन को पेंशन देने का निर्देश
चंद्रपाल भाटी राजस्व विभाग में संग्रह अमीन के पद पर कार्यरत रहे थे। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर विवाद सामने आया। इसी को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पेंशन संबंधी सेवा की गणना को लेकर स्थिति स्पष्ट की और संबंधित अधिकारियों को याची को पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश दिया।
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
हाईकोर्ट का यह आदेश उन सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जिन्होंने नियमित नियुक्ति से पहले मौसमी, तदर्थ, कार्यभारित या अस्थायी कर्मचारी के रूप में सेवा की है। ऐसे मामलों में पुरानी सेवा को पेंशन पात्रता की गणना से बाहर किए जाने पर कर्मचारी को पेंशन संबंधी लाभ प्रभावित हो सकते हैं।अदालत ने पात्रता और पेंशन की राशि की गणना के बीच अंतर भी स्पष्ट किया है। यानी पुरानी सेवा पेंशन पाने की पात्रता तय करने में मदद करेगी, लेकिन पेंशन की रकम तय करने के लिए नियमित सेवा की अवधि ही आधार बनेगी।इस आदेश के बाद संबंधित विभागों को ऐसे मामलों में सेवा अवधि और पेंशन पात्रता का निर्धारण करते समय अदालत द्वारा स्पष्ट किए गए सिद्धांत को ध्यान में रखना होगा। हालांकि किसी कर्मचारी को वास्तविक लाभ उसके सेवा रिकॉर्ड और लागू पेंशन नियमों के अनुसार ही मिलेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें