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बुधवार, 23 सितंबर 2026

UP Teacher Salary: कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के वेतन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 1030 याचियों को राहत

 


UP Teacher Salary: कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के वेतन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 1030 याचियों को राहत

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के वेतन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने पूनम रानी वाष्णेय समेत 1030 याचियों की ओर से दाखिल याचिकाओं का निस्तारण करते हुए कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को वेतन से जुड़ी राहत दी है। मामला उन शिक्षकों से संबंधित था, जो नियमित प्रधानाध्यापक की नियुक्ति नहीं होने के कारण लंबे समय से विद्यालयों में कार्यवाहक प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी निभा रहे थे।

नियमित प्रधानाध्यापक नहीं होने पर संभाली जिम्मेदारी

याचियों की ओर से अदालत को बताया गया कि उनके संबंधित विद्यालयों में नियमित प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्ति नहीं हुई थी। इसके चलते उन्हें अलग-अलग तिथियों से कार्यवाहक प्रधानाध्यापक के रूप में विद्यालय का प्रशासनिक और शैक्षिक कार्य संभालना पड़ रहा था।याचियों का कहना था कि प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें उस पद के अनुरूप वेतन नहीं दिया गया। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और समान काम के लिए समान वेतन के आधार पर राहत की मांग की।

पहले के फैसले का भी दिया गया हवाला

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के वेतन से संबंधित पहले के न्यायिक फैसले का भी उल्लेख किया गया। उस फैसले में कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को नियमित प्रधानाध्यापक के समान वेतन पाने के अधिकार को स्वीकार किया गया था।हालांकि, बकाया वेतन के भुगतान के मामले में उस समय सुप्रीम कोर्ट के तरसेम सिंह फैसले के आधार पर सीमा तय की गई थी। इसके तहत बकाया वेतन को याचिका दाखिल करने से पहले की तीन वर्ष की अवधि तक सीमित किया गया था।

माया बनर्जी मामले का भी उल्लेख

न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने अपने फैसले में बाद के घटनाक्रम पर भी विचार किया। अदालत ने उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में माया बनर्जी मामले में तरसेम सिंह के आधार पर अपनाई गई व्यवस्था पर पुनर्विचार किया था।इस न्यायिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के वेतन संबंधी दावे पर विचार किया। मामले में 1030 याचियों के शामिल होने के कारण फैसले का असर बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षकों पर पड़ सकता है, जो नियमित प्रधानाध्यापक की नियुक्ति नहीं होने के कारण कार्यवाहक के रूप में जिम्मेदारी निभाते रहे हैं।

1030 याचियों के लिए क्या मायने रखता है फैसला?

हाईकोर्ट के इस फैसले से उन शिक्षकों के वेतन विवाद को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति बनी है, जिन्होंने नियमित प्रधानाध्यापक की अनुपस्थिति में कार्यवाहक प्रधानाध्यापक के रूप में काम किया। हालांकि प्रत्येक मामले में वेतन और बकाये की वास्तविक गणना संबंधित सेवा रिकॉर्ड, जिम्मेदारी संभालने की अवधि और विभागीय आदेशों के आधार पर होगी।अदालत ने पूनम रानी वाष्णेय समेत 1030 याचियों की याचिका का निस्तारण करते हुए मामले में लागू न्यायिक स्थिति को स्पष्ट किया है। अब संबंधित शिक्षकों के लिए विभागीय स्तर पर वेतन और बकाये के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। फैसला उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो नियमित पदाधिकारी की अनुपस्थिति में प्रधानाध्यापक का दायित्व संभालते रहे हैं।

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